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ये 20 कहानियाँ आपको जिंदगी में सफल बना सकती है || 20 Best Motivational Story in Hindi

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ये 20 कहानियाँ आपको जिंदगी में सफल बना सकती है || 20 Best Motivational Story Hindi

Motivational Story in Hindi-आज की इस पोस्ट में मैंने आपके साथ कुछ प्रेरक कहानियाँ साझा की है ये सब कहानियाँ हिंदी मोटिवेशनल स्टोरीज पर आधारित है मैंने आपके साथ 20 प्रेरणादायक कहानियाँ साझा की है तथा बीच में मोटिवेशनल वीडियोस वह प्रेरक कौटस भी साझा किये है ताकि आपको बोरियत महसूस न हो।

Motivational Story In Hindi #1 बोले हुए शब्द वापस नहीं आते

Motivational Story In Hindi #1 बोले हुए शब्द वापस नहीं आते
Motivational Story In Hindi #1 बोले हुए शब्द वापस नहीं आते

एक बार एक किसान ने अपने पडोसी को भला बुरा कह दिया , पर जब बाद में उसे अपनी गलती का एहसास हुआ तो वह एक संत के पास गया.उसने संत से अपने शब्द वापस लेने का उपाय पूछा .
संत ने किसान से कहा , ” तुम खूब सारे पंख इकठ्ठा कर लो , और उन्हें शहर के बीचो – बीच जाकर रख दो . ” किसान ने ऐसा ही किया और फिर संत के पास पहुंच गया . तब संत ने कहा , ” अब जाओ और उन पंखों को इकठ्ठा कर के वापस ले आओ ” किसान वापस गया पर तब तक सारे पंख हवा से इधर – उधर उड़ चुके थे . और किसान खाली हाथ संत के पास पहुंचा . तब संत ने उससे कहा कि ठीक ऐसा ही तुम्हारे द्वारा कहे गए शब्दों के साथ होता है , तुम आसानी से इन्हें अपने मुख से निकाल तो सकते हो पर चाह कर भी वापस नहीं ले सकते .

Motivational Story In Hindi #2 मुट्ठी भर मेढक

Motivational Story In Hindi #2 मुट्ठी भर मेढक
Motivational Story In Hindi #2 मुट्ठी भर मेढक

life story in hindi – बहुत समय पहले की बात है किसी गाँव में मोहन नाम का एक किसान रहता था . वह बड़ा मेहनती और ईमानदार था . अपने अच्छे व्यवहार के कारण दूर -दूर तक उसे लोग उसे जानते थे और उसकी प्रशंशा करते थे . पर एक दिन जब देर शाम वह खेतों से काम कर लौट रहा था तभी रास्ते में उसने कुछ लोगों को बाते करते सुना , वे उसी के बारे में बात कर रहे थे . मोहन अपनी प्रशंशा सुनने के लिए उन्हें बिना बताये धीरे -धीरे उनके पीछे चलने लगा , पर उसने उनकी बात सुनी तो पाया कि वे उसकी बुराई कर रहे थे , कोई कह रहा था कि , “ मोहन घमण्डी है . ” , तो कोई कह रहा था कि , सब जानते हैं वो अच्छा होने का दिखावा करता है ” ” मोहन ने इससे पहले सिर्फ अपनी प्रशंशा सुनी थी पर इस घटना का उसके दिमाग पर बहुत बुरा असर पड़ा और अब वह जब भी कुछ लोगों को बाते करते देखता तो उसे लगता वे उसकी बुराई कर रहे हैं . यहाँ तक कि अगर कोई उसकी तारीफ़ करता तो भी उसे लगता कि उसका मजाक उड़ाया जा रहा है . धीरे -धीरे सभी ये महसूस करने लगे कि मोहन बदल गया है , और उसकी पत्नी भी अपने पति के व्यवहार में आये बदलाव से दुखी रहने लगी और एक दिन उसने पूछा , ” आज -कल आप इतने परेशान क्यों रहते हैं कृपया मुझे इसका कारण बताइये . “

मोहन ने उदास होते हुए उस दिन की बात बता दी . पत्नी को भी समझ नहीं आया कि क्या किया जाए पर तभी उसे ध्यान आया कि पास के ही एक गाँव में एक सिद्ध महात्मा आये हुए हैं , और वो बोली , स्वामी , मुझे पता चला है कि पड़ोस के गाँव में एक पहुंचे हुए संत आये हैं ।चलिये हम उनसे कोई समाधान पूछते हैं . ” // अगले दिन वे महात्मा जी के शिविर में पहुंचे . मोहन ने सारी घटना बतायी और बोला , महाराज उस दिन के बाद से सभी मेरी बुराई और झूठी प्रशंशा करते हैं , कृपया मुझे बताइये कि मैं वापस अपनी साख कैसे बना सकता हूँ ! ! ” महात्मा मोहन कि समस्या समझ चुके थे . 11 पुत्र तुम अपनी पत्नी को घर छोड़ आओ और आज रात मेरे शिविर में ठहरो . ” , महात्मा कुछ सोचते हुए बोले . मोहन ने ऐसा ही किया , पर जब रात में सोने का समय हुआ तो अचानक ही मेढ़कों के टर्र -टर्र की आवाज आने लगी . मोहन बोला , ” ये क्या महाराज यहाँ इतना कोलाहल क्यों है ? ” ” पुत्र , पीछे एक तालाब है , रात के वक़्त उसमे मौजूद मेढक अपना राग अलापने लगते हैं !!! ” ” पर ऐसे में तो कोई यहाँ सो नहीं सकता ?? , ” मोहान ने चिंता जताई ।

” हाँ बेटा , पर तुम ही बताओ हम क्या कर सकते हैं , हो सके तो तुम हमारी मदद करो ” , महात्मा जी बोले . // मोहन बोला , ठीक है महाराज , इतना शोर सुनके लगता है इन मेढकों की संख्या हज़ारों में होगी , मैं कल ही गांव से पचास -साठ मजदूरों को लेकर आता हूँ और इन्हे पकड़ कर दूर नदी में छोड़ आता हूँ . ” और अगले दिन मोहन सुबह -सुबह मजदूरों के साथ वहाँ पंहुचा , महात्मा जी भी वहीं खड़े सब कुछ देख रहे थे . तालाब जयादा बड़ा नहीं था , 8-10 मजदूरों ने चारों और से जाल डाला और मेढ़कों को पकड़ने लगे …

थोड़ी देर की ही मेहनत में सारे मेढक पकड़ लिए गए . जब मोहन ने देखा कि कुल मिला कर 50-60 ही मेढक पकडे गए हैं तब उसने माहत्मा जी से पूछा , ” महाराज , कल रात तो इसमें हज़ारों मेढक थे , भला आज वे सब कहाँ चले गए , यहाँ तो बस मुट्ठी भर मेढक ही बचे हैं . ” महात्मा जी गम्भीर होते हुए बोले , “ कोई मेढक कहीं नहीं गया , तुमने कल इन्ही मेढ़कों की आवाज सुनी थी , ये मुट्ठी भर मेढक ही इतना शोर कर रहे थे कि तुम्हे लगा हज़ारों मेढक टर्र -टर्र कर रहे हों . पुत्र , इसी प्रकार जब तुमने कुछ लोगों को अपनी बुराई करते सुना तो भी तुम यही गलती कर बैठे , तुम्हे लगा कि हर कोई तुम्हारी बुराई करता है पर सच्चाई ये है कि बुराई करने वाले लोग मुठ्ठी भर मेढक के सामान ही थे .

इसलिए अगली बार किसी को अपनी बुराई करते सुनना तो इतना याद रखना कि हो सकता है ये कुछ ही लोग हों जो ऐसा कर रहे हों , और इस बात को भी समझना कि भले तुम कितने ही अच्छे क्यों न हो ऐसे कुछ लोग होंगे ही होंगे जो तुम्हारी बुराई करेंगे । ” अब मोहन को अपनी गलती का अहसास हो चुका था , वह पुनः पुराना वाला मोहन बन चुका था . Friends , मोहन की तरह हमें भी कुछ लोगों के व्यवहार को हर किसी का व्यवहार नहीं समझ लेना चाहिए और positive frame of mind से अपनी ज़िन्दगी जीनी चाहिए । हम कुछ भी कर लें पर life में कभी ना कभी ऐसी समस्या आ ही जाती है जो रात के अंधेरे में ऐसी लगती है मानो हज़ारों मेढक कान में टर्र – टर्र कर रहे हों । पर जब दिन के उजाले में हम उसका समाधान करने का प्रयास करते हैं तो वही समस्या छोटी लगने लगती है . इसलिए हमें ऐसी situations में घबराने की बजाये उसका solution खोजने का प्रयास करना चाहिए और कभी मुट्ठी भर मेढकों से घबराना नहीं चाहिए .

 

Motivational Story In Hindi #3 संगती का असर

Motivational Story In Hindi #3 संगती का असर
Motivational Story In Hindi #3 संगती का असर

एक बार एक राजा शिकार के उद्देश्य से अपने काफिले के साथ किसी जंगल से गुजर रहा था | दूर दूर तक शिकार नजर नहीं आ रहा था , वे धीरे धीरे घनघोर जंगल में प्रवेश करते गए | अभी कुछ ही दूर गए थे की उन्हें कुछ डाकुओं के छिपने की जगह दिखाई दी | जैसे ही वे उसके पास पहुचें कि पास के पेड़ पर बैठा तोता बोल पड़ा पकड़ो पकड़ो एक राजा आ रहा है इसके पास बहुत सारा सामान है लूटो लूटो जल्दी आओ जल्दी आओ | ” 1 तोते की आवाज सुनकर सभी डाकू राजा की और दौड़ पड़े | डाकुओ को अपनी और आते देख कर राजा और उसके सैनिक दौड़ कर भाग खड़े हुए | भागते – भागते कोसो दूर निकल गए | सामने एक बड़ा सा पेड़ दिखाई दिया | कुछ देर सुस्ताने के लिए उस पेड़ के पास चले गए , जैसे ही पेड़ के पास पहुचे कि उस पेड़ पर बैठा तोता बोल पड़ा – आओ राजन हमारे साधू महात्मा की कुटी में आपका स्वागत है |

अन्दर आइये पानी पीजिये और विश्राम कर लीजिये | तोते की इस बात को सुनकर राजा हैरत में पड़ गया , और सोचने लगा की एक ही जाति के दो प्राणियों का व्यवहार इतना अलग – अलग कैसे हो सकता है | राजा को कुछ समझ नहीं आ रहा था | वह तोते की बात मानकर अन्दर साधू की कुटिया की ओर चला गया , साधू महात्मा को प्रणाम कर उनके समीप बैठ गया और अपनी सारी कहानी सुनाई | और फिर धीरे से पूछा , ” ऋषिवर इन दोनों तोतों के व्यवहार में आखिर इतना अंतर क्यों है । “

ये कुछ साधू महात्मा धैर्य से सारी बातें सुनी और बोले , ” नहीं राजन बस संगति का असर है | डाकुओं के साथ रहकर तोता भी डाकुओं की तरह व्यवहार करने लगा है और उनकी ही भाषा बोलने लगा है | अर्थात जो जिस वातावरण में रहता है वह वैसा ही बन जाता है कहने का तात्पर्य यह है कि मूर्ख भी विद्वानों के साथ रहकर विद्वान बन जाता है और अगर विद्वान भी मूों के संगत में रहता है तो उसके अन्दर भी मूर्खता आ जाती है | इसिलिय हमें संगती सोच समझ कर करनी चाहिए |

 

Motivation Story In Hindi #4 इंसानी जज़बे की सच्ची कहानी

Motivation Story In Hindi #4 इंसानी जज़बे की सच्ची कहानी
Motivation Story In Hindi #4 इंसानी जज़बे की सच्ची कहानी

time motivational story in hindi– ये एक लड़की की real life कहानी है जो हमें कठिन से कठिन परिस्थितियों के बावजूद जीवन को सकारात्मक तरीके से जीने और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की प्रेरणा देती है . 25 सितम्बर , 2000 की बात है . तब Maricel Apatan ( मैरिकेल ऐप्टैन ) महज 11 साल की थी . उस दिन वो अपने अंकल के साथ पानी लाने के लिए बाहर निकली हुई थी . रास्ते में उन्हें चार -पांच लोगों ने घेर लिया , उनके हाथों में धारदार हथियार थे . उन्होंने अंकल से जमीन पर झुक जाने के लिए कहा और उन्हें बेहरहमी से मारने लगे .

ये देख Marice | सदमें में आ गयीं , वो उन लोगों को जानती थी , वे उसके पडोसी थे . उसे लगा कि अब उसकी जान भी नहीं बचेगी और वो उनसे बच कर भागने लगी . पर वो छोटी थी और हत्यारे आसानी से उसतक पहुँच गए … वो चिल्लाने लगी ” कुया , ‘ वाग पो , ‘ वाग न ‘ यो एकांग टैगईन ! मावा पो कायो सा एकिन ! ” ( मुझे मत मारो … मुझ पर दया करो … ) पर उन दरिंदो ने उसकी एक ना सुनी , और उनमे से एक ने गले पर चाकू से वार कीया । Maricel जमीन पर गिरकर बेहोश हो गयी .जब थोड़ी देर बाद उसे होश आया तो उसने देखा कि वहाँ खून ही खून था और वे लोग अभी भी वहीं खड़े थे , इसलिए उसने बिना किसी हरकत के मरे होने का नाटक किया .

जब वे लोग चले गए तब वो उठी और घर की और दौड़ने लगी …. भागते -भागते ही उसने देखा कि उसकी दोनों हथेलियां हाथ से जुडी लटक रही हैं . यह देख Maricel और भी घबरा गयी , और रोते – रोते भागती रही . जब वो अपने घर के करीब पहुँच गयी तब अपनी माँ को C आवाज़ दी … …. माँ बाहर आयीं और अपनी बेटी की ये हालत देख भयभीत हो गयीं , उन्होंने बेटी को तुरंत एक कम्बल में लपेटा और हॉस्पिटल ले गयीं . हॉस्पिटल दूर था , पहुँचते -पहुँचते काफी वक़्त बीत गया . डॉक्टर्स को कोई उम्मीद नहीं थी कि वे Maricel को बचा पाएंगे पर 5 घंटे के ऑपरेशन के बाद भी वो ज़िंदा थी . पर डॉक्टर्स उसका हाथ नहीं बचा पाये थे .

परेशानियां यहीं नहीं ख़त्म हुईं , जब वे वापस गए तो उनका घर लूट कर जलाया जा चुका था . गरीब होने के कारण उनके पास हॉस्पिटल का बिल भरने के पैसे भी नहीं थे … पर दूर के एक रिश्तेदार आर्चबिशप अंटोनिओ लेडेसमा की मदद से वे बिल भर पाये और अपराधियों को सजा भी दिलवा पाये .. इतना कुछ हो जाने के बाद भी Maricel ने कभी भगवन को नहीं कोसा कि उसके साथ ही ऐसा क्यों हुआ , बल्कि उसका कहना है कि , “ ईश्वर में विश्वाश रखते हुए , मैं और भी दृढ निश्चियी हो गयी कि मुझे एक सामान्य जीवन जीना है . मुझे लगता है कि मैं दुनिया में किसी ज़रूरी मिशन के लिए हूँ इसीलिए मैं इस हमले से बच पायी हूँ . “

Maricel ने हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी की और 2008 में होटल मैनेजमेंट का कोर्स भी पूरा किया . और बचपन से खाना बनाने के शौक के कारण 2011 में शेफ बनने की शिक्षा पूरी की . + Maricel Apatan Hindi 2 इतनी बड़ी डिसेबिलिटी के बावजूद जीवन में आगे जाने के जज़बे को आस -पास के लोग नज़रअंदाज नहीं कर सकते थे , और जल्द ही Maricel को मीडिया हाईलाइट करने लगा . ऐसे ही एक कार्यक्रम को देख कर होटल एडसा शांग्री -ला , Manila , Philippines ने उसे अपने यहाँ किसी प्रोजेक्ट पर काम करने का मौका दिया . Maricel के साथ काम करने वाले शेफ अल्ज़ामिल बोर्जा बताते हैं , ” वो मदद के लिए सिर्फ तभी पुकारती हैं जब उन्हें कोई गरम पात्र हटाना होता है या किसी शीशी का चिकना ढक्कन खोलना होता है .

” Maricel आज भी उसी होटल में बतौर शेफ काम करती हैं और अपने जज़बे के दम पर लाखो -करोड़ों लोगो को प्रेरित करती रहती हैं .Maricel Apatan Hindi 3 Friends , अक्सर हम अपनी life में आने वाली छोटी -मोटी परेशानियों से घबरा जाते हैं और अपना विश्वास कमजोर कर बैठते हैं , पर आज की ये कहानी बताती है कि situation कितनी ही खराब क्यों न हो हम उसे बदल सकते हैं । Maricel की कही एक बात हमें याद रखनी चाहिए- , ” यदि आप सपने देखें , कड़ी मेहनत करें और ईश्वर में आस्था रखें तो कुछ भी सम्भव है ।

 

Motivational Story In Hindi #5 बड़ा सोचो

Motivational Story In Hindi #5 बड़ा सोचो
Motivational Story In Hindi #5 बड़ा सोचो

अत्यंत गरीब परिवार का एक बेरोजगार युवक नौकरी की तलाश में किसी दूसरे शहर जाने के लिए रेलगाड़ी से सफ़र कर रहा था | घर में कभी – कभार ही सब्जी बनती थी , इसलिए उसने रास्ते में खाने के लिए सिर्फ रोटीयां ही रखी थी | आधा रास्ता गुजर जाने के बाद उसे भूख लगने लगी , और वह टिफिन में से रोटीयां निकाल कर खाने लगा | उसके खाने का तरीका कुछ अजीब था , वह रोटी का एक टुकड़ा लेता और उसे टिफिन के अन्दर कुछ ऐसे डालता मानो रोटी के साथ कुछ और भी खा रहा हो , जबकि उसके पास तो सिर्फ रोटीयां थीं !! उसकी इस हरकत को आस पास के और दूसरे यात्री देख कर हैरान हो रहे थे | वह युवक हर बार रोटी का एक टुकड़ा लेता और झूठमूठ का टिफिन में डालता और खाता | सभी सोच रहे थे कि आखिर वह युवक ऐसा क्यों कर रहा था | आखिरकार एक व्यक्ति से रहा नहीं गया और उसने उससे पूछ ही लिया की भैया तुम ऐसा क्यों कर रहे हो , तुम्हारे पास सब्जी तो है ही नहीं फिर रोटी के टुकड़े को हर बार खाली टिफिन में डालकर ऐसे खा रहे हो मानो उसमे सब्जी हो | तब उस युवक ने जवाब दिया , ” भैया , इस खाली ढक्कन में सब्जी नहीं है लेकिन मै अपने मन में यह सोच कर खा रहा हू की इसमें बहुत सारा आचार है , मै आचार के साथ रोटी खा रहा हू | ” फिर व्यक्ति ने पूछा , “ खाली ढक्कन में आचार सोच कर सूखी रोटी को खा रहे हो तो क्या तुम्हे आचार का स्वाद आ रहा है ? “
” हाँ , बिलकुल आ रहा है , मै रोटी के साथ अचार सोचकर खा रहा हूँ और मुझे बहुत अच्छा भी लग रहा है | ” , युवक ने जवाब दिया उसके इस बात को आसपास के यात्रियों ने भी सुना , और उन्ही में से एक व्यक्ति बोला , ” जब सोचना ही था तो तुम आचार की जगह पर मटर – पनीर सोचते , शाही गोभी सोचते …. तुम्हे इनका स्वाद मिल जाता | तुम्हारे कहने के मुताबिक तुमने आचार सोचा तो आचार का स्वाद आया तो और स्वादिष्ट चीजों के बारे में सोचते तो उनका स्वाद आता | सोचना ही था तो भला छोटा क्यों सोचे तुम्हे तो बड़ा सोचना चाहिए था।

 

 

Motivation Story In Hindi #6 लालच बुरी बला है |

Motivation Story In Hindi #6 लालच बुरी बला है |
Motivation Story In Hindi #6 लालच बुरी बला है |

एक शहर में एक आदमी रहता था। वह बहुत ही लालची था। उसने सुन रखा था की अगर संतो और साधुओं की सेवा करे तो बहुत ज्यादा धन प्राप्त होता है। यह सोच कर उसने साधू-संतो की सेवा करनी प्रारम्भ कर दी। एक बार उसके घर बड़े ही चमत्कारी संत आये।

उन्होंने उसकी सेवा से प्रसन्न होकर उसे चार दीये दिए और कहा,”इनमे से एक दीया जला लेना और पूरब दिशा की ओर चले जाना जहाँ यह दीया बुझ जाये, वहा की जमीन को खोद लेना, वहा तुम्हे काफी धन मिल जायेगा। अगर फिर तुम्हे धन की आवश्यकता पड़े तो दूसरा दीया जला लेना और पक्षिम दिशा की ओर चले जाना, जहाँ यह दीया बुझ जाये, वहा की जमीन खोद लेना तुम्हे मन चाही माया मिलेगी। फिर भी संतुष्टि ना हो तो तीसरा दीया जला लेना और दक्षिण दिशा की ओर चले जाना। उसी प्रकार दीया बुझने पर जब तुम वहाँ की जमीन खोदोगे तो तुम्हे बेअन्त धन मिलेगा। तब तुम्हारे पास केवल एक दीया बच जायेगा और एक ही दिशा रह जायेगी। तुमने यह दीया ना ही जलाना है और ना ही इसे उत्तर दिशा की ओर ले जाना है।”

यह कह कर संत चले गए। लालची आदमी उसी वक्त पहला दीया जला कर पूरब दिशा की ओर चला गया। दूर जंगल में जाकर दीया बुझ गया। उस आदमी ने उस जगह को खोदा तो उसे पैसो से भरी एक गागर मिली। वह बहुत खुश हुआ। उसने सोचा की इस गागर को फिलहाल यही रहने देता हूँ, फिर कभी ले जाऊंगा। पहले मुझे जल्दी ही पक्षिम दिशा वाला धन देख लेना चाहिए। यह सोच कर उसने दुसरे दिन दूसरा दीया जलाया और पक्षिम दिशा की ओर चल पड़ा। दूर एक उजाड़ स्थान में जाकर दीया बुझ गया। वहा उस आदमी ने जब जमीन खोदी तो उसे सोने की मोहरों से भरा एक घड़ा मिला। उसने घड़े को भी यही सोचकर वही रहने दिया की पहले दक्षिण दिशा में जाकर देख लेना चाहिए। जल्दी से जल्दी ज्यादा से ज्यादा धन प्राप्त करने के लिए वह बेचैन हो गया।

अगले दिन वह दक्षिण दिशा की ओर चल पड़ा। दीया एक मैदान में जाकर बुझ गया। उसने वहा की जमीन खोदी तो उसे हीरे-मोतियों से भरी दो पेटिया मिली। वह आदमी अब बहुत खुश था।

तब वह सोचने लगा अगर इन तीनो दिशाओ में इतना धन पड़ा है तो चौथी दिशा में इनसे भी ज्यादा धन होगा। फिर उसके मन में ख्याल आया की संत ने उसे चौथी दिशा की ओर जाने के लिए मन किया है। दुसरे ही पल उसके मन ने कहा,” हो सकता है उत्तर दिशा की दौलत संत अपने लिए रखना चाहते हो। मुझे जल्दी से जल्दी उस पर भी कब्ज़ा कर लेना चाहिए।” ज्यादा से ज्यादा धन प्राप्त करने की लालच ने उसे संतो के वचनों को दुबारा सोचने ही नहीं दिया।

अगले दिन उसने चौथा दीया जलाया और जल्दी-जल्दी उत्तर दिशा की ओर चल पड़ा। दूर आगे एक महल के पास जाकर दीया बुझ गया। महल का दरवाज़ा बंद था। उसने दरवाज़े को धकेला तो दरवाज़ा खुल गया। वह बहुत खुश हुआ। उसने मन ही मन में सोचा की यह महल उसके लिए ही है। वह अब तीनो दिशाओ की दौलत को भी यही ले आकर रखेगा और ऐश करेगा।

वह आदमी महल के एक-एक कमरे में गया। कोई कमरा हीरे-मोतियों से भरा हुआ था। किसी कमरे में सोने के किमती से किमती आभूषण भरे पड़े थे। इसी प्रकार अन्य कमरे भी बेअन्त धन से भरे हुए थे। वह आदमी चकाचौंध होता जाता और अपने भाग्य को शाबासी देता। वह जरा और आगे बढ़ा तो उसे एक कमरे में चक्की चलने की आवाज़ सुनाई दी। वह उस कमरे में दाखिल हुआ तो उसने देखा की एक बूढ़ा आदमी चक्की चला रहा है। लालची आदमी ने बूढ़े से कहा की तू यहाँ कैसे पंहुचा। बूढ़े ने कहा,”ऐसा कर यह जरा चक्की चला, मैं सांस लेकर तुझे बताता हूँ।”

लालची आदमी ने चक्की चलानी प्रारम्भ कर दी। बूढ़ा चक्की से हट जाने पर ऊँची-ऊँची हँसने लगा। लालची आदमी उसकी ओर हैरानी से देखने लगा। वह चक्की बंद ही करने लगा था की बूढ़े ने खबरदार करते हुए कहा, “ना ना चक्की चलानी बंद ना कर।” फिर बूढ़े ने कहा,”यह महल अब तेरा है। परन्तु यह उतनी देर तक खड़ा रहेगा जितनी देर तक तू चक्की चलाता रहेगा। अगर चक्की चक्की चलनी बंद हो गयी तो महल गिर जायेगा और तू भी इसके निचे दब कर मर जायेगा।” कुछ समय रुक कर बूढ़ा फिर कहने लगा,”मैंने भी तेरी ही तरह लालच करके संतो की बात नहीं मानी थी और मेरी सारी जवानी इस चक्की को चलाते हुए बीत गयी।”

वह लालची आदमी बूढ़े की बात सुन कर रोने लग पड़ा। फिर कहने लगा,”अब मेरा इस चक्की से छुटकारा कैसे होगा?”

बूढ़े ने कहा,”जब तक मेरे और तेरे जैसा कोई आदमी लालच में अंधा होकर यहाँ नही आयेगा। तब तक तू इस चक्की से छुटकारा नहीं पा सकेगा।” तब उस लालची आदमी ने बूढ़े से आखरी सवाल पूछा,”तू अब बाहर जाकर क्या करेगा?”

बूढ़े ने कहा,”मैं सब लोगो से ऊँची-ऊँची कहूँगा, लालच बुरी बला है।”

 

Motivational Story In Hindi #7 सबसे बड़ी चीज |


motivational story in hindi pdf– एक दिन बीरबल दरबार में उपस्थित नहीं थे। ऐसे में बीरबल से जलने वाले सभी सभासद बीरबल के खिलाफ बादशाह अकबर के कान भर रहे थे। अक्सर ऐसा ही होता था, जब भी बीरबल दरबार में उपस्थित नहीं होते थे, तभी दरबारियों को मौका मिल जाता था। आज भी ऐसा ही मौका था।

बादशाह के साले मुल्ला दो प्याजा की शह पाए कुछ सभासदों ने कहा -‘जहांपनाह! आप वास्तव में बीरबल को आवश्यकता से अधिक मान देते हैं, हम लोगों से ज्यादा उन्हें चाहते हैं। आपने उन्हें बहुत सिर चढ़ा रखा है।जबकि जो काम वे करते हैं, वह हम भी कर सकते हैं। मगर आप हमें मौका ही नहीं देते।’

बादशाह को बीरबल की बुराई अच्छी नहीं लगती थी, अतः उन्होंने उन चारों की परीक्षा ली- ‘देखो, आज बीरबल तो यहां हैं नहीं और मुझे अपने एक सवाल का जवाब चाहिए। यदि तुम लोगों ने मेरे प्रश्न का सही-सही जवाब नहीं दिया तो मैं तुम चारों को फांसी पर चढ़वा दूंगा।’ बादशाह की बात सुनकर वे चारों घबरा गए।

उनमें से एक ने हिम्मत करके कहा- ‘प्रश्न बताइए बादशाह सलामत ?’ ‘संसार में सबसे बड़ी चीज क्या है?
….और अच्छी तरह सोच-समझ कर जवाब देना वरना मैं कह चुका हूं कि तुम लोगों को फांसी पर चढ़वा दिया जाएगा।’

बादशाह अकबर ने कहा- ‘अटपटे जवाब हरगिज नहीं चलेंगे। जवाब एक हो और बिलकुल सही हो।’ ‘बादशाह सलामत? हमें कुछ दिनों की मोहलत दी जाए।’ उन्होंने सलाह करके कहा। ‘ठीक है, तुम लोगों को एक सप्ताह का समय देता हूं।’ बादशाह ने कहा। चारों दरबारी चले गए और दरबार से बाहर आकर सोचने लगे कि सबसे बड़ी चीज क्या हो सकती है?

एक दरबारी बोला- ‘मेरी राय में तो अल्लाह से बड़ा कोई नहीं।’’अल्लाह कोई चीज नहीं है। कोई दूसरा उत्तर सोचो।’ – दूसरा बोला। ‘सबसे बड़ी चीज है भूख जो आदमी से कुछ भी करवा देती है।’ – तीसरे ने कहा। ‘नहीं…नहीं, भूख भी बर्दाश्त की जा सकती है।’

‘फिर क्या है सबसे बड़ी चीज?’ छः दिन बीत गए लेकिन उन्हें कोई उत्तर नहीं सूझा। हार कर वे चारों बीरबल के पास पहुंचे और उसे पूरी घटना कह सुनाई, साथ ही हाथ जोड़कर विनती की कि प्रश्न का उत्तर बता दें।बीरबल ने मुस्कराकर कहा- ‘मैं तुम्हारे प्रश्न का उत्तर दूंगा, लेकिन मेरी एक शर्त है।’

‘हमें आपकी हजार शर्तें मंजूर हैं।’ चारों ने एक स्वर में कहा- ‘बस आप हमें इस प्रश्न का उत्तर बताकर हमारी जान बख्शी करवाएं। ‘बताइए आपकी क्या शर्त है?’ ‘तुममें से दो अपने कंधों पर मेरी चारपाई रखकर दरबार तक ले चलोगे। एक मेरा हुक्का पकड़ेगा, एक मेरे जूते लेकर चलेगा।’ बीरबल ने अपनी शर्त बताते हुए कहा।

यह सुनते ही वे चारों सन्नाटे में आ गए। उन्हें लगा मानो बीरबल ने उनके गाल पर कस कर तमाचा मार दिया हो। मगर वे कुछ बोले नहीं। अगर मौत का खौफ न होता तो वे बीरबल को मुंहतोड़ जवाब देते, मगर इस समय मजबूर थे, अतः तुरंत राजी हो गए।

दो ने अपने कंधों पर बीरबल की चारपाई उठाई, तीसरे ने उनका हुक्का और चौथा जूते लेकर चल दिया। रास्ते में लोग आश्चर्य से उन्हें देख रहे थे। दरबार में बादशाह ने भी यह मंजर देखा और वह मौजूद दरबारियों ने भी। कोई कुछ न समझ सका।

तभी बीरबल बोले- ‘महाराज? दुनिया में सबसे बड़ी चीज है- गरज। अपनी गरज से यह पालकी यहां तक उठाकर लाए हैं।’ बादशाह मुस्कराकर रह गए। वे चारों सिर झुकाकर एक ओर खड़े हो गए।

 

Motivational Story In Hindi #8 इन्सान की सोच ही जीवन का आधार हैं |

 

तीन राहगीर रास्ते पर एक पेड़ के नीचे मिले | तीनो लम्बी यात्रा पर निकले थे | कुछ देर सुस्ताने के लिए पेड़ की घनी छाया में बैठ गए | तीनो के पास दो झोले थे एक झोला आगे की तरफ और दूसरा पीछे की तरफ लटका हुआ था |

तीनो एक साथ बैठे और यहाँ-वहाँ की बाते करने लगे जैसे कौन कहाँ से आया? कहाँ जाना हैं? कितनी दुरी हैं ? घर में कौन कौन हैं ?ऐसे कई सवाल जो अजनबी एक दुसरे के बारे में जानना चाहते हैं |

तीनो यात्री कद काठी में सामान थे पर सबके चेहरे के भाव अलग-अलग थे | एक बहुत थका निराश लग रहा था जैसे सफ़र ने उसे बोझिल बना दिया हो | दूसरा थका हुआ था पर बोझिल नहीं लग रहा था और तीसरा अत्यन्त आनंद में था | एक दूर बैठा महात्मा इन्हें देख मुस्कुरा रहा था |

तभी तीनो की नजर महात्मा पर पड़ी और उनके पास जाकर तीनो ने सवाल किया कि वे मुस्कुरा क्यूँ रहे हैं | इस सवाल के जवाब में महात्मा ने तीनो से सवाल किया कि तुम्हारे पास दो दो झोले हैं इन में से एक में तुम्हे लोगो की अच्छाई को रखना हैं और एक में बुराई को बताओ क्या करोगे ?

एक ने कहा मेरे आगे वाले झोले में, मैं बुराई रखूँगा ताकि जीवन भर उनसे दूर रहू | और पीछे अच्छाई रखूँगा | दुसरे ने कहा- मैं आगे अच्छाई रखूँगा ताकि उन जैसा बनू और पीछे बुराई ताकि उनसे अच्छा बनू | तीसरे ने कहा मैं आगे अच्छाई रखूँगा ताकि उनके साथ संतुष्ट रहूँ और पीछे बुराई रखूँगा और पीछे के थैले में एक छेद कर दूंगा जिससे वो बुराई का बोझ कम होता रहे हैं और अच्छाई ही मेरे साथ रहे अर्थात वो बुराई को भूला देना चाहता था |

यह सुनकर महात्मा ने कहा – पहला जो सफ़र से थक कर निराश दिख रहा हैं जिसने कहा कि वो बुराई सामने रखेगा वो इस यात्रा के भांति जीवन से थक गया हैं क्यूंकि उसकी सोच नकारात्मक हैं उसके लिए जीवन कठिन हैं |

दूसरा जो थका हैं पर निराश नहीं, जिसने कहा अच्छाई सामने रखूँगा पर बुराई से बेहतर बनने की कोशिश में वो थक जाता हैं क्यूंकि वो बेवजह की होड़ में हैं |

तीसरा जिसने कहा वो अच्छाई आगे रखता हैं और बुराई को पीछे रख उसे भुला देना चाहता हैं वो संतुष्ट हैं और जीवन का आनंद ले रहा हैं | इसी तरह वो जीवन यात्रा में खुश हैं |

 

Motivational Story In Hindi #9 स्थिति समझे बिना कोई नकारात्मक प्रतिक्रिया न दें |

 

एक डॉक्टर बड़ी ही तेजी से हॉस्पिटल में घुसा , उसे किसी एक्सीडेंट के मामले में तुरंत बुलाया गया था। अंदर घुसते ही उसने देखा कि जिस लड़के का एक्सीडेंट हुआ है उसके परिजन बड़ी बेसब्री से उसका इंतज़ार कर रहे हैं।

डॉक्टर को देखते ही लड़के का पिता बोला , ” आप लोग अपनी ड्यूटी ठीक से क्यों नहीं करते , आपने आने में इतनी देर क्यों लगा दी ….अगर मेरे बेटे को कुछ हुआ तो इसके जिम्मेदार आप होंगे …”

डॉक्टर ने विनम्रता कहा , ” आई ऍम सॉरी , मैं हॉस्पिटल में नहीं था , और कॉल आने के बाद जितना तेजी से हो सका मैं यहाँ आया हूँ। कृपया अब आप लोग शांत हो जाइये ताकि मैं इलाज कर सकूँ….”

“शांत हो जाइये !!!” , लड़के का पिता गुस्से में बोला , ” क्या इस समय अगर आपका बेटा होता तो आप शांत रहते ? अगर किसी की लापरवाही की वजह से आपका अपना बेटा मर जाए तो आप क्या करेंगे ?” ; पिता बोले ही जा रहा था।

” भगवान चाहेगा तो सब ठीक हो जाएगा , आप लोग दुआ कीजिये मैं इलाज के लिए जा रहा हूँ। ” , और ऐसा कहते हुए डॉक्टर ऑपरेशन थिएटर में प्रवेश कर गया।

बाहर लड़के का पिता अभी भी बुदबुदा रहा था , ” सलाह देना आसान होता है , जिस पर बीतती है वही जानता है…”

करीब डेढ़ घंटे बाद डॉक्टर बाहर निकला और मुस्कुराते हुए बोला , ” भगवान् का शुक्र है आपका बेटा अब खतरे से बाहर है। “

यह सुनते ही लड़के के परिजन खुश हो गए और डॉक्टर से सवाल पर सवाल पूछने लगे , ” वो कब तक पूरी तरह से ठीक हो जायेगा…… उसे डिस्चार्ज कब करेंगे….?…”

पर डॉक्टर जिस तेजी से आया था उसी तेजी से वापस जाने लगा और लोगों से अपने सवाल नर्स से पूछने को कहा।

” ये डॉक्टर इतना घमंडी क्यों है , ऐसी क्या जल्दी है कि वो दो मिनट हमारे सवालों का जवाब नहीं दे सकता ?” लड़के के पिता ने नर्स से कहा।

नर्स लगभग रुंआसी होती हुई बोली , ” आज सुबह डॉक्टर साहब के लड़के की एक भयानक एक्सीडेंट में मौत हो गयी , और जब हमने उन्हें फ़ोन किया था तब वे उसका अंतिम संस्कार करने जा रहे थे।

और बेचारे अब आपके बच्चे की जान बचाने के बाद अपने लाडले का अंतिम संस्कार करने के लिए वापस लौट रहे हैं। “

यह सुन लड़के के परिजन और पिता स्तब्ध रह गए और उन्हें अपनी गलती का ऐहसास हो गया।

फ्रेंड्स, बहुत बार हम किसी सिचुएशन के बारे में अच्छी तरह जाने बिना ही उसपर रियेक्ट कर देते हैं। पर हमें चाहिए कि हम खुद पर नियंत्रण रखें और पूरी स्थिति को समझे बिना कोई नकारात्मक प्रतिक्रिया न दें। वर्ना अनजाने में हम उसे ही ठेस पहुंचा सकते हैं जो हमारा ही भला सोच रहा हो।

 

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Motivation Story In Hindi #10 ईमानदारी का फल |

Motivational Story In Hindi #10 ईमानदारी का फल |
Motivational Story In Hindi #10 ईमानदारी का फल |

knowledge story in hindi – गोपाल एक गरीब लकडहारा था । वह रोज जंगल में जाकर लकडिया काटता था और शाम को उन्हें बाजार में बेच देता था । लकड़ियों को बेचने से जो पैसे मिलते उन्ही से उसके परिवार का गुजर-बसर होता था ।

एक दिन गोपाल जंगल में दूर तक निकल गया । वहाँ उसकी द्रष्टि नदी के किनारे एक बड़े पेड़ पर पड़ी । उसने सोचा की आज उसे बहोत सारी लकड़ियाँ मिल जाएँगी । वह अपनी कुल्हाड़ी लेकर उस पेड़ पर चढ़ गया । अभी उसने एक डाल काटना शरु ही किया था की अचानक उसके हाथ से कुल्हाड़ी छुट गई और नदी में जा गिरी । गोपाल जटपट पेड़ से निचे उतरा और नदी में अपनी कुल्हाड़ी ढूंढने लगा । उसने बहोत कोशिश की, पर कुल्हाड़ी उसके हाथ न लगी । उदास होकर वह पेड़ के नीचे जाकर बैठ गया ।

इतने में एक देवदूत वहां आ पहुंचा । उसने गोपाल से उसकी उदासी का कारण पुछा । गोपाल ने देवदूत को कुल्हाड़ी नदी में गिर जाने की बात बताई । देवदूत ने उसे धीरज बंधाते हुए कहा “घबराओ मत, मै तुम्हारी कुल्हाड़ी निकल दूंगा ।”

यह कहकर देवदूत ने नदी में डूबकी लगाई । वह सोने की कुल्हाड़ी लेकर बहार निकला । उसने गोपाल से पूछा “ क्या यही तुम्हारी कुल्हाड़ी है । ” गोपाल ने कहा, “ नहीं महाराज, यह मेरी कुल्हाड़ी नहीं है । ” फिर दूसरी बार डूबकी लगाकर देवदूत ने चांदी की कुल्हाड़ी निकाली । तब भी लकडहारे ने इनकार करते हुए कहा, “ नहीं, यह भी मेरी कुल्हाड़ी नहीं है । ” देवदूत ने फिर डुबकी लगाई । इस बार उसने नदी से लोहे की कुल्हाड़ी निकाली । उस कुल्हाड़ी को देखते ही गोपाल ख़ुशी से चिल्ला उठा, “ हाँ महाराज, यही मेरी कुल्हाड़ी है । ”

गोपाल की इमानदारी पर देवदूत बहोत खुश हुआ । लोहे की कुल्हाड़ी के साथ-साथ सोने की और चांदी की कुल्हाड़िया भी देवदूत ने गोपाल को इनाम में दे दी । गोपाल ने देवदूत का बड़ा आभार मन ।

सीख : इमानदारी एक अच्छा गुण है । इमानदारी का फल मीठा होता है ।

 

Motivational Story In Hindi #11 परिश्रम ही धन है |

Motivational Story In Hindi #11 परिश्रम ही धन है |
Motivational Story In Hindi #11 परिश्रम ही धन है |

real life inspirational stories in hindi– सुन्दरपुर गावं में एक किशन रहेता था । उसके चार बेटे थे । वे सभी आलसी और निक्कमे थे । जब किशन बुढा हुआ तो उसे बेटो की चिंता सताने लगी ।

एक बार किशान बहोत बीमार पड़ा । मृत्यु निकट देखकर उसने चार बेटो को अपने पास बुलाया । उसने उस चारो को कहा “ मैने बहुत सा धन अपने खेत में गाड रखा है । तुम लोग उसे निकल लेना ।” इतना कहते – कहते किशान के प्राण निकल गए ।

पिता का क्रिया-क्रम करने के बाद चारो भाइयो ने खेत की खुदाई शुरू कर दी । उन्होंने खेत का चप्पा-चप्पा खोद डाला, पर उन्हें कही धन नहीं मिला । उन्होंने पिता को खूब कोसा ।वर्षा रुतु आनेवाली थी । किशान के बेटों ने उस खेत में धान के बिज बो दिए । वर्षा का पानी पाकर पौधे खूब बढे । उन पर बड़ी-बड़ी बालें लगी । उस साल खेत में धान की बहोत अच्छी फसल हुई ।

चारों भाई बहुत खुश हुए । अब पिताकी बात का सही अर्थ उनकी समझ में आ गया । उन्होंने खेत की खुदाई करने में जो परिश्रम किया था, उसी से उन्हें अच्छी फसल के रूप में बहुत धन मिला था ।

इस प्रकार श्रम का महत्व समझने पर चारो भाई मन लगाकर खेती करने लगे ।

सिख : परिश्रम ही सच्चा धन है ।

 

Motivational Story In Hindi #12 घमंडी का सिर नीचा |

नारियल के पेड़ बड़े ही ऊँचे होते हैं और देखने में बहुत सुंदर होते हैं | एक बार एक नदी के किनारे नारियल का पेड़ लगा हुआ था | उस पर लगे नारियल को अपने पेड़ के सुंदर होने पर बहुत गर्व था | सबसे ऊँचाई पर बैठने का भी उसे बहुत मान था | इस कारण घमंड में चूर नारियल हमेशा ही नदी के पत्थर को तुच्छ पड़ा हुआ कहकर उसका अपमान करता रहता |

एक बार, एक शिल्प कार उस पत्थर को लेकर बैठ गया और उसे तराशने के लिए उस पर तरह – तरह से प्रहार करने लगा | यह देख नारियल को और अधिक आनंद आ गया उसने कहा – ऐ पत्थर ! तेरी भी क्या जिन्दगी हैं पहले उस नदी में पड़ा रहकर इधर- उधर टकराया करता था और बाहर आने पर मनुष्य के पैरों तले रौंदा जाता था और आज तो हद ही हो गई | ये शिल्पी तुझे हर तरफ से चोट मार रहा हैं और तू पड़ा देख रहा हैं | अरे ! अपमान की भी सीमा होती हैं | कैसी तुच्छ जिन्दगी जी रहा हैं | मुझे देख कितने शान से इस ऊँचे वृक्ष पर बैठता हूँ | पत्थर ने उसकी बातों पर ध्यान ही नहीं दिया | नारियल रोज इसी तरह पत्थर को अपमानित करता रहता |

कुछ दिनों बाद, उस शिल्पकार ने पत्थर को तराशकर शालिग्राम बनाये और पूर्ण आदर के साथ उनकी स्थापना मंदिर में की गई | पूजा के लिए नारियल को पत्थर के बने उन शालिग्राम के चरणों में चढ़ाया गया | इस पर पत्थर ने नारियल से बोला – नारियल भाई ! कष्ट सहकर मुझे जो जीवन मिला उसे ईश्वर की प्रतिमा का मान मिला | मैं आज तराशने पर ईश्वर के समतुल्य माना गया | जो सदैव अपने कर्म करते हैं वे आदर के पात्र बनते हैं | लेकिन जो अहंकार/ घमंड का भार लिए घूमते हैं वो नीचे आ गिरते हैं | ईश्वर के लिए समर्पण का महत्व हैं घमंड का नहीं | पूरी बात नारियल ने सिर झुकाकर स्वीकार की जिस पर नदी बोली इसे ही कहते हैं घमंडी का सिर नीचा (Ghamandi Ka Sar Neecha) |

Motivational Story In Hindi #13 चतुराई से कठिन काम भी संभव |

एक जंगल में महाचतुरक नामक सियार रहता था। एक दिन जंगल में उसने एक मरा हुआ हाथी देखा। उसकी बांछे खिल गईं। उसने हाथी के मृत शरीर पर दांत गड़ाया पर चमड़ी मोटी होने की वजह से, वह हाथी को चीरने में नाकाम रहा।

वह कुछ उपाय सोच ही रहा था कि उसे सिंह आता हुआ दिखाई दिया। आगे बढ़कर उसने सिंह का स्वागत किया और हाथ जोड़कर कहा, “स्वामी आपके लिए ही मैंने इस हाथी को मारकर रखा है, आप इस हाथी का मांस खाकर मुझ पर उपकार कीजिए।” सिंह ने कहा, “मैं तो किसी के हाथों मारे गए जीव को खाता नहीं हूं, इसे तुम ही खाओ।”

सियार मन ही मन खुश तो हुआ पर उसकी हाथी की चमड़ी को चीरने की समस्या अब भी हल न हुई थी।

थोड़ी देर में उस तरफ एक बाघ आ निकला। बाघ ने मरे हाथी को देखकर अपने होंठ पर जीभ फिराई। सियार ने उसकी मंशा भांपते हुए कहा, “मामा आप इस मृत्यु के मुंह में कैसे आ गए? सिंह ने इसे मारा है और मुझे इसकी रखवाली करने को कह गया है।

एक बार किसी बाघ ने उनके शिकार को जूठा कर दिया था तब से आज तक वे बाघ जाति से नफरत करने लगे हैं। आज तो हाथी को खाने वाले बाघ को वह जरुर मार गिराएंगे।”

यह सुनते ही बाघ वहां से भाग खड़ा हुआ। पर तभी एक चीता आता हुआ दिखाई दिया। सियार ने सोचा चीते के दांत तेज होते हैं। कुछ ऐसा करूं कि यह हाथी की चमड़ी भी फाड़ दे और मांस भी न खाए।

उसने चीते से कहा, “प्रिय भांजे, इधर कैसे निकले? कुछ भूखे भी दिखाई पड़ रहे हो।” सिंह ने इसकी रखवाली मुझे सौंपी है, पर तुम इसमें से कुछ मांस खा सकते हो। मैं जैसे ही सिंह को आता हुआ देखूंगा, तुम्हें सूचना दे दूंगा, तुम सरपट भाग जाना”।

पहले तो चीते ने डर से मांस खाने से मना कर दिया, पर सियार के विश्वास दिलाने पर राजी हो गया।

चीते ने पलभर में हाथी की चमड़ी फाड़ दी। जैसे ही उसने मांस खाना शुरू किया कि दूसरी तरफ देखते हुए सियार ने घबराकर कहा, “भागो सिंह आ रहा है”। इतना सुनना था कि चीता सरपट भाग खड़ा हुआ। सियार बहुत खुश हुआ। उसने कई दिनों तक उस विशाल जानवर का मांस खाया।

सिर्फ अपनी सूझ-बूझ से छोटे से सियार ने अपनी समस्या का हल निकाल लिया। इसीलिए कहते हैं कि बुद्धि के प्रयोग से कठिन से कठिन काम भी संभव हो जाता है।

 

Motivational Story In Hindi #14 बड़ों की बात मानो |

Motivational Story In Hindi #14 बड़ों की बात मानो |
Motivational Story In Hindi #14 बड़ों की बात मानो |

एक बहुत घना जंगल था, उसमें पहाड़ थे और शीतल निर्मल जल के झरने बहते थे। जंगल में बहुत- से पशु रहते थे। पर्वत की गुफा में एक शेर- शेरनी और इन के दो छोटे बच्चे रहते थे। शेर और शेरनी अपने बच्चों को बहुत प्यार करते थे।

जब शेर के बच्चे अपने माँ बाप के साथ जंगल में निकलते तो उन्हें बहुत अच्छा लगता था। लेकिन शेर- शेरनी अपने बच्चों को बहुत कम अपने साथ ले जाते थे। वे बच्चों को गुफा में छोड़कर वन में अपने भोजन की खोज में चले जाया करते थे।

शेर और शेरनी अपने बच्चों को बार- बार समझाते थे कि वे अकेले गुफा से बाहर भूलकर भी न निकलें। लेकिन बड़े बच्चे को यह बात अच्छी नहीं लगती थी। एक दिन शेर- शेरनी जंगल में गये थे, बड़े बच्चे ने छोटे से कहा- चलो झरने से पानी पी आएँ और वन में थोड़ा घूमें। हिरनों को डरा देना मुझे बहुत अच्छा लगता है।

छोटे बच्चे ने कहा- ‘पिता जी ने कहा है कि अकेले गुफा से मत निकलना। झरने के पास जाने को बहुत मना किया है। तुम ठहरो पिताजी या माताजी को आने दो। हम उनके साथ जाकर पानी पीलेंगे।’
बड़े बच्चे ने कहा- ‘मुझे प्यास लगी है। सब पशु तो हम लोगों से डरते ही हैं। फिर डरने की क्या बातहै?’

छोटा बच्चा अकेला जाने को तैयार नहीं हुआ। उसने कहा- ‘मैं तो माँ- बाप की बात मानूँगा। मुझे अकेला जाने में डर लगता है।’ बड़े भाई ने कहा। ‘तुम डरपोक हो, मत जाओ, मैं तो जाता हूँ।’ बड़ा बच्चा गुफा से निकला और झरने के पास गया। उसने पेट भर पानी पिया और तब हिरनों को ढकतेहुए इधर- उधर घूमने लगा।

जंगल में उस दिन कुछ शिकारी आये हुए थे। शिकारियों ने दूर से शेर के बच्चे को अकेले घूमते देखा तो सोचा कि इसे पकड़कर किसी चिड़िया घर में बेच देने से अच्छे रुपये मिलेंगे। शिकारियों ने शेर के बच्चे को चारों ओर से घेर लिया और एक साथ उस पर टूट पड़े। उन लोगों ने कम्बल डालकर उस बच्चे को पकड़ लिया।

बेचारा शेर का बच्चा क्या करता। वह अभी कुत्ते जितना बड़ा भी नहीं हुआ था। उसे कम्बल में खूब लपेटकर उन लोगों ने रस्सियों से बाँध दिया। वह न तो छटपटा सकता था, न गुर्रा सकता था।

शिकारियों ने इस बच्चे को एक चिड़िया घर को बेच दिया। वहाँ वह एक लोहे के कटघरे में बंद कर दिया गया। वह बहुत दुःखी था। उसे अपने माँ- बाप की बहुत याद आती थी। बार- बार वह गुर्राताऔर लोहे की छड़ों को नोचता था, लेकिन उसके नोचने से छड़ तो टूट नहीं सकती थी।

जब भी वह शेर का बच्चा किसी छोटे बालक को देखता तो बहुत गुर्राता और उछलता था। यदि कोई उसकी भाषा समझा सकता तो वह उससे अवश्य कहता- ‘तुम अपने माँ- बाप तथा बड़ों की बात अवश्य मानना। बड़ों की बात न मानने से पीछे पश्चात्ताप करना पड़ता है। मैं बड़ों की बात न मानने से ही यहाँ बंदी हुआ हूँ।’

सच है- जे सठ निज अभिमान बस, सुनहिं न गुरुजन बैन।
जे जग महँ नित लहहिं दुःख, कबहुँ न पावहिं चैन॥

 

Motivational Story In Hindi #15 जिन्दगी के आधार |

हर इंसान के लिए जीवन में शांति सर्वोपरि है. शांति के बिना इन्सान कोई सिद्धि (Achievement) हासिल नहीं कर सकता है. परन्तु आज की भागमभाग में शांति के आधारभूत तत्वों को ही भूलते जा रहे हैं. इस समस्या का मूल हल बताती यह Heart touching कहानी प्रस्तुत है :

एक दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर अपने सामने टेबल पर कुछ वस्तुओं के साथ अपनी कक्षा के आगे खड़े थे. बिना कुछ बोले अपनी कक्षा शुरू की, उन्होंने एक बहुत बड़े जार को उठाया और उसमें 2 इंच व्यास की Rocks से भरना शुरू कर दिया. जार भर गया, तब Students से पुछा क्या जार भरा हुआ है. सभी Students सहमत हुए.

तब प्रोफसर साहब ने कंकड़ (Pebbles) का डिब्बा उठाया और जार में उड़ेल दिया. उन्होनें जार को हिलाकर रख दिया. जाहिर है Pebbles; Rocks के बीच खाली जगह में घुसने ही थे. जब जार भर गया, Students से पुछा क्या जार भरा हुआ है. सभी Students सहमत हुए.

प्रोफसर साहब ने रेत (Sand) का डिब्बा उठाया और जार में उड़ेल दिया. जाहिर है रेत से जार में सब कुछ फुल भर गया.

जार भर गया तब उन्होंने एक बार फिर Students से पुछा क्या जार भरा हुआ है. सभी Students ने सर्वाम्मति सहमति जवाब दिया “हाँ”.

“अब” प्रोफसर साहब ने कहा, “मुझे लगता है कि यह जार आपके जीवन का प्रतिनिधित्व करता है. सबसे महत्वपूर्ण चीजें Rocks हैं – आपका परिवार, आपके पैरेन्टस्, आपका partner, आपका स्वास्थ्य, आपके बच्चे – अगर बाकी सब चीजें खो जाती है और केवल ये बच जाती है, तब भी आपका जीवन फुल रहेगा.

Pebbles कुछ महत्व की दूसरी चीजें हैं – जैसे आपका job, आपका घर, आपकी कार आदि.

बाकी सब कुछ रेत है. छोटी चीजें (small stuff) हैं.“

“यदि आप जार में सबसे पहले रेत डालोगे” उनहोंने जारी रखा “तो उसमें Rocks, pebbles के लिये कोई जगह खाली नहीं रहेगी. बिल्कुल ऐसा ही आपके जीवन में चलता है.

अगर आप अपना सारा समय और ऊर्जा small stuff पर खर्च कर दोगे तो आपके पास महत्पूर्ण चीजों के लिए समय कभी नहीं होगा. अपनी खुशी के लिए अपनी अत्यंत महत्पूर्ण चीजों (Rocks) पर ध्यान दें. जिन्दगी के आधार ये ही हैं.

अपने बच्चों के साथ खेलें, अपने पैरेन्टस् की सेवा करें, अपने partner साथ नाचें-गायें बाहर घूमने जायें, अपने सवास्थ्य पर ध्यान दें. आप हमेशा उसके बाद job पर जाने, घर को साफ रखने, डिनर पार्टी देने तथा अन्य कार्यों का निस्तारण तय करें.

पहले अपनी Rocks का ख्याल रखें – जो वास्तव में महत्वपूर्ण चीजें हैं.

अपनी प्राथमिकताएं निर्धारित करें. बाकी तो बस रेत है.”

 

Motivational Story In Hindi #16 विद्या बड़ी या बुद्धि? |

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किसी ब्राह्मण के चार पुत्र थे। उनमें परस्पर गहरी मित्रता थी। चारों में से तीन शास्त्रों में पारंगत थे, लेकिन उनमें बुद्धि का अभाव था। चौथे ने शास्त्रों का अध्ययन तो नहीं किया था, लेकिन वह था बड़ा बुद्धिमान।

एक बार चारों भाइयों ने परदेश जाकर अपनी-अपनी विद्या के प्रभाव से धन अर्जित करने का विचार किया। चारों पूर्व के देश की ओर चल पड़े।

रास्ते में सबसे बड़े भाई ने कहा-‘हमारा चौथा भाई तो निरा अनपढ़ है। राजा सदा विद्वान व्यक्ति का ही सत्कार करते हैं। केवल बुद्धि से तो कुछ मिलता नहीं। विद्या के बल पर हम जो धन कमाएँगे, उसमें से इसे कुछ नहीं देंगे। अच्छा तो यही है कि यह घर वापस चला जाए।’

दूसरे भाई का विचार भी यही था। किंतु तीसरे भाई ने उनका विरोध किया। वह बोला-‘हम बचपन से एक साथ रहे हैं, इसलिए इसको अकेले छोड़ना उचित नहीं है। हम अपनी कमाई का थोड़ा-थोड़ा हिस्सा इसे भी दे दिया करेंगे।’ अतः चौथा भाई भी उनके साथ लगा रहा।

रास्ते में एक घना जंगल पड़ा। वहाँ एक जगह हड्डियों का पंजर था। उसे देखकर उन्होंने अपनी-अपनी विद्या की परीक्षा लेने का निश्चय किया। उनमें से एक ने हड्डियों को सही ढंग से एक स्थान पर एकत्रित कर दिया। वास्तव में ये हड्डियाँ एक मरे हुए शेर की थीं।

दूसरे ने बड़े कौशल से हड्डियों के पंजर पर मांस एवं खाल का अवरण चढ़ा दिया। उनमें उसमें रक्त का संचार भी कर दिया। तीसरा उसमें प्राण डालकर उसे जीवित करने ही वाला था कि चौथे भाई ने उसको रोकते हुए कहा, ‘तुमने अपनी विद्या से यदि इसे जीवित कर दिया तो यह हम सभी को जान से मार देगा।’

तीसरे भाई ने कहा, ‘तू तो मूर्ख है!’मैं अपनी विद्या का प्रयोग अवश्य करुँगा और उसका फल भी देखूँगा।’ चौथे भाई ने कहा, ‘तो फिर थोड़ी देर रुको। मैं इस पेड़ पर चढ़ जाऊँ, तब तुम अपनी विद्या का चमत्कार दिखाना।’ यह कहकर चौथा भाई पेड़ पर चढ़ गया।

तीसरे भाई ने अपनी विद्या के बल पर जैसे ही शेर में प्राणों का संचार किया, शेर तड़पकर उठा और उन पर टूट पड़ा। उसने पलक झपकते ही तीनों अभिमानी विद्वानों को मार डाला और गरजता हुआ चला गया। उसके दूर चले जाने पर चौथा भाई पेड़ से उतरकर रोता हुआ घर लौट आया। इसीलिए कहा गया है कि विद्या से बुद्धि श्रेष्ठ होती है।

 

Motivational Story In Hindi #17 राजकुमारी और सांपो की कहानी |

राजा देवशक्ति का एक ही पुत्र था। उसके पेट में एक सर्प रहता था। इस कारण राजपुत्र एकदम दुर्बल हो गया था। अनेक वैद्यों ने उसकी चिकित्सा की, फिर भी वह स्वस्थ नहीं हुआ। निराश होकर राजपुत्र एक दिन घर छोड़कर चुपके से निकल पड़ा। वह भटकता हुआ किसी दूसरे राज्य में आ पहुँचा। वह भिक्षा माँगकर पेट भर लेता और एक मंदिर में सो जाता।

उस राज्य के राजा का नाम बलि था। उसकी दो पुत्रियाँ थीं। दोनों युवती थीं। वे प्रतिदिन सुबह-सुबह अपने पिता को प्रणाम करतीं। प्रणाम करने के बाद उनमें से एक कहती, ‘महाराज की जय हो, जिससे हम सब सुखी रहें।’ दूसरी कहती, ‘महाराज, आपको आपके कर्मों का फल अवश्य मिले।’

राजा बलि दूसरी बेटी के कड़वी बातों को सुनकर क्रोध से भर जाता था। एक दिन उसने मंत्रियों को आदेश दिया, ‘कड़वे वचन बोलनेवाली मेरी इस पुत्री का किसी परदेसी से ब्याह कर दो, जिससे यह अपने कर्म का फल भुगते।’

मंत्रियों ने मंदिर में रहने वाले उसी भिखारी राजकुमार के साथ उस राजकुमारी का विवाह कर दिया। राजकुमारी अपने उस पति को प्राप्त करके तनिक भी दुखी नहीं हुई। वह प्रसन्नता के साथ पति की सेवा करने लगी। कुछ दिन बाद वह पति को साथ लेकर दूसरे राज्य में चली गई।

वहाँ उसने एक सरोवर के किनारे पर बसेरा बना लिया। एक दिन राजकुमारी अपने पति को घर की रखवाली के लिए छोड़कर भोजन का सामान लाने के लिए स्वयं नगर में चली गई। राजकुमार जमीन पर सिर टिकाकर सो गया। वह सो रहा था कि उसके पेट में रहने वाला सर्प उसके मुख से बाहर निकलकर हवा खाने लगा।

इसी बीच पास ही की बाँबी में रहनेवाला साँप भी बिल से बाहर निकल आया। उसने पेट में रहने वाले साँप को फटकारते हुए कहा, ‘तू बहुत दुष्ट है, जो इस सुंदर राजकुमार को इतने दिनों से पीड़ित कर रहा है।’

पेट में रहने वाले साँप ने कहा, ‘और तू कौन-सा बहुत भला है! अपनी तो देख, तूने अपनी बाँबी में सोने से भरे दो-दो कलश छिपा रखे हैं।’ बाँबीवाले सर्प ने कहा, ‘क्या कोई इस उपाय को नहीं जानता कि राजकुमारी को पुरानी राई की काँजी पिलाई जाए तो तू तुरंत मर जाएगा?’

पेट में रहनेवाले साँप ने भी उसका भेद खोल दिया, ‘तुम्हारी बाँबी में खौलता तेल या पानी डालकर तुम्हारा वध किया जा सकता है!’ राजकुमारी लौट आई थी। वह वहीं छिपकर दोनों साँपों की बातें सुन रही थी। उसने बताए हुए दोनों उपायों से उन दोनों साँपों का नाश कर दिया। पेटवाले साँप के मरते ही राजकुमार स्वस्थ हो गया। फिर बाँबी में गड़े धन को निकालकर वह अपने राज्य में चली आई और अपने स्वस्थ-सुंदर पति के साथ सुख से रहने लगी। सच ही कहा गया है कि एक-दूसरे की बातों को छिपाकर ही रखना चाहिए, नहीं तो दोनों का नाश हो जाता है।

 

Motivation Story In Hindi #18 ज़िंदगी में सफल होने के लिए बहुत जरूरी है छटपटाहट |

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महान दार्शनिक सुकरात से एक बार एक युवक मिला। उसने सफलता पाने का उपाय पूछा। सुकरात ने उसे अगले दिन आने के लिए कहा। अगले दिन युवक ने फिर से वही सवाल पूछा तो सुकरात ने उसे फिर से अगले दिन आने को कहा।

कई महीने बीत जाने के बाद भी लड़का रोज आता और सुकरात उसे अगले दिन आने को टाल देते। एक दिन लड़के ने कहा कि, ‘मैं रोज इतनी दूर से यहां आने से अच्छा मै आपके आंगन में ही बैठ जाता हूं। सुबह, दोपहर,शाम, रात, दिन में बार-बार मुझे देखकर आपका दिल जरूर पिघलेगा।’

सुकरात ने लड़के के तरफ ध्यान नही दिया परंतु वह मन ही मन खुश जरूर थे। रात में सुकरात ने लड़के से अगले दिन सुबह सफलता का रहस्य बताने का वादा किया। अगली सुबह सुकरात लड़के को लेकर नदी किनारे गए।

सुकरात ने लड़को को नदी किनारे लाकर कहा कि तुम नदी में डुबकी लगाओं फिर मै तुम्हें सफलता पाने का तरीका बताता हूं। लड़के ने जैसे ही डुबकी लगाया सुकरात ने उसका सिर पकडकर पानी में दबा दिया।

लड़का छटपटाने लगा। सुकरात ने उसे फिर से डुबकी लगाने के लिए कहा जैसे ही लड़का अंदर गया सुकरात ने फिर उसका सिर दबा दिया। एक बार सुकरात उसे निकलने नही दे रहा था। लड़का बहुत जोर से छटपटाने लगा।

सुकरात के छोड़ते ही लड़का बाहर निकला । सुकरात ने कहा तुम सफलता के लिए इसी तरह छटपटाओगे जिस तरह हवा के लिए छटपटा रहे थे, मानो उसके बिना मर जाओगे, तो सफलता हर हाल में तुम्हारे कदमों में होगी।

 

Motivation Story In Hindi #19 इंसानियत की कद्र करना इनसे सीखें |

 

एक बार एक नवाब की राजधानी में एक फकीर आया। फकीर की कीर्ति सुनकर पूरे नवाबी ठाठ के साथ भेंट के थाल लिए हुए वह फकीर के पास पहुंचा। तब फकीर कुछ लोगों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने नवाब को बैठने का निर्देश दिया। जब नवाब का नंबर आया तो फकीर ने नवाब की ओर बढ़ा दिया।

भेंट के हीरे-जवाहरातों को भरे थालों को फकीर ने छुआ तक नहीं, हां बदले में एक सूखी रोटी नवाब को दी, कहां इसे खा लो। रोटी सख्त थी, नवाब से चबायी नहीं गई। तब फकीर ने कहा जैसे आपकी दी हुई वस्तु मेरे काम की नहीं उसी तरह मेरी दी हुई वस्तु आपके काम की नहीं।

हमें वही लेना चाहिए जो हमारे काम का हो। अपने काम का श्रेय भी नहीं लेना चाहिए। नवाब फकीर की इन बातों को सुनकर काफी प्रभावित हुआ। नवाब जब जाने के लिए हुआ तो फकीर भी दरवाजे तक उसे छोड़ने आया। नवाब ने पूछा, मैं जब आया था तब आपने देखा तक नहीं था, अब छोड़ने आ रहे हैं?

फकीर बोला, बेटा जब तुम आए थे तब तुम्हारे साथ अहंकार था। अब तो चोला तुमने उतार दिया है तुम इंसान बन गए हो। हम इंसानियत का आदर करते हैं। नवाब नतमस्तक हो गया।

 

Motivational Story In Hindi #20 मंदिर का पुजारी

 

एक बार की बात है कि एक समृद्ध व्यापारी , जो सदैव अपने गुरू से परामर्श करके कुछ न कुछ सुकर्म किया करता था, गुरु से बोला-“गुरुदेव, धनार्जन हेतु मैं अपना गाँव पीछे ज़रूर छोड़ आया हूँ, पर हर समय मुझे लगता रहता है कि वहाँ पर एक ऐसा देवालय बनाया जाये जिसमें देवपूजन के साथ-साथ भोजन की भी व्यवस्था हो,अच्छे संस्कारों से लोगों को सुसंस्कृत किया जाये, अशरण को शरण मिले, वस्त्रहीन का तन ढके ,रोगियों को दवा और चिकित्सा मिले ,बच्चे अपने धर्म के वास्तविक स्वरूप से अवगत हो सकें |” सुनते ही गुरु प्रसन्नतापूर्वक बोले-“केवल गाँव में ही क्यों,तुम ऐसा ही एक मंदिर अपने इस नगर में भी बनवाओ |” व्यापारी को सुझाव पसंद आया और उसने ने दो मंदिर, एक अपने गाँव और दूसरा अपने नगर में,जहाँ वह अपने परिवार के साथ रहता था,बनवा दिए |दोनों देवालय शीघ्र ही लोगों की श्रद्धा के केंद्र बन गये |लेकिन कुछ दिन ही बीते थे कि व्यापारी ने देखा कि नगर के लोग गाँव के मन्दिर में आने लगे हैं ,जबकि वहाँ पहुँचने का रास्ता काफी कठिन है |उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि ऐसा क्यों हो रहा है ?

कुछ भारी मन से वह गुरु जी के पास गया और सारा वृत्तांत कह सुनाया |गुरु जी ने कुछ विचार किया और फिर उसे यह परामर्श दिया कि वह गाँव के मंदिर के पुजारी को नगर के मन्दिर में सेवा के लिए बुला ले | उसने ऐसा ही किया नगर के पुजारी को गाँव और गाँव के पुजारी को नगर में सेवा पर नियुक्त कर दिया |कुछ ही दिन बीते थे कि वह यह देखकर स्तब्ध रह गया कि अब गाँव के लोग नगर के मन्दिर की ओर रुख करने लगे हैं | अब तो उसे हैरानी के साथ-साथ परेशानी भी अनुभव होने लगी |बिना एक क्षण की देरी के वह गुरुजी के पास जा कर हाथ जोड़ कर,कहने लगा –“आपकी आज्ञानुसार मैंने दोनों पुजारियों का स्थानांतरण किया लेकिन समस्या तो पहले से भी गम्भीर हो चली है कि अब तो मेरे गाँव के परिचित और परिजन, कष्ट सहकर और किराया –भाड़ा खर्च करके, नगर के देवालय में आने लगे हैं |मुझसे यह नहीं देखा जाता |”

व्यापारी की बात सुनते ही गुरु जी सारी बात समझ गये और बोले- हैरानी और परेशानी छोड़ो |दरअसल,जो गाँव वाले पुजारी हैं ,उनका अच्छा स्वभाव ही है जो लोग उसी देवालय में जाना चाहते हैं,जहाँ वे होते हैं | उनका लोगों से निःस्वार्थ प्रेम, उनके दुःख से दुखी होना ,उनके सुख में प्रसन्न होना, उनसे मित्रता का व्यवहार करना ही लोगों को उनकी और आकर्षित करता है और लोग स्वतः ही उनकी और खिंचे चले आते हैं |”अब सारी बात व्यापारी की समझ में आ चुकी थी |

मित्रों हमें भी यह बात अच्छे से समझनी चाहिए कि हमारा व्यक्तित्व हमारे बाहरी रंग-रूप से नहीं हमारे व्यवहार से निर्धारित होता है, बिलकुल एक समान ज्ञान और वेश-भूषा वाले दो पुजारियों में लोग कष्ट सह कर भी उसी के पास गए जो अधिक संवेदनशील और व्यवहारी था। इसी तरह हम चाहे जिस कार्य क्षेत्र से जुड़े हों, हमारी सफलता में हमारे व्यवहार का बहुत बड़ा योगदान होता है। हम सभी को इस परम सत्य का बोध होना चाहिए कि इस धरती पर मात्र अपने लिए ही नहीं आये हैं, हमें अपने सुख-दुःख की चिंता के साथ-साथ दूसरों के दुख-सुख को ज़रूर बांटना चाहिए, उनसे मित्रतापूर्ण व्यवहार करना चाहिए ताकि हम जहाँ पर उपस्थित हों, वहाँ पर स्वत: ही एक अच्छा वातावरण बना रहे और सकारात्मकता की तरंगों से हमरा जीवन-सागर लहलहाता रहे|

 

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