25 motivational kavita in hindi – Motivation poems in hindi

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motivational kavita in hindi #1 उधार / अज्ञेय – अज्ञेय

motivational kavita in hindi

सवेरे उठा तो धूप खिल कर छा गई थी
और एक चिड़िया अभी-अभी गा गई थी।

मैनें धूप से कहा: मुझे थोड़ी गरमाई दोगी उधार
चिड़िया से कहा: थोड़ी मिठास उधार दोगी?
मैनें घास की पत्ती से पूछा: तनिक हरियाली दोगी—
तिनके की नोक-भर?
शंखपुष्पी से पूछा: उजास दोगी—
किरण की ओक-भर?
मैने हवा से मांगा: थोड़ा खुलापन—बस एक प्रश्वास,
लहर से: एक रोम की सिहरन-भर उल्लास।
मैने आकाश से मांगी
आँख की झपकी-भर असीमता—उधार।

सब से उधार मांगा, सब ने दिया ।
यों मैं जिया और जीता हूँ
क्योंकि यही सब तो है जीवन—
गरमाई, मिठास, हरियाली, उजाला,
गन्धवाही मुक्त खुलापन,
लोच, उल्लास, लहरिल प्रवाह,
और बोध भव्य निर्व्यास निस्सीम का:
ये सब उधार पाये हुए द्रव्य।

रात के अकेले अन्धकार में
सामने से जागा जिस में
एक अनदेखे अरूप ने पुकार कर
मुझ से पूछा था: “क्यों जी,
तुम्हारे इस जीवन के
इतने विविध अनुभव हैं
इतने तुम धनी हो,
तो मुझे थोड़ा प्यार दोगे—उधार—जिसे मैं
सौ-गुने सूद के साथ लौटाऊँगा—
और वह भी सौ-सौ बार गिन के—
जब-जब मैं आऊँगा?”
मैने कहा: प्यार? उधार?
स्वर अचकचाया था, क्योंकि मेरे
अनुभव से परे था ऐसा व्यवहार ।
उस अनदेखे अरूप ने कहा: “हाँ,
क्योंकि ये ही सब चीज़ें तो प्यार हैं—
यह अकेलापन, यह अकुलाहट,
यह असमंजस, अचकचाहट,
आर्त अनुभव,
यह खोज, यह द्वैत, यह असहाय
विरह व्यथा,
यह अन्धकार में जाग कर सहसा पहचानना
कि जो मेरा है वही ममेतर है
यह सब तुम्हारे पास है
तो थोड़ा मुझे दे दो—उधार—इस एक बार—
मुझे जो चरम आवश्यकता है।

उस ने यह कहा,
पर रात के घुप अंधेरे में
मैं सहमा हुआ चुप रहा; अभी तक मौन हूँ:
अनदेखे अरूप को
उधार देते मैं डरता हूँ:
क्या जाने
यह याचक कौन है?

उधार / अज्ञेय – अज्ञेय

motivational kavita in hindi #2 नया कवि : आत्म-स्वीकार / अज्ञेय – अज्ञेय

motivational kavita in hindi
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किसी का सत्य था,
मैंने संदर्भ में जोड़ दिया ।
कोई मधुकोष काट लाया था,
मैंने निचोड़ लिया ।

किसी की उक्ति में गरिमा थी
मैंने उसे थोड़ा-सा संवार दिया,
किसी की संवेदना में आग का-सा ताप था
मैंने दूर हटते-हटते उसे धिक्कार दिया ।

कोई हुनरमन्द था:
मैंने देखा और कहा, ‘यों!’
थका भारवाही पाया –
घुड़का या कोंच दिया, ‘क्यों!’

किसी की पौध थी,
मैंने सींची और बढ़ने पर अपना ली।
किसी की लगाई लता थी,
मैंने दो बल्ली गाड़ उसी पर छवा ली ।

किसी की कली थी
मैंने अनदेखे में बीन ली,
किसी की बात थी
मैंने मुँह से छीन ली ।

यों मैं कवि हूँ, आधुनिक हूँ, नया हूँ:
काव्य-तत्त्व की खोज में कहाँ नहीं गया हूँ?
चाहता हूँ आप मुझे
एक-एक शब्द पर सराहते हुए पढ़ें ।
पर प्रतिमा–अरे, वह तो
जैसी आप को रुचे आप स्वयं गढ़ें ।

नया कवि : आत्म-स्वीकार / अज्ञेय – अज्ञेय

motivational kavita in hindi #3 सत्य तो बहुत मिले / अज्ञेय – अज्ञेय

motivational kavita in hindi
motivational kavita in hindi

खोज़ में जब निकल ही आया
सत्य तो बहुत मिले ।

कुछ नये कुछ पुराने मिले
कुछ अपने कुछ बिराने मिले
कुछ दिखावे कुछ बहाने मिले
कुछ अकड़ू कुछ मुँह-चुराने मिले
कुछ घुटे-मँजे सफेदपोश मिले
कुछ ईमानदार ख़ानाबदोश मिले ।

कुछ ने लुभाया
कुछ ने डराया
कुछ ने परचाया-
कुछ ने भरमाया-
सत्य तो बहुत मिले
खोज़ में जब निकल ही आया ।

कुछ पड़े मिले
कुछ खड़े मिले
कुछ झड़े मिले
कुछ सड़े मिले
कुछ निखरे कुछ बिखरे
कुछ धुँधले कुछ सुथरे
सब सत्य रहे
कहे, अनकहे ।

खोज़ में जब निकल ही आया
सत्य तो बहुत मिले
पर तुम
नभ के तुम कि गुहा-गह्वर के तुम
मोम के तुम, पत्थर के तुम
तुम किसी देवता से नहीं निकले:
तुम मेरे साथ मेरे ही आँसू में गले
मेरे ही रक्त पर पले
अनुभव के दाह पर क्षण-क्षण उकसती
मेरी अशमित चिता पर
तुम मेरे ही साथ जले ।

तुम-
तुम्हें तो
भस्म हो
मैंने फिर अपनी भभूत में पाया
अंग रमाया
तभी तो पाया ।

खोज़ में जब निकल ही आया,
सत्य तो बहुत मिले-
एक ही पाया ।

काशी (रेल में), 15 फरवरी, 1954

सत्य तो बहुत मिले / अज्ञेय – अज्ञेय

motivational kavita in hindi #4 अपना काम / अजित कुमार – अजित कुमार

motivational kavita in hindi

चीख़-चीख़ कर उन्होंने
दुनिया-भर की नींद हराम नहीं कर दी
नाक चढ़ा, भौं उठा
सबको नीचे नहीं गिराया
पूरी सुबह के दौरान
एक बार भी मुँह नहीं फुलाया
कोप-भवन में जाने की ज़रूरत नहीं समझी…

सचमुच सुखद था यह देखना कि
औरतें कितनी मगन हो
अपने–अपने काम में लगी हैं…

गिनती भूल चुके बूढ़े को
वह चार के बाद पाँच का गुटका
रखना सिखा रही है
जबकि वह तीन आठ दो… कुछ भी
लगाकर मगन है…

दूसरी है व्यस्त लकवामारे की कमर
सीधी करने की कोशिश में;
साथ-साथ समझा भी रही है –
पाँव उठेंगे तभी तो चलकर जौनपुर
पहुँच सकोगे।
ज़रा बताओ तो सही- घर के लिए
गाड़ी कहाँ से पकड़ोगे?
और नाम सुनके ‘घर’ का
वह तनिक सिहर-सा उठा है
भले ही उसके पैरों में कोई जुंबिश नज़र नहीं आई अभी तक।

तीसरी ने थमाया है
मरीज़ की हथेली में
स्प्रिंग का शिकंजा-
ज़रूर ही चीजों पर उसकी पकड़
मज़बूत करने को:

“कसो, ढीला छोडो, धीरे-धीरे! बार–बार”…
सबक सीधा और साफ़ था ।

ऐसा करते उसे देख
जब मैंने भी चाहा–
टोकरी में धरी कनियों को
अपनी मुट्ठी में भरूँ…
वे फिसलती चली गईं
जैसे कि उंगलियों में से रेत।

मुझे हताश देख वह बोली-
“रिलैक्स! रखो धीरज…
वक़्त के साथ ही ठीक होगा,
जो भी होगा-
जैसे कि उसी के साथ इतना कुछ
बिगड़ता चला जाता है…”

उसकी पलकों में सिमटे पूरे जीवन को
तो मैं नहीं बाँच पाया-
पर सरल हुआ देख सकना-
वह और उसकी टोली-
कितने मनोयोग से उन्हें नवजीवन देने में
लगी है
जिनमें में किसी को भी उन्होंने
अपनी कोख से नहीं जन्मा।

‘कुछ दवा, कुछ दुआ’-यह तो
सबने पहले भी सुना था-
शरीरोपचार के मरीज़ों ने
उपचार के साथ
दुलार और पुचकार का भी मतलब
अब जाना…

बहुत दिनों बाद…
बल्कि उस क्षण तो यह लगा कि-
जीवन में पहली बार-
एक साथ, एक जगह
इतना अधिक सौंदर्य
मेरी नज़र में आ समाया…

जो मुमकिन है आगे कभी बार-बार
मन में भी कौंधे ।

अपना काम / अजित कुमार – अजित कुमार

motivational kavita in hindi #5 हरी हरी दूब पर / अटल बिहारी वाजपेयी

motivational kavita in hindi

हरी हरी दूब पर
ओस की बूंदे
अभी थी,
अभी नहीं हैं|
ऐसी खुशियाँ
जो हमेशा हमारा साथ दें
कभी नहीं थी,
कहीं नहीं हैं|

क्काँयर की कोख से
फूटा बाल सूर्य,
जब पूरब की गोद में
पाँव फैलाने लगा,
तो मेरी बगीची का
पत्ता-पत्ता जगमगाने लगा,
मैं उगते सूर्य को नमस्कार करूँ
या उसके ताप से भाप बनी,
ओस की बुँदों को ढूंढूँ?

सूर्य एक सत्य है
जिसे झुठलाया नहीं जा सकता
मगर ओस भी तो एक सच्चाई है
यह बात अलग है कि ओस क्षणिक है
क्यों न मैं क्षण क्षण को जिऊँ?
कण-कण मेँ बिखरे सौन्दर्य को पिऊँ?

सूर्य तो फिर भी उगेगा,
धूप तो फिर भी खिलेगी,
लेकिन मेरी बगीची की
हरी-हरी दूब पर,
ओस की बूंद
हर मौसम में नहीं मिलेगी|

हरी हरी दूब पर / अटल बिहारी वाजपेयी – अटल बिहारी वाजपेयी

motivational kavita in hindi #6 ऊँचाई / अटल बिहारी वाजपेयी – अटल बिहारी वाजपेयी

motivational kavita in hindi

ऊँचे पहाड़ पर,
पेड़ नहीं लगते,
पौधे नहीं उगते,
न घास ही जमती है।

जमती है सिर्फ बर्फ,
जो, कफ़न की तरह सफ़ेद और,
मौत की तरह ठंडी होती है।
खेलती, खिलखिलाती नदी,
जिसका रूप धारण कर,
अपने भाग्य पर बूंद-बूंद रोती है।

ऐसी ऊँचाई,
जिसका परस
पानी को पत्थर कर दे,
ऐसी ऊँचाई
जिसका दरस हीन भाव भर दे,
अभिनंदन की अधिकारी है,
आरोहियों के लिये आमंत्रण है,
उस पर झंडे गाड़े जा सकते हैं,

किन्तु कोई गौरैया,
वहाँ नीड़ नहीं बना सकती,
ना कोई थका-मांदा बटोही,
उसकी छाँव में पलभर पलक ही झपका सकता है।

सच्चाई यह है कि
केवल ऊँचाई ही काफ़ी नहीं होती,
सबसे अलग-थलग,
परिवेश से पृथक,
अपनों से कटा-बँटा,
शून्य में अकेला खड़ा होना,
पहाड़ की महानता नहीं,
मजबूरी है।
ऊँचाई और गहराई में
आकाश-पाताल की दूरी है।

जो जितना ऊँचा,
उतना एकाकी होता है,
हर भार को स्वयं ढोता है,
चेहरे पर मुस्कानें चिपका,
मन ही मन रोता है।

ज़रूरी यह है कि
ऊँचाई के साथ विस्तार भी हो,
जिससे मनुष्य,
ठूँठ सा खड़ा न रहे,
औरों से घुले-मिले,
किसी को साथ ले,
किसी के संग चले।

भीड़ में खो जाना,
यादों में डूब जाना,
स्वयं को भूल जाना,
अस्तित्व को अर्थ,
जीवन को सुगंध देता है।

धरती को बौनों की नहीं,
ऊँचे कद के इंसानों की जरूरत है।
इतने ऊँचे कि आसमान छू लें,
नये नक्षत्रों में प्रतिभा की बीज बो लें,

किन्तु इतने ऊँचे भी नहीं,
कि पाँव तले दूब ही न जमे,
कोई काँटा न चुभे,
कोई कली न खिले।

न वसंत हो, न पतझड़,
हो सिर्फ ऊँचाई का अंधड़,
मात्र अकेलेपन का सन्नाटा।

मेरे प्रभु!
मुझे इतनी ऊँचाई कभी मत देना,
ग़ैरों को गले न लगा सकूँ,
इतनी रुखाई कभी मत देना।

ऊँचाई / अटल बिहारी वाजपेयी – अटल बिहारी वाजपेयी

motivational kavita in hindi #7आज ही होगा / बालकृष्ण राव – बालकृष्ण राव

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मनाना चाहता है आज ही?
-तो मान ले
त्यौहार का दिन आज ही होगा!

उमंगें यूँ अकारण ही नहीं उठतीं,
न अनदेखे इशारे पर कभी यूँ नाचता मन;
खुले से लग रहे हैं द्वार मंदिर के
बढ़ा पग-
मूर्ति के शृंगार का दिन आज ही होगा!

न जाने आज क्यों दिल चाहता है-
स्वर मिला कर
अनसुने स्वर में किसी की कर उठे जयकार!
न जाने क्यूँ
बिना पाए हुए भी दान याचक मन,
विकल है व्यक्त करने के लिए आभार!

कोई तो, कहीं तो
प्रेरणा का स्रोत होगा ही-
उमंगें यूँ अकारण ही नहीं उठतीं,
नदी में बाढ़ आई है कहीं पानी गिरा होगा!

अचानक शिथिल-बंधन हो रहा है आज
मोक्षासन बंदी मन –
किसी की तो कहीं कोई भगीरथ-साधना पूरी हुई होगी,
किसी भागीरथी के भूमि पर अवतार का दिन आज ही होगा!

मनाना चाहता है आज ही?
-तो मान ले
त्यौहार का दिन आज ही होगा!

आज ही होगा / बालकृष्ण राव – बालकृष्ण राव

motivational kavita in hindi #8 नदी को रास्‍ता किसने दिखाया – बालकृष्ण राव

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नदी को रास्‍ता किसने दिखाया?
सिखाया था उसे किसने
कि अपनी भावना के वेग को
उन्‍मुक्‍त बहने दे?
कि वह अपने लिए
खुद खोज लेगी
सिन्धु की गम्भीरता
स्‍वच्‍छन्द बहकर?

इसे हम पूछते आए युगों से,
और सुनते भी युगों से आ रहे उत्‍तर नदी का।
मुझे कोई कभी आया नहीं था राह दिखलाने,
बनाया मार्ग मैने आप ही अपना।
ढकेला था शिलाओं को,
गिरी निर्भिकता से मैं कई ऊँचे प्रपातों से,
वनों में, कंदराओं में,
भटकती, भूलती मैं
फूलती उत्‍साह से प्रत्‍येक बाधा-विघ्‍न को
ठोकर लगाकर, ठेलकर,
बढती गई आगे निरन्तर
एक तट को दूसरे से दूरतर करती।

बढ़ी सम्पन्‍नता के
और अपने दूर-दूर तक फैले साम्राज्‍य के अनुरूप
गति को मन्द कर…
पहुँची जहाँ सागर खडा था
फेन की माला लिए
मेरी प्रतीक्षा में।
यही इतिवृत्‍त मेरा …
मार्ग मैने आप ही बनाया।

मगर भूमि का है दावा,
कि उसने ही बनाया था नदी का मार्ग ,
उसने ही
चलाया था नदी को फिर
जहाँ, जैसे, जिधर चाहा,
शिलाएँ सामने कर दी
जहाँ वह चाहती थी
रास्‍ता बदले नदी,
जरा बाएँ मुड़े
या दाहिने होकर निकल जाए,
स्‍वयं नीची हुई
गति में नदी के
वेग लाने के लिए
बनी समतल
जहाँ चाहा कि उसकी चाल धीमी हो।
बनाती राह,
गति को तीव्र अथवा मन्द करती
जंगलों में और नगरों में नचाती
ले गई भोली नदी को भूमि सागर तक

किधर है सत्‍य?
मन के वेग ने
परिवेश को अपनी सबलता से झुकाकर
रास्‍ता अपना निकाला था,
कि मन के वेग को बहना पडा था बेबस
जिधर परिवेश ने झुककर
स्‍वयं ही राह दे दी थी?
किधर है सत्‍य?

क्‍या आप इसका जबाब देंगे?

नदी को रास्‍ता किसने दिखाया ? / बालकृष्ण राव – बालकृष्ण राव

motivational kavita in hindi #9 ख़ुदा हम को ऐसी ख़ुदाई न दे / बशीर बद्र – बशीर बद्र

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ख़ुदा हम को ऐसी ख़ुदाई न दे
कि अपने सिवा कुछ दिखाई न दे

ख़तावार समझेगी दुनिया तुझे
अब इतनी भी ज़्यादा सफ़ाई न दे

हँसो आज इतना कि इस शोर में
सदा सिसकियों की सुनाई न दे

अभी तो बदन में लहू है बहुत
कलम छीन ले रोशनाई न दे

मुझे अपनी चादर से यूँ ढाँप लो
ज़मीं आसमाँ कुछ दिखाई न दे

ग़ुलामी को बरकत समझने लगें
असीरों को ऐसी रिहाई न दे

मुझे ऐसी जन्नत नहीं चाहिए
जहाँ से मदीना दिखाई न दे

मैं अश्कों से नाम-ए-मुहम्मद लिखूँ
क़लम छीन ले रोशनाई न दे

ख़ुदा ऐसे इरफ़ान का नाम है
रहे सामने और दिखाई न दे

ख़ुदा हम को ऐसी ख़ुदाई न दे / बशीर बद्र – बशीर बद्र

motivational kavita in hindi #10 मेरे साथ तुम भी दुआ करो / बशीर बद्र – बशीर बद्र

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मेरे साथ तुम भी दुआ करो यूँ किसी के हक़ में बुरा न हो
कहीं और हो न ये हादसा कोई रास्ते में जुदा न हो

मेरे घर से रात की सेज तक वो इक आँसू की लकीर है
ज़रा बढ़ के चाँद से पूछना वो इसी तरफ़ से गया न हो

सर-ए-शाम ठहरी हुई ज़मीं, आसमाँ है झुका हुआ
इसी मोड़ पर मेरे वास्ते वो चराग़ ले कर खड़ा न हो

वो फ़रिश्ते आप ही ढूँढिये कहानियों की किताब में
जो बुरा कहें न बुरा सुने कोई शख़्स उन से ख़फ़ा न हो

वो विसाल हो के फ़िराक़ हो तेरी आग महकेगी एक दिन
वो गुलाब बन के खिलेगा क्या जो चराग़ बन के जला न हो

मुझे यूँ लगा कि ख़ामोश ख़ुश्बू के होँठ तितली ने छू लिये
इन्ही ज़र्द पत्तों की ओट में कोई फूल सोया हुआ न हो

इसी एहतियात में मैं रहा, इसी एहतियात में वो रहा
वो कहाँ कहाँ मेरे साथ है किसी और को ये पता न हो

मेरे साथ तुम भी दुआ करो / बशीर बद्र – बशीर बद्र

motivational kavita in hindi #11 आत्म-निर्वासन / धनंजय सिंह – धनंजय सिंह

motivational poem in hindi

कहाँ से कहाँ तक चलकर
कहीं भी न पहुँचने का नाम
मेरे लिए यात्रा है
और जैसे
नींद में चलते रहने का नाम जीवन ।
रास्ते की भीड़
जुलूस और उत्सव की चहल-पहल
पिता के रौब से सहमे
बच्चे की तरह
मुझे डिस्टर्ब नहीं करते
बस-ट्रेन
स्कूल-दफ़्तर और घर से जुडी
कुछ छोटी पद-यात्राओं का
एक बहुत बड़ा नाम है ‘दिन’ ।
तुम्हारी याद भी
सो जाती है थक कर
चेतना के द्वार पर पहुँच कर
दस्तक देने से पहले ही ।
सुबह-शाम
दूध माँगने और
हाज़िरी लेने वाली बच्ची
बड़ी हो कर
कुछ कवियों-पत्रकारों और
आलोचकों में बदल गई है ।
पुस्तकों-पत्रिकाओं के ढेर से निकल कर
‘गुमशुदा की तलाश’ के विज्ञापन में
सबसे पहले छपा नाम मेरा है मेरा ……. ।

आत्म-निर्वासन / धनंजय सिंह – धनंजय सिंह

motivational kavita in hindi #12 मौन की चादर / धनंजय सिंह – धनंजय सिंह

motivational poem in hindi

आज
पहली बार मैंने,
मौन की चादर बुनी है
काट दो
यदि काट पाओ तार कोई

एक युग से
ज़िन्दगी के घोल को मैं
एक मीठा विष समझ कर पी रहा हूँ
आदमी घबरा न जाए
मुश्क़िलों से
इसलिए मुस्कान बनकर जी रहा हूँ

और यों
अविराम गति से बढ़ रहा हूँ
रुक न जाए
राह में मन हार कोई

बहुत दिन
पहले कभी जब रोशनी थी
चाँदनी ने था
मुझे तब भी बुलाया
नाम चाहे
जो इसे तुम आज दो पर
कोश आँसुओं का
नहीं मैंने लुटाया

तुम किनारे पर खड़े,
आवाज़ मत दो
खींचती मुझको
इधर मँझधार कोई

एक झिलमिल-सा
कवच जो देखते हो
आवरण है यह
उतारूँगा इसे भी
जो अंधेरा
दीपकों की आँख में है
एक दिन मैं ही
उजारूँगा उसे भी

यों प्रकाशित
दिव्यता होगी हृदय की
है न जिसके द्वार
वन्दनवार कोई

नित्य ही होता
हृदयगत भाव का संयत प्रकाशन
किन्तु मैं
अनुवाद कर पाता नहीं हूँ
जो स्वयं ही
हाथ से छूटे छिटककर
उन क्षणों को
याद कर पाता नहीं हूँ

यों लिए
वीणा सदा फिरता रहा हूँ
बाँध ले
शायद तुम्हें झनकार कोई

मौन की चादर / धनंजय सिंह – धनंजय सिंह

motivational kavita in hindi #13 नहीं झुकता, झुकाता भी नहीं हूँ / धनंजय सिंह – धनंजय सिंह

motivational poem in hindi

नहीं झुकता, झुकाता भी नहीं हूँ
जो सच है वो, छिपाता भी नहीं हूँ

जहाँ सादर नहीं जाता बुलाया
मैं उस दरबार जाता भी नहीं हूँ

जो नगमे जाग उठते हैं हृदय में
कभी उनको सुलाता भी नहीं हूँ

नहीं आता मुझे ग़म को छिपाना
पर उसके गीत गाता भी नहीं हूँ

किसी ने यदि किया उपकार कोई
उसे मैं भूल पाता भी नहीं हूँ

किसी के यदि कभी मैं काम आऊँ
कभी उसको भुलाता भी नहीं हूँ

जो अपनेपन को दुर्बलता समझ ले
मैं उसके पास जाता भी नहीं हूँ

जो ख़ुद को स्वयंभू अवतार माने
उसे अपना बनाता भी नहीं हूँ

नहीं झुकता, झुकाता भी नहीं हूँ / धनंजय सिंह – धनंजय सिंह

motivational poem in hindi #14 सच न बोलना / नागार्जुन – नागार्जुन

motivational poem in hindi

मलाबार के खेतिहरों को अन्न चाहिए खाने को,
डंडपाणि को लठ्ठ चाहिए बिगड़ी बात बनाने को!
जंगल में जाकर देखा, नहीं एक भी बांस दिखा!
सभी कट गए सुना, देश को पुलिस रही सबक सिखा!

जन-गण-मन अधिनायक जय हो, प्रजा विचित्र तुम्हारी है
भूख-भूख चिल्लाने वाली अशुभ अमंगलकारी है!
बंद सेल, बेगूसराय में नौजवान दो भले मरे
जगह नहीं है जेलों में, यमराज तुम्हारी मदद करे।

ख्याल करो मत जनसाधारण की रोज़ी का, रोटी का,
फाड़-फाड़ कर गला, न कब से मना कर रहा अमरीका!
बापू की प्रतिमा के आगे शंख और घड़ियाल बजे!
भुखमरों के कंकालों पर रंग-बिरंगी साज़ सजे!

ज़मींदार है, साहुकार है, बनिया है, व्योपारी है,
अंदर-अंदर विकट कसाई, बाहर खद्दरधारी है!
सब घुस आए भरा पड़ा है, भारतमाता का मंदिर
एक बार जो फिसले अगुआ, फिसल रहे हैं फिर-फिर-फिर!

छुट्टा घूमें डाकू गुंडे, छुट्टा घूमें हत्यारे,
देखो, हंटर भांज रहे हैं जस के तस ज़ालिम सारे!
जो कोई इनके खिलाफ़ अंगुली उठाएगा बोलेगा,
काल कोठरी में ही जाकर फिर वह सत्तू घोलेगा!

माताओं पर, बहिनों पर, घोड़े दौड़ाए जाते हैं!
बच्चे, बूढ़े-बाप तक न छूटते, सताए जाते हैं!
मार-पीट है, लूट-पाट है, तहस-नहस बरबादी है,
ज़ोर-जुलम है, जेल-सेल है। वाह खूब आज़ादी है!

रोज़ी-रोटी, हक की बातें जो भी मुंह पर लाएगा,
कोई भी हो, निश्चय ही वह कम्युनिस्ट कहलाएगा!
नेहरू चाहे जिन्ना, उसको माफ़ करेंगे कभी नहीं,
जेलों में ही जगह मिलेगी, जाएगा वह जहां कहीं!

सपने में भी सच न बोलना, वर्ना पकड़े जाओगे,
भैया, लखनऊ-दिल्ली पहुंचो, मेवा-मिसरी पाओगे!
माल मिलेगा रेत सको यदि गला मजूर-किसानों का,
हम मर-भुक्खों से क्या होगा, चरण गहो श्रीमानों का!

सच न बोलना / नागार्जुन – नागार्जुन

motivational poem in hindi #15 सत्य / नागार्जुन – नागार्जुन

motivational poem in hindi

सत्य को लकवा मार गया है
वह लंबे काठ की तरह
पड़ा रहता है सारा दिन, सारी रात
वह फटी–फटी आँखों से
टुकुर–टुकुर ताकता रहता है सारा दिन, सारी रात
कोई भी सामने से आए–जाए
सत्य की सूनी निगाहों में जरा भी फर्क नहीं पड़ता
पथराई नज़रों से वह यों ही देखता रहेगा
सारा–सारा दिन, सारी–सारी रात

सत्य को लकवा मार गया है
गले से ऊपरवाली मशीनरी पूरी तरह बेकार हो गई है
सोचना बंद
समझना बंद
याद करना बंद
याद रखना बंद
दिमाग की रगों में ज़रा भी हरकत नहीं होती
सत्य को लकवा मार गया है
कौर अंदर डालकर जबड़ों को झटका देना पड़ता है
तब जाकर खाना गले के अंदर उतरता है
ऊपरवाली मशीनरी पूरी तरह बेकार हो गई है
सत्य को लकवा मार गया है

वह लंबे काठ की तरह पड़ा रहता है
सारा–सारा दिन, सारी–सारी रात
वह आपका हाथ थामे रहेगा देर तक
वह आपकी ओर देखता रहेगा देर तक
वह आपकी बातें सुनता रहेगा देर तक
लेकिन लगेगा नहीं कि उसने आपको पहचान लिया है

जी नहीं, सत्य आपको बिल्कुल नहीं पहचानेगा
पहचान की उसकी क्षमता हमेशा के लिए लुप्त हो चुकी है
जी हाँ, सत्य को लकवा मार गया है
उसे इमर्जेंसी का शाक लगा है
लगता है, अब वह किसी काम का न रहा
जी हाँ, सत्य अब पड़ा रहेगा
लोथ की तरह, स्पंदनशून्य मांसल देह की तरह!

सत्य / नागार्जुन – नागार्जुन

motivational poem in hindi #16 जी हाँ , लिख रहा हूँ / नागार्जुन – नागार्जुन

motivational poem in hindi on success

जी हाँ, लिख रहा हूँ …
बहुत कुछ! बहोत बहोत!!
ढेर ढेर सा लिख रहा हूँ!
मगर , आप उसे पढ़ नहीं
पाओगे … देख नहीं सकोगे
उसे आप!

दरअसल बात यह है कि
इन दिनों अपनी लिखावट
आप भी मैं कहॉ पढ़ पाता हूँ
नियोन-राड पर उभरती पंक्तियों की
तरह वो अगले ही क्षण
गुम हो जाती हैं
चेतना के ‘की-बोर्ड’ पर वो बस
दो-चार सेकेंड तक ही
टिकती है ….
कभी-कभार ही अपनी इस
लिखावट को कागज़ पर
नोट कर पता हूँ
स्पन्दनशील संवेदन की
क्षण-भंगुर लड़ियाँ
सहेजकर उन्हें और तक
पहुँचाना!
बाप रे , कितना मुश्किल है!
आप तो ‘फोर-फिगर’ मासिक –
वेतन वाले उच्च-अधिकारी ठहरे,
मन-ही-मन तो हसोंगे ही,
की भला यह भी कोई
काम हुआ , की अनाप-
शनाप ख़यालों की
महीन लफ्फाजी ही
करता चले कोई –
यह भी कोई काम हुआ भला!

जी हाँ , लिख रहा हूँ / नागार्जुन – नागार्जुन

motivational poem in hindi #17 कल फिर सुबह नई होगी / रामदरश मिश्र – रामदरश मिश्र

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दिन को ही हो गई रात-सी, लगता कालजयी होगी
कविता बोली- “मत उदास हो, कल फिर सुबह नई होगी।”

गली-गली कूड़ा बटोरता, देखो बचपन बेचारा
टूटे हुए ख्वाब लादे, फिरता यौवन का बनजारा
कहीं बुढ़ापे की तनहाई, करती दई-दई होगी!

जलती हुई हवाएँ मार रही हैं चाँटे पर चाँटा
लेट गया है खेतों ऊपर यह जलता-सा सन्नाटा
फिर भी लगता है कहीं पर श्याम घटा उनई होगी!

सोया है दुर्गम भविष्य चट्टान सरीखा दूर तलक
जाना है उस पार मगर आँखें रुक जाती हैं थक-थक
खोजो यारो, सूने में भी कोई राह गई होगी!

टूटे तारों से हिलते हैं यहाँ-वहाँ रिश्ते-नाते
शब्द ठहर जाते सहसा इक-दूजे में आते-जाते
फिर भी जाने क्यों लगता- कल धरती छंदमयी होगी!

कल फिर सुबह नई होगी / रामदरश मिश्र – रामदरश मिश्र

motivational poem in hindi for student #18 आभारी हूँ बहुत दोस्तों / रामदरश मिश्र – रामदरश मिश्र

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आभारी हूँ बहुत दोस्तो, मुझे तुम्हारा प्यार मिला
सुख में, दुख में, हार-जीत में एक नहीं सौ बार मिला!

सावन गरजा, भादों बरसा, घिर-घिर आई अँधियारी
कीचड़-कांदों से लथपथ हो, बोझ हुई घड़ियाँ सारी
तुम आए तो लगा कि कोई कातिक का त्योहार मिला!

इतना लम्बा सफ़र रहा, थे मोड़ भयानक राहों में
ठोकर लगी, लड़खड़ाया, फिर गिरा तुम्हारी बाँहों में
तुम थे तो मेरे पाँवों को छिन-छिनकर आधार मिला!

आया नहीं फ़रिश्ता कोई, मुझको कभी दुआ देने
मैंने भी कब चाहा, दूँ इनको अपनी नौका खेने
बहे हवा-से तुम, साँसों को सुन्दर बंदनवार मिला!

हर पल लगता रहा कि तुम हो पास कहीं दाएँ-बाएँ
तुम हो साथ सदा तो आवारा सुख-दुख आए-जाए
मृत्यु-गंध से भरे समय में जीवन का स्वीकार मिला!

आभारी हूँ बहुत दोस्तों / रामदरश मिश्र – रामदरश मिश्र

motivational poem in hindi for student #19 जो कुटिलता से जियेंगे / बालकवि बैरागी – बालकवि बैरागी

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छीनकर छ्लछंद से
हक पराया मारकर
अम्रित पिया तो क्या पिया?
हो गये बेशक अमर
जी रहे अम्रित उमर
लेकिन अभय अनमोल
सारा छिन गया ।
देवता तो हो गये पर
क्या हुआ देवत्व का?
आयुभर चिन्ता करो अब
पद प्रतिष्टा,राजसत्ता
और अपने लोक की!
छिन नहीं जाए सुधा सिंहासनों की
एक हि भय
रात दिन आठों प्रहर
प्राण में बैठा रहे–
इस भयातुर अमर
जीवन का करो क्या?

जो किसि षड्यंत्र मे
छलछंद में शामिल नहीं था
पी गया सारा हलाहल
हो गया कैसे अमर?
पा गया साम्राज्य
’शिव’- संग्या सहित
शिवलोक का —
कर रहा कल्याण सारे विश्व का!

सुर – असुर सब पूजते
उसको निरंतर
साध्य सबका बन गया
कर्म मे कोई कलुष
जिसके नहीं है
शीश पर नीलाभ नभ
खुद छत्र बनकर तन गया!

जो कुटिलता से जियेंगे
वे सदा विचलित रहेंगे
त्राण-त्राता के लिये
मारे फिरेंगे!

हक पराया मारकर
छलछंद से छीना हुआ
अम्रित अगर मिल भी गया तो
आप उसका पान करके
उम्र भर फिर क्या करेंगे?

जो कुटिलता से जियेंगे / बालकवि बैरागी – बालकवि बैरागी

motivational poem in hindi for student #20 सारा देश हमारा / बालकवि बैरागी – बालकवि बैरागी

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केरल से कारगिल घाटी तक
गोहाटी से चौपाटी तक
सारा देश हमारा
जीना हो तो मरना सीखो
गूंज उठे यह नारा
सारा देश हमारा
केरल से कारगिल घाटी तक…

लगता है ताजे कोल्हू पर जमी हुई है काई
लगता है फिर भटक गई है भारत की तरुणाई
कोई चीरो ओ रणधीरो!
ओ जननी के भाग्य लकीरों!
बलिदानों का पुण्य मुहूरत आता नहीं दुबारा
जीना हो तो मरना सीखो गूंज उठे यह नारा
सारा देश हमारा
केरल से कारगिल घाटी तक…

घायल अपना ताजमहल है ,घायल गंगा मैया
टूट रहे हैं तूफानों में नैया और खेवैया
तुम नैया के पाल बदल दो
तूफानों की चाल बदल दो
हर आंधी का उतार हो तुम,तुमने नहीं विचारा
जीना हो तो मरना सीखो गूंज उठे यह नारा
सारा देश हमारा
केरल से कारगिल घाटी तक…

कहीं तुम्हें परवत लड़वा दे ,कहीं लड़ा दे पानी
भाषा के नारों में गम है ,मन की मीठी वाणी
आग दो इन नारों में
इज्ज़त आ गई बाजारों में
कब जागेंगे सोये सूरज! कब होगा उजियारा
जीना हो तो मरना सीखो गूंज उठे यह नारा
सारा देश हमारा
केरल से कारगिल घाटी तक…

संकट अपना बाल सखा है इसको कंठ लगाओ
क्या बैठे हो न्यारे-न्यारे मिलकर बोझ उठाओ
भाग्य भरोसा कायरता है
कर्मठ देश कहाँ मरता है
सोचो तुमने इतने दिन में कितनी बार हुंकारा
जीना हो तो मरना सीखो गूंज उठे यह नारा
सारा देश हमारा
केरल से कारगिल घाटी तक…

सारा देश हमारा / बालकवि बैरागी – बालकवि बैरागी

motivational kavita in hindi #21 जिन्दगी इक तलाश है क्या है? / अमित – अमिताभ त्रिपाठी ‘अमित’

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जिन्दगी इक तलाश है, क्या है?
दर्द इसका लिबास है क्या है?

फिर हवा ज़हर पी के आई क्या,
सारा आलम उदास है, क्या है?

एक सच के हजार चेहरें हैं,
अपना-अपना क़यास है, क्या है

जबकि दिल ही मुकाम है रब का,
इक जमीं फिर भी ख़ास है, क्या है

राम-ओ-रहमान की हिफ़ाजत में,
आदमी! बदहवास है, क्या है?

सुधर तो सकती है दुनियाँ, लेकिन
हाल, माज़ी का दास है, क्या है

मिटा रहा है जमाना इसे जाने कब से,
इक बला है कि प्यास है, क्या है?

गौर करता हूँ तो आती है हँसी,
ये जो सब आस पास है क्या है?

जिन्दगी इक तलाश है क्या है? / अमित – अमिताभ त्रिपाठी ‘अमित’

motivational kavita in hindi #22 सुन रहा हूँ इसलिये उल्लू बनाना चाहते हैं / अमित – अमिताभ त्रिपाठी ‘अमित’

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व्यर्थ की संवेदनाओं से डराना चाहते हैं
सुन रहा हूँ इसलिये उल्लू बनाना चाहते हैं

मेरे जीवन की समस्याओं के साये में कहीं
अपने कुत्तों के लिये भी अशियाना चाहते हैं

धूप से नज़रे चुराते हैं पसीनों के अमीर
किसके मुस्तकबिल को फूलों से सजाना चाहते हैं

मेरे क़तरों की बदौलत जिनकी कोठी है बुलन्द
वक़्त पर मेरे ही पीछे सिर छुपाना चाहते हैं

कितने बेमानी से लगते हैं वो नारे दिल-फ़रेब
कितनी बेशर्मी से वो परचम उठाना चाहते हैं

सुन रहा हूँ इसलिये उल्लू बनाना चाहते हैं / अमित – अमिताभ त्रिपाठी ‘अमित’

motivational kavita in hindi #23 पहली पेंशन /अनामिका – अनामिका

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श्रीमती कार्लेकर
अपनी पहली पेंशन लेकर
जब घर लौटीं–
सारी निलम्बित इच्छाएँ
अपना दावा पेश करने लगीं।

जहाँ जो भी टोकरी उठाई
उसके नीचे छोटी चुहियों-सी
दबी-पड़ी दीख गई कितनी इच्छाएँ!

श्रीमती कार्लेकर उलझन में पड़ीं
क्या-क्या ख़रीदें, किससे कैसे निबटें!
सूझा नहीं कुछ तो झाड़न उठाई
झाड़ आईं सब टोकरियाँ बाहर
चूहेदानी में इच्छाएँ फँसाईं
(हुलर-मुलर सारी इच्छाएँ)
और कहा कार्लेकर साहब से–
“चलो ज़रा, गंगा नहा आएँ!”

पहली पेंशन /अनामिका – अनामिका

motivational kavita in hindi #24 कूड़ा बीनते बच्चे / अनामिका – अनामिका

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उन्हें हमेशा जल्दी रहती है
उनके पेट में चूहे कूदते हैं
और खून में दौड़ती है गिलहरी!
बड़े-बड़े डग भरते
चलते हैं वे तो
उनका ढीला-ढाला कुर्ता
तन जाता है फूलकर उनके पीछे
जैसे कि हो पाल कश्ती का!
बोरियों में टनन-टनन गाती हुई
रम की बोतलें
उनकी झुकी पीठ की रीढ़ से
कभी-कभी कहती हैं-
“कैसी हो”,”कैसा है मंडी का हाल?”
बढ़ते-बढ़ते
चले जाते हैं वे
पाताल तक
और वहाँ लग्गी लगाकर
बैंगन तोड़ने वाले
बौनों के वास्ते
बना देते हैं
माचिस के खाली डिब्बों के
छोटे-छोटे कई घर
खुद तो वे कहीं नहीं रहते,
पर उन्हें पता है घर का मतलब!
वे देखते हैं कि अकसर
चींते भी कूड़े के ठोंगों से पेड़ा खुरचकर
ले जाते हैं अपने घर!
ईश्वर अपना चश्मा पोंछता है
सिगरेट की पन्नी उनसे ही लेकर।

कूड़ा बीनते बच्चे / अनामिका – अनामिका

motivational kavita in hindi #25 पुस्तकालय में झपकी / अनामिका – अनामिका

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गर्मी गज़ब है!
चैन से जरा ऊंघ पाने की
इससे ज़्यादा सुरिक्षत, ठंडी, शांत जगह
धरती पर दूसरी नहीं शायद ।

गैलिस की पतलून,
ढीले पैतावे पहने
रोज़ आते हैं जो
नियत समय पर यहां ऊंघने

वे वृद्ध गोरियो, किंग लियर,
भीष्म पितामह और विदुर वगैरह अपने साग-वाग
लिए-दिए आते हैं
छोटे टिफ़न में।

टायलेट में जाकर मांजते हैं देर तलक
अपना टिफन बाक्स खाने के बाद।
बहुत देर में चुनते हैं अपने-लायक
मोटे हर्फों वाली पतली किताब,
उत्साह से पढ़ते है पृष्ठ दो-चार
देखते हैं पढ़कर
ठीक बैठा कि नहीं बैठा
चश्मे का नंबर।

वे जिसके बारे में पढ़ते हैं-
वो ही हो जाते हैं अक्सर-
बारी-बारी से अशोक, बुद्ध, अकबर।
मधुबाला, नूतन की चाल-ढाल,
पृथ्वी कपूर और उनकी औलादों के तेवर
ढूंढा करते हैं वे इधर-उधर
और फिर थककर सो जाते हैं कुर्सी पर।

मुंह खोल सोए हुए बूढ़े
दुनिया की प्राचीनतम
पांडुलिपियों से झड़ी
धूल फांकते-फांकते
खुद ही हो जाते हैं जीर्ण-शीर्ण भूजर्पत्र!

कभी-कभी हवा छेड़ती है इन्हें,
गौरैया उड़ती-फुड़ती
इन पर कर जाती है
नन्हें पंजों से हस्ताक्षर।

क्या कोई राहुल सांस्कृतायन आएगा
और जिह्वार्ग किए इन्हें लिए जाएगा
तिब्बत की सीमा के पार?

पुस्तकालय में झपकी / अनामिका – अनामिका

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11 Shiv puran katha – शिव पुराण कथा – Shiv puran katha pdf

Shiv Puran Katha #1 भगवान शंकर का पूर्ण रूप

एक बार सुमेरु पर्वत पर बैठे हुए ब्रम्हाजी के पास जाकर देवताओं ने उनसे अविनाशी तत्व बताने का अनुरोध किया | शिवजी की माया से मोहित ब्रह्माजी उस तत्व को न जानते हुए भी इस प्रकार कहने लगे – मैं ही इस संसार को उत्पन्न करने वाला स्वयंभू, अजन्मा, एक मात्र ईश्वर , अनादी भक्ति, ब्रह्म घोर निरंजन आत्मा हूँ|

मैं ही प्रवृति उर निवृति का मूलाधार , सर्वलीन पूर्ण ब्रह्म हूँ | ब्रह्मा जी ऐसा की पर मुनि मंडली में विद्यमान विष्णु जी ने उन्हें समझाते हुए कहा की मेरी आज्ञा से तो तुम सृष्टी के रचियता बने हो, मेरा अनादर करके तुम अपने प्रभुत्व की बात कैसे कर रहे हो ?

इस प्रकार ब्रह्मा और विष्णु अपना-अपना प्रभुत्व स्थापित करने लगे और अपने पक्ष के समर्थन में शास्त्र वाक्य उद्घृत करने लगे| अंततः वेदों से पूछने का निर्णय हुआ तो स्वरुप धारण करके आये चारों वेदों ने क्रमशः अपना मत६ इस प्रकार प्रकट किया –

ऋग्वेद- जिसके भीतर समस्त भूत निहित हैं तथा जिससे सब कुछ प्रवत्त होता है और जिसे परमात्व कहा जाता है, वह एक रूद्र रूप ही है |

यजुर्वेद- जिसके द्वारा हम वेद भी प्रमाणित होते हैं तथा जो ईश्वर के संपूर्ण यज्ञों तथा योगों से भजन किया जाता है, सबका दृष्टा वह एक शिव ही हैं|

सामवेद- जो समस्त संसारी जनों को भरमाता है, जिसे योगी जन ढूँढ़ते हैं और जिसकी भांति से सारा संसार प्रकाशित होता है, वे एक त्र्यम्बक शिवजी ही हैं |

अथर्ववेद- जिसकी भक्ति से साक्षात्कार होता है और जो सब या सुख – दुःख अतीत अनादी ब्रम्ह हैं, वे केवल एक शंकर जी ही हैं|

विष्णु ने वेदों के इस कथन को प्रताप बताते हुए नित्य शिवा से रमण करने वाले, दिगंबर पीतवर्ण धूलि धूसरित प्रेम नाथ, कुवेटा धारी, सर्वा वेष्टित, वृपन वाही, निःसंग,शिवजी को पर ब्रम्ह मानने से इनकार कर दिया| ब्रम्हा-विष्णु विवाद को सुनकर ओंकार ने शिवजी की ज्योति, नित्य और सनातन परब्रम्ह बताया परन्तु फिर भी शिव माया से मोहित ब्रम्हा विष्णु की बुद्धि नहीं बदली |

उस समय उन दोनों के मध्य आदि अंत रहित एक ऐसी विशाल ज्योति प्रकट हुई की उससे ब्रम्हा का पंचम सिर जलने लगा| इतने में त्रिशूलधारी नील-लोहित शिव वहां प्रकट हुए तो अज्ञानतावश ब्रम्हा उन्हें अपना पुत्र समझकर अपनी शरण में आने को कहने लगे|

ब्रम्हा की संपूर्ण बातें सुनकर शिवजी अत्यंत क्रुद्ध हुए और उन्होंने तत्काल भैरव को प्रकट कर उससे ब्रम्हा पर शासन करने का आदेश दिया| आज्ञा का पालन करते हुए भैरव ने अपनी बायीं ऊँगली के नखाग्र से ब्रम्हाजी का पंचम सिर काट डाला| भयभीत ब्रम्हा शत रुद्री का पाठ करते हुए शिवजी के शरण हुए|ब्रम्हा और विष्णु दोनों को सत्य की प्रतीति हो गयी और वे दोनों शिवजी की महिमा का गान करने लगे| यह देखकर शिवजी शांत हुए और उन दोनों को अभयदान दिया|

इसके उपरान्त शिवजी ने उसके भीषण होने के कारण भैरव और काल को भी भयभीत करने वाला होने के कारण काल भैरव तथा भक्तों के पापों को तत्काल नष्ट करने वाला होने के कारण पाप भक्षक नाम देकर उसे काशीपुरी का अधिपति बना दिया | फिर कहा की भैरव तुम इन ब्रम्हा विष्णु को मानते हुए ब्रम्हा के कपाल को धारण करके इसी के आश्रय से भिक्षा वृति करते हुए वाराणसी में चले जाओ | वहां उस नगरी के प्रभाव से तुम ब्रम्ह हत्या के पाप से मुक्त हो जाओगे |

शिवजी की आज्ञा से भैरव जी हाथ में कपाल लेकर ज्योंही काशी की ओर चले, ब्रम्ह हत्या उनके पीछे पीछे हो चली| विष्णु जी ने उनकी स्तुति करते हुए उनसे अपने को उनकी माया से मोहित न होने का वरदान माँगा | विष्णु जी ने ब्रम्ह हत्या के भैरव जी के पीछा करने की माया पूछना चाही तो ब्रम्ह हत्या ने बताया की वह तो अपने आप को पवित्र और मुक्त होने के लिए भैरव का अनुसरण कर रही है |

भैरव जी ज्यों ही काशी पहुंचे त्यों ही उनके हाथ से चिमटा और कपाल छूटकर पृथ्वी पर गिर गया और तब से उस स्थान का नाम कपालमोचन तीर्थ पड़ गया | इस तीर्थ मैं जाकर सविधि पिंडदान और देव-पितृ-तर्पण करने से मनुष्य ब्रम्ह हत्या के पाप से निवृत हो जाता है

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Shiv Puran Katha #2 शिव और सती का विवाह

दक्ष प्रजापति की कई पुत्रियां थी। सभी पुत्रियां गुणवती थीं। फिर भी दक्ष के मन में संतोष नहीं था। वे चाहते थे उनके घर में एक ऐसी पुत्री का जन्म हो, जो सर्व शक्तिसंपन्न हो एवं सर्व विजयिनी हो। जिसके कारण दक्ष एक ऐसी हि पुत्री के लिए तप करने लगे। तप करतेकरते अधिक दिन बीत गए, तो भगवती आद्या ने प्रकट होकर कहा, मैं तुम्हारे तप से प्रसन्न हूं।

तुम किस कारण वश तप कर रहे हों? दक्ष नें तप करने का कारण बताय तो मां बोली मैं स्वय पुत्री रूप में तुम्हारे यहां जन्म धारण करूंगी। मेरा नाम होगा सती। मैं सती के रूप में जन्म लेकर अपनी लीलाओं का विस्तार करूंगी। फलतः भगवती आद्या ने सती रूप में दक्ष के यहां जन्म लिया। सती दक्ष की सभी पुत्रियों में सबसे अलौकिक थीं।

सतीने बाल्य अवस्था में ही कई ऐसे अलौकिक आश्चर्य चलित करने वाले कार्य कर दिखाए थे, जिन्हें देखकर स्वयं दक्ष को भी विस्मयता होती रहती थी। जब सती विवाह योग्य होगई, तो दक्ष को उनके लिए वर की चिंता होने लगी। उन्होंने ब्रह्मा जी से इस विषय में परामर्श किया। ब्रह्मा जी ने कहा, सती आद्या का अवतार हैं। आद्या आदि शक्ति और शिव आदि पुरुष हैं।

अतः सती के विवाह के लिए शिव ही योग्य और उचित वर हैं। दक्ष ने ब्रह्मा जी की बात मानकर सती का विवाह भगवान शिव के साथ कर दिया। सती कैलाश में जाकर भगवान शिव के साथ रहने लगीं। भगवान शिव के दक्ष के दामाद थे, किंतु एक ऐसी घटना घटीत होगई जिसके कारण दक्ष के ह्रदय में भगवान शिव के प्रति बैर और विरोध भाव पैदा हो गया।

एक बार देवलोक में ब्रह्मा ने धर्म के निरूपण के लिए एक सभा का आयोजन किया था। सभी बड़ेबड़े देवता सभा में एकत्र होगये थे। भगवान शिव भी इस सभा में बैठे थे। सभा मण्डल में दक्ष का आगमन हुआ। दक्ष के आगमन पर सभी देवता उठकर खड़े हो गए, पर भगवान शिव खड़े नहीं हुए। उन्होंने दक्ष को प्रणाम भी नहीं किया। फलतः दक्ष ने अपमान का अनुभव किया। केवल यही नहीं, उनके ह्रदय में भगवान शिव के प्रति ईर्ष्या की आग जल उठी। वे उनसे बदला लेने के लिए समय और अवसर की प्रतीक्षा करने लगे।

एक बार सती और शिव कैलाश पर्वत पर बैठे हुए परस्पर वार्तालाप कर रहे थे। उसी समय आकाश मार्ग से कई विमान कनखल कि ओर जाते हुए दिखाई पड़े। सती ने उन विमानों को दिखकर भगवान शिव से पूछा, प्रभो, ये सभी विमान किसके है और कहां जा रहे हैं? भगवान शकंर ने उत्तर दिया आपके पिता ने बहोत बडे यज्ञ का आयोजन किया हैं। समस्त देवता और देवांगनाएं इन विमानों में बैठकर उसी यज्ञ में सम्मिलित होने के लिए जा रहे हैं।

इस पर सती ने दूसरा प्रश्न किया क्या मेरे पिता ने आपको यज्ञ में सम्मिलित होने के लिए नहीं बुलाया?

भगवान शंकर ने उत्तर दिया, आपके पिता मुझसे बैर रखते है, फिर वे मुझे क्यों बुलाने लगे?

सती मन ही मन सोचने लगीं फिर बोलीं यज्ञ के इस अवसर पर अवश्य मेरी सभी बहनें आएंगी। उनसे मिले हुए बहुत दिन हो गए। यदि आपकी अनुमति हो, तो मैं भी अपने पिता के घर जाना चाहती हूं। यज्ञ में सम्मिलित हो लूंगी और बहनों से भी मिलने का सुअवसर मिलेगा।

भगवान शिव ने उत्तर दिया, इस समय वहां जाना उचित नहीं होगा। आपके पिता मुझसे जलते हैं हो सकता हैं वे आपका भी अपमान करें। बिना बुलाए किसी के घर जाना उचित नहीं होता हैं। इस पर सती ने प्रश्न किया एसा क्युं? भगवान शिव ने उत्तर दिया विवाहिता लड़की को बिना बुलाए पिता के घर नही जाना चाहिए, क्योंकि विवाह हो जाने पर लड़की अपने पति कि हो जाती हैं। पिता के घर से उसका संबंध टूट जाता हैं। लेकिन सती पीहर जाने के लिए हठ करती रहीं। अपनी बात बारबात दोहराती रहीं। उनकी इच्छा देखकर भगवान शिव ने पीहर जाने की अनुमति दे दी। उनके साथ अपना एक गण भी साथ में भेज दिया उस गण का नाम वीरभद्र था। सती वीरभद्र के साथ अपने पिता के घर गईं।

घर में सतीसे किसी ने भी प्रेमपूर्वक वार्तालाप नहीं किया। दक्ष ने उन्हें देखकर कहा तुम क्या यहां मेरा अपमान कराने आई हो? अपनी बहनों को तो देखो वे किस प्रकार भांतिभांति के अलंकारों और सुंदर वस्त्रों से सुसज्जित हैं।

तुम्हारे शरीर पर मात्र बाघंबर हैं। तुम्हारा पति श्मशानवासी और भूतों का नायक हैं। वह तुम्हें बाघंबर छोड़कर और पहना ही क्या सकता हैं। दक्ष के कथन से सती के ह्रदय में पश्चाताप का सागर उमड़ पड़ा। वे सोचने लगीं उन्होंने यहां आकर अच्छा नहीं किया। भगवान ठीक ही कह रहे थे, बिना बुलाए पिता के घर भी नहीं जाना चाहिए। पर अब क्या हो सकता हैं? अब तो आ ही गई हूं।

पिता के कटु और अपमानजनक शब्द सुनकर भी सती मौन रहीं। वे उस यज्ञमंडल में गईं जहां सभी देवता और ॠषिमुनि बैठे थे तथा यज्ञकुण्ड में धूधू करती जलती हुई अग्नि में आहुतियां डाली जा रही थीं। सती ने यज्ञमंडप में सभी देवताओं के तो भाग देखे, किंतु भगवान शिव का भाग नहीं देखा। वे भगवान शिव का भाग न देखकर अपने पिता से बोलीं पितृश्रेष्ठ यज्ञ में तो सबके भाग दिखाई पड़ रहे हैं किंतु कैलाशपति का भाग नहीं हैं। आपने उनका भाग क्यों नहीं रखा?

दक्ष ने गर्व से उत्तर दिया मैं तुम्हारे पति शिव को देवता नहीं समझता। वह तो भूतों का स्वामी, नग्न रहने वाला और हड्डियों की माला धारण करने वाला हैं। वह देवताओं की पंक्ति में बैठने योग्य नहीं हैं। उसे कौन भाग देगा ?

सती के नेत्र लाल हो उठे। उनकी भौंहे कुटिल हो गईं। उनका मुखमंडल प्रलय के सूर्य की भांति तेजोद्दीप्त हो उठा। उन्होंने पीड़ा से तिलमिलाते हुए कहा ओह मैं इन शब्दों को कैसे सुन रहीं हूं मुझे धिक्कार हैं। देवताओ तुम्हें भी धिक्कार हैं, तुम भी उन कैलाशपति के लिए इन शब्दों को कैसे सुन रहे हो जो मंगल के प्रतीक हैं और जो क्षण मात्र में संपूर्ण सृष्टि को नष्ट करने की शक्ति रखते हैं।

वे मेरे स्वामी हैं। नारी के लिए उसका पति ही स्वर्ग होता हैं। जो नारी अपने पति के लिए अपमान जनक शब्दों को सुनती हैं उसे नरक में जाना पड़ता हैं। पृथ्वी सुनो, आकाश सुनो और देवताओं, तुम भी सुनो मेरे पिता ने मेरे स्वामी का अपमान किया हैं। मैं अब एक क्षण भी जीवित रहना नहीं चाहती। सती अपने कथन को समाप्त करती हुई यज्ञ के कुण्ड में कूद पड़ी। जलती हुई आहुतियों के साथ उनका शरीर भी जलने लगा। यज्ञमंडप में खलबली पैदा हो गई, हाहाकार मच गया। देवता उठकर खड़े हो गए।

वीरभद्र क्रोध से कांप उटे। वे उछ्लउछलकर यज्ञ का विध्वंस करने लगे। यज्ञमंडप में भगदड़ मच गई। देवता और ॠषिमुनि भाग खड़े हुए। वीरभद्र ने देखते ही देखते दक्ष का मस्तक काटकर फेंक दिया। समाचार भगवान शिव के कानों में भी पड़ा।

वे प्रचंड आंधी की भांति कनखल जा पहुंचे। सती के जले हुए शरीर को देखकर भगवान शिव ने अपने आपको भूल गए। सती के प्रेम और उनकी भक्ति ने शंकर के मन को व्याकुल कर दिया। उन शंकर के मन को व्याकुल कर दिया जिन्होंने काम पर भी विजय प्राप्त कि थी और जो सारी सृष्टि को नष्ट करने की क्षमता रखते थे। वे सती के प्रेम में खो गए, बेसुध हो गए ।

भगवान शिव ने उन्मत कि भांति सती के जले हुए शरीर को कंधे पर रख लिया। वे सभी दिशाओं में भ्रमण करने लगे। शिव और सती के इस अलौकिक प्रेम को देखकर पृथ्वी रुक गई, हवा रूक गई, जल का प्रवाह ठहर गया और रुक गईं देवताओं की सांसे। सृष्टि व्याकुल हो उठी, सृष्टि के प्राणी पुकारने लगे— पाहिमाम पाहिमाम भयानक संकट उपस्थित देखकर सृष्टि के पालक भगवान विष्णु आगे बढ़े।

वे भगवान शिव की बेसुधी में अपने चक्र से सती के एकएक अंग को काटकाट कर गिराने लगे। धरती पर इक्यावन स्थानों में सती के अंग कटकटकर गिरे। जब सती के सारे अंग कट कर गिर गए, तो भगवान शिव पुनः अपने आप में आए। जब वे अपने आप में आए, तो पुनः सृष्टि के सारे कार्य चलने लगे।

धरती पर जिन इक्यावन स्थानों में सती के अंग कटकटकर गिरे थे, वे ही स्थान आज शक्ति के पीठ स्थान माने जाते हैं। आज भी उन स्थानों में सती का पूजन होता हैं, उपासना होती हैं।”

shiv puran katha
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Shiv puran katha #3 शिव का रूद्र रूप

यह अवतार तब हुआ था जब ब्रह्मा के पुत्र दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया लेकिन भगवान शिव को उसमें नहीं बुलाया। जबकि दक्ष की पुत्री सती का विवाह शिव से हुआ था। यज्ञ की बात ज्ञात होने पर सती ने भी वहां चलने को कहा लेकिन शिव ने बिना आमंत्रण के जाने से मना कर दिया। फिर भी सती जिद कर अकेली ही वहां चली गई। अपने पिता के घर जब उन्होंने शिव का और स्वयं का अपमान अनुभव किया तो उन्हें क्रोध भी हुआ और उन्होंने यज्ञवेदी में कूदकर अपनी देह त्याग दी। जब भगवान शिव को यह पता हुआ तो उन्होंने क्रोध में अपने सिर से एक जटा उखाड़ी और उसे रोषपूर्वक पर्वत के ऊपर पटक दिया। उस जटा के पूर्वभाग से महाभंयकर वीरभद्र प्रगट हुए।

शास्त्रों में भी इसका उल्लेख है-

क्रुद्ध: सुदष्टष्ठपुट: स धूर्जटिर्जटां तडिद्व ह्लिस टोग्ररोचिषम्।

उत्कृत्य रुद्र: सहसोत्थितो हसन् गम्भीरनादो विससर्ज तां भुवि॥

ततोऽतिकाय स्तनुवा स्पृशन्दिवं। – श्रीमद् भागवत -4/5/1

अर्थात सती के प्राण त्यागने से दु:खी भगवान शिव ने उग्र रूप धारण कर क्रोध में अपने होंठ चबाते हुए अपनी एक जटा उखाड़ ली, जो बिजली और आग की लपट के समान दीप्त हो रही थी। सहसा खड़े होकर उन्होंने गंभीर अठ्ठाहस के साथ जटा को पृथ्वी पर पटक दिया। इसी से महाभयंकर वीरभद्र प्रगट हुए।

भगवान शिव के वीरभद्र अवतार का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। यह अवतार हमें संदेश देता है कि शक्ति का प्रयोग वहीं करें जहां उसका सदुपयोग हो। वीरों के दो वर्ग होते हैं- भद्र एवं अभद्र वीर।

राम, अर्जुन और भीम वीर थे। रावण, दुर्योधन और कर्ण भी वीर थे लेकिन पहला भद्र (सभ्य) वीर वर्ग और दूसरा अभद्र (असभ्य) वीर वर्ग है। सभ्य वीरों का काम होता है हमेशा धर्म के पथ पर चलना तथा नि:सहायों की सहायता करना। वहीं असभ्य वीर वर्ग सदैव अधर्म के मार्ग पर चलते हैं तथा नि:शक्तों को परेशान करते हैं। भद्र का अर्थ होता है कल्याणकारी। अत: वीरता के साथ भद्रता की अनिवार्यता इस अवतार से प्रतिपादित होती है।”

शिव पुराण कथा #4 इस प्रकार हुआ 52 शक्तिपीठों की स्थापना

ब्रह्मा के पुत्र प्रजापति दक्ष की पुत्री सती से भगवान शिव का विवाह हुआ। कुछ समय बाद दक्ष को पूरे ब्रह्माण्ड का अधिपति बना दिया गया। इससे दक्ष में अभिमान आ गया। वह अपने आपको सर्वश्रेष्ठ समझने लगा। एक यज्ञ में भगवान शिव द्वारा खुद को प्रणाम न करने पर दक्ष ने उन्हें अनेक अपशब्द कहे। दक्ष ने शिव को शाप दिया कि उन्हें देव यज्ञ में उनका हिस्सा नहीं मिलेगा।

यह सुनकर नंदी ने भी दक्ष को शाप दिया कि जिस मुंह से वह शिव निंदा कर रहा है वह बकरे का हो जाएगा।

कुछ समय बाद दक्ष ने एक भव्य यज्ञ का आयोजन किया। उसमें सभी देवी-देवताओं को बुलाया गया पर अभिमानी दक्ष ने शिव को उस यज्ञ से बहिष्कृत कर दिया। किसी तरह सती को यह पता चला तो उन्होंने शिव से उस यज्ञ में जाने की अनुमति मांगी। पहले तो शिव ने उन्हें समझाया पर जब वे नहीं मानीं तो उन्होंने सती को वहां जाने की अनुमति दे दी। सती अपने पिता के घर पहुंची तो दक्ष ने उनसे आंखें फेर लीं। सती यज्ञ में शिव का भाग न देखकर रूष्ट हो गईं और सभी को बुरा-भला कहने लगीं।

यह सुनकर दक्ष ने भी शिव निंदा प्रारम्भ कर दी।यह सुनकर सती को बड़ा दुख हुआ और उन्होंने योगाग्रि से अपने शरीर को भस्म कर दिया। यह देखकर शिव के गणों ने दक्ष यज्ञ पर हमला कर दिया पर देवताओं ने उन्हें वहां से भगा दिया। वे शिव के पास गए और सारी घटना सुना दी। यह सुनकर शिव को बड़ा क्रोध आया। उन्होंने अपनी एक जटा को उखाड़कर जमीन पर मारा जिससे वीरभद्र और महाकाली प्रकट हुए। शिव ने उन दोनों को दक्ष का यज्ञ विध्वंस करने की आज्ञा दी। उन्होंने पल भर में ही दक्ष का यज्ञ विध्वंश कर डाला और वीरभद्र ने दक्ष का सिर काट कर उसे यज्ञ कु ण्ड में फेंक दिया।

यह देखकर देवताओं में हडकंप मच गया और उन्होंने शिव स्तुति प्रारम्भ कर दी। उनकी स्तुति उन्होंने सभी को जीवनदान दे दिया और दक्ष के शरीर पर बकरे का सिर लगाकर उसे भी जीवित कर दिया। बाद में शिव की अनुमति से दक्ष ने अपना यज्ञ पूरा किया।अपनी प्रिय पत्नी के शव को लेकर शिव पूरे ब्रह्माण्ड में घूमने लगे।

उनके प्रताप से सारी सृष्टि जलने लगी। तब विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के ५1 टुकड़े कर दिए। ये टुकड़े जहां-जहां गिरे वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई।

तब सती का पूरा शरीर कट कर गिर गया तो भगवान बहुत दुखी हुए और कैलास पर जाकर एकांत में समाधि ले ली।”

शिव पुराण कथा #5 शिव पार्वती का विवाह

जब सती के खुद को योगाग्रि में भस्म कर लेने का समाचार शिवजी के पास पहुंचा। तब शिवजी ने वीरभद्र को भेजा। उन्होंने वहां जाकर यज्ञ विध्वंस कर डाला और सब देवताओं को यथोचित फल दिया। सती ने मरते समय शिव से यह वर मांगा कि हर जन्म में आप ही मेरे पति हों। इसी कारण उन्होंने हिमाचल के घर जाकर पार्वती का जन्म लिया।

जब से पार्वती हिमाचल के घर में जन्म तब से उनके घर में सुख और सम्पतियां छा गई। पार्वती जी के आने से पर्वत शोभायमान हो गया। जब नारद जी ने ये सब समाचार सुने तो वे हिमाचल पहुंचे। वहां पहुंचकर वे हिमाचल से मिले और हंसकर बोले तुम्हारी कन्या गुणों की खान है। यह स्वभाव से ही सुन्दर, सुशील और शांत है। यह कन्या सुलक्षणों से सम्पन्न है। यह अपने पति को प्यारी होगी।

अब इसमें जो दो चार अवगुण है वे भी सुन लो। गुणहीन, मानहीन, माता-पिता विहीन, उदासीन, लापरवाह। इसका पति नंगा, योगी, जटाधारी और सांपों को गले में धारण करने वाला होगा।

यह बात सुनकर पार्वती के माता-पिता चिंतित हो गए। उन्होंने देवर्षि से इसका उपाय पूछा। तब नारद जी बोले जो दोष मैंने बताए मेरे अनुमान से वे सभी शिव में है। अगर शिवजी के साथ विवाह हो जाए तो ये दोष गुण के समान ही हो जाएंगे।

यदि तुम्हारी कन्या तप करे तो शिवजी ही इसकी किस्मत बदल सकते हैं। तब यह सुनकर पार्वतीजी की मां विचलित हो गई। उन्होंने पार्वती के पिता से कहा आप अनुकूल घर में ही अपनी पुत्री का विवाह किजिएगा क्योंकि पार्वती मुझे प्राणों से अधिक प्रिय है। पार्वती को देखकर मैंना का गला भर आया। पार्वती ने अपनी मां से कहा मां मुझे एक ब्राहा्रण ने सपने में कहा है कि जो नारदजी ने कहा है तु उसे सत्य समझकर जाकर तप कर। यह तप तेरे लिए दुखों का नाश करने वाला है। उसके बाद माता-पिता को बड़ी खुशी से समझाकर पार्वती तप करने गई।

पार्वतीजी ने शिव को पति रूप में पाने के लिए तपस्या आरंभ की। लेकिन शिव को सांसारिक बंधनों में कदापि रुचि नहीं थी, इसलिए पार्वतीजी ने अत्यंत कठोर तपस्या की ताकि शिव प्रसन्न होकर उनसे विवाह कर लें।

जब सप्तर्षि सती की परीक्षा लेने गए

सप्तर्षि ने पार्वती से जाकर पूछा तुम किस के लिए इतना कठिन तप कर रही हो। तब पार्वती ने सकुचाते हुए कहा आप लोग मेरी मुर्खता को सुनकर हंसेंगें। मैं शिव को अपना पति बनाना चाहती हूं। पार्वती की बात सुनकर सभी ऋषि हंसने लगे और बोले की तुमने उस नारद का उपदेश सुनकर शिव को अपना पति माना है जो सब कुछ चौपट कर देता है। उनकी बातों पर विश्वास करके तुम ऐसा पति चाहती हो जो स्वभाव से ही उदासीन, गुणहीन निर्लज्ज, बुरे वेषवाला , बिना घर बार वाला , नंगा और शरीर पर नागों को धारण करने वाला है।ऐसे वर के मिलने से कहो तुम्हे क्या सुख मिलेगा।

अब हमारा कहा मानो हमने तुम्हारे लिए बहुत अच्छा वर चुना है। हमने तुम्हारे लिए जो वर चुना है वह लक्ष्मी का स्वामी और वैकुंठपुरी का रहने वाला है। तब पार्वती उनकी बात सुनकर बोली कहा है कि मेरा हठ भी पर्वत के ही समान मजबूत है। मैं अपना यह जन्म शिव के लिए हार चुकी हूं। मेरी तो करोड़ जन्मों तक यही जिद रहेगी। पार्वती की यह बात सुनकर सभी ऋषि बोले आप माया हैं और शिव भगवान है। आप दोनों समस्त जगत के माता-पिता है।

यह कहकर सप्तर्षि पार्वती को प्रणाम करके वहां से चले गए।

पार्वतीजी की दृढ़ निष्ठा ने जीत लिया शिवजी का मन

वर्षो तपस्या करने के बाद एक दिन पार्वतीजी के पास एक ब्रह्मचारी आया। वह ब्रह्मचारी तपस्विनी पार्वती का अघ्र्य स्वीकार करने से पूर्व बोल उठा – तुम्हारे जैसी सुकुमारी क्या तपस्या के योग्य है? मैंने दीर्घकाल तक तप किया है। चाहो तो मेरा आधा या पूरा तप ले लो, किंतु तुम इतनी कठिन तपस्या मत करो। तुम चाहो तो त्रिभुवन के स्वामी भगवान विष्णु भी..। किंतु पार्वती ने ऐसा उपेक्षा का भाव दिखाया कि ब्रह्मचारी दो क्षण को रुक गया।

फिर बोला – योग्य वर में तीन गुण देखे जाते हैं – सौंदर्य, कुलीनता और संपत्ति। इन तीनों में से शिव के पास एक भी नहीं है। नीलकंठ, त्रिलोचन, जटाधारी, विभूति पोते, सांप लपेटे शिव में तुम्हें कहीं सौंदर्य दिखता है? उनकी संपत्ति का तो कहना ही क्या, नग्न रहते हैं। बहुत हुआ तो चर्म(चमड़ा) लपेट लिया। कोई नहीं जानता कि उनकी उत्पत्ति कैसे हुई।

ब्रह्मचारी पता नहीं क्या-क्या कहता रहा, किंतु अपने आराध्य की निंदा पार्वती को अच्छी नहीं लगी। अत: वे अन्यत्र जाने को उठ खड़ी हुईं। तब शिव उनकी निष्ठा देख ब्रह्मचारी रूप त्याग प्रकट हुए और उनसे विवाह किया। जहां दृढ़ लगन, कष्ट सहने का साहस और अटूट आत्मविश्वास हो, वहां लक्ष्य की प्राप्ति अवश्य होती है।”

शिव पुराण कथा #6 शिव विवाह

पार्वती अपने तप को पूर्ण होते देख घर लौट आईं और अपने माता-पिता से सारा वृत्तांत कह सुनाया। अपनी दुलारी पुत्री की कठोर तपस्या को फलीभूत होता देखकर माता-पिता के आनंद का ठिकाना नहीं रहा।

उधर शंकरजी ने सप्तर्षियों को विवाह का प्रस्ताव लेकर हिमालय के पास भेजा और इस प्रकार विवाह की शुभ तिथि निश्चित हुई।

सप्तर्षियों द्वारा विवाह की तिथि निश्चित कर दिए जाने के बाद भगवान् शंकरजी ने नारदजी द्वारा सारे देवताओं को विवाह में सम्मिलित होने के लिए आदरपूर्वक निमंत्रित किया और अपने गणों को बारात की तैयारी करने का आदेश दिया।

उनके इस आदेश से अत्यंत प्रसन्न होकर गणेश्वर शंखकर्ण, केकराक्ष, विकृत, विशाख, विकृतानन, दुन्दुभ, कपाल, कुंडक, काकपादोदर, मधुपिंग, प्रमथ, वीरभद्र आदि गणों के अध्यक्ष अपने-अपने गणों को साथ लेकर चल पड़े।

नंदी, क्षेत्रपाल, भैरव आदि गणराज भी कोटि-कोटि गणों के साथ निकल पड़े। ये सभी तीन नेत्रों वाले थे। सबके मस्तक पर चंद्रमा और गले में नीले चिन्ह थे। सभी ने रुद्राक्ष के आभूषण पहन रखे थे। सभी के शरीर पर उत्तम भस्म पुती हुई थी।

इन गणों के साथ शंकरजी के भूतों, प्रेतों, पिशाचों की सेना भी आकर सम्मिलित हो गई। इनमें डाकनी, शाकिनी, यातुधान, वेताल, ब्रह्मराक्षस आदि भी शामिल थे। इन सभी के रूप-रंग, आकार-प्रकार, चेष्टाएँ, वेश-भूषा, हाव-भाव आदि सभी कुछ अत्यंत विचित्र थे। किसी के मुख ही नहीं था और किसी के बहुत से मुख थे। कोई बिना हाथ-पैर के ही था तो कोई बहुत से हाथ-पैरों वाला था।

किसी के बहुत सी आँखें थीं और किसी के पास एक भी आँख नहीं थी। किसी का मुख गधे की तरह, किसी का सियार की तरह, किसी का कुत्ते की तरह था। उन सबने अपने अंगों में ताजा खून लगा रखा था। कोई अत्यंत पवित्र और कोई अत्यंत वीभत्स तथा अपवित्र गणवेश धारण किए हुए था। उनके आभूषण बड़े ही डरावने थे उन्होंने हाथ में नर-कपाल ले रखा था।

वे सबके सब अपनी तरंग में मस्त होकर नाचते-गाते और मौज उड़ाते हुए महादेव शंकरजी के चारों ओर एकत्रित हो गए।

चंडीदेवी बड़ी प्रसन्नता के साथ उत्सव मनाती हुई भगवान् रुद्रदेव की बहन बनकर वहाँ आ पहुँचीं। उन्होंने सर्पों के आभूषण पहन रखे थे। वे प्रेत पर बैठकर अपने मस्तक पर सोने का कलश धारण किए हुए थीं।

धीरे-धीरे वहाँ सारे देवता भी एकत्र हो गए। उस देवमंडली के बीच में भगवान श्री विष्णु गरुड़ पर विराजमान थे। पितामह ब्रह्माजी भी उनके पास में मूर्तिमान् वेदों, शास्त्रों, पुराणों, आगमों, सनकाद महासिद्धों, प्रजापतियों, पुत्रों तथा कई परिजनों के साथ उपस्थित थे।

देवराज इंद्र भी कई आभूषण पहन अपने ऐरावत गज पर बैठ वहाँ पहुँचे थे। सभी प्रमुख ऋषि भी वहाँ आ गए थे।

तुम्बुरु, नारद, हाहा और हूहू आदि श्रेष्ठ गंधर्व तथा किन्नर भी शिवजी की बारात की शोभा बढ़ाने के लिए वहाँ पहुँच गए थे। इनके साथ ही सभी जगन्माताएँ, देवकन्याएँ, देवियाँ तथा पवित्र देवांगनाएँ भी वहाँ आ गई थीं।

इन सभी के वहाँ मिलने के बाद भगवान शंकरजी अपने स्फुटिक जैसे उज्ज्वल, सुंदर वृषभ पर सवार हुए। दूल्हे के वेश में शिवजी की शोभा निराली ही छटक रही थी।

इस दिव्य और विचित्र बारात के प्रस्थान के समय डमरुओं की डम-डम, शंखों के गंभीर नाद, ऋषियों-महर्षियों के मंत्रोच्चार, यक्षों, किन्नरों, गन्धर्वों के सरस गायन और देवांगनाओं के मनमोहक नृत्य और मंगल गीतों की गूँज से तीनों लोक परिव्याप्त हो उठे।

उधर हिमालय ने विवाह के लिए बड़ी धूम-धाम से तैयारियाँ कीं और शुभ लग्न में शिवजी की बारात हिमालय के द्वार पर आ लगी। पहले तो शिवजी का विकट रूप तथा उनकी भूत-प्रेतों की सेना को देखकर मैना बहुत डर गईं और उन्हें अपनी कन्या का पाणिग्रहण कराने में आनाकानी करने लगीं।

पीछे से जब उन्होंने शंकरजी का करोड़ों कामदेवों को लजाने वाला सोलह वर्ष की अवस्था का परम लावण्यमय रूप देखा तो वे देह-गेह की सुधि भूल गईं और शंकर पर अपनी कन्या के साथ ही साथ अपनी आत्मा को भी न्योछावर कर दिया।

हर-गौरी का विवाह आनंदपूर्वक संपन्न हुआ। हिमाचल ने कन्यादान दिया। विष्णु भगवान तथा अन्यान्य देव और देव-रमणियों ने नाना प्रकार के उपहार भेंट किए। ब्रह्माजी ने वेदोक्त रीति से विवाह करवाया। सब लोग अमित उत्साह से भरे अपने-अपने स्थानों को लौट गए।”

शिव पुराण कथा #7 भगवती तुलसी की कथा

एक बार देवराज इंद्र देवगुरू बृहस्पति के साथ भगवान शिव का दर्शन करने कैलाश गए. महादेव ने दोनों की परीक्षा लेनी चाहिए इसलिए रूप बदलकर अवधूत बन गए. उनके शरीर पर कोई वस्त्र न था.

उनका शरीर जलती हुई अग्नि के समान धधक रहा था और अत्यंत भयंकर नजर आते थे. अवधूत दोनों के रास्ते में खड़े हो गए. इंद्र ने एक विचित्र पुरुष को रास्ते में खड़े देखा तो चौंके.

इंद्र को देवराज होने का गर्व घेरने लगा. उन्होंने उस भयंकर पुरुष से पूछा तुम कौन हो? भगवान शिव अभी कैलाश पर विराज रहे हैं या कहीं भ्रमण पर हैं. मैं उनके दर्शन के लिए आया हूं.

इंद्र ने कई प्रश्न किए लेकिन वह पुरुष योगियों के समान मौन ही रहे. इंद्र को लगा कि एक साधारण प्राणी उनका अपमान कर रहा है. उनके मन में देवराज होने का अहंकार उपजा जो क्रोध में बदल गया.

इंद्र ने कहा मेरे बारबार अनुरोध पर भी तू कुछ नहीं बोलकर मेरा अपमान कर रहा है. मैं तुझे अभी दंड देता हूं. ऐसा कहकर इंद्र ने वज्र उठा लिया. भगवान शिव ने वज्र को उसी समय स्तंभित यानी जड़ कर दिया.

इंद्र की बांह अकड़ गई. भगवान अवधूत क्रोध से लाल हो गए. बृहस्पति उनके चेहरे पर आई क्रोध की ज्वाला को देखकर समझ गए कि ऐसा प्रचंड़ स्वरूप महादेव के अतिरिक्त किसी का नहीं हो सकता.

बृहस्पति शिवस्तुति गाने लगे. उन्होंने इंद्र को भी महादेव के चरणों में लेटा दिया और बोले प्रभु इंद्र आपके चरणों में पड़े हैं, आपके शरणागत हैं. आपके ललाट से प्रकट अग्नि इन्हें जलाने को बढ़ रही है. हम शरणागतों की रक्षा करें. बृहस्पति ने विनती की प्रभु भक्तों पर आपकी सदा कृपा बरसती है. आप भक्त वत्सल और सर्वसमर्थ हैं. आप इस तेज को कहीं और स्थान दे दीजिए ताकि इंद्र के प्राणों की रक्षा हो.

भगवान रूद्र ने कहा बृहस्पति मैं तुम पर बहुत प्रसन्न हूं. इंद्र को जीवनदान देने के कारण तुम्हारा एक नाम जीव भी होगा. मेरे तीसरे नेत्र से प्रकट इस अग्नि का ताप देवता सहन नहीं कर सकते. इसलिए मैं इसको बहुत दूर छोड़ूंगा.

महादेव ने उस तेज को हाथ में धारणकर समुद्र में फेंक दिया. वहां फेंके जाते ही भगवान शिव का वह तेज तत्काल एक बालक के रूप में परिवर्तित हो गया. सिंधु से उदभव होने के कारण उसका नाम सिन्धुपुत्र जलंधर प्रसिद्ध हुआ.

जलंधर जिसका नाम शंखचूड़ भी हुआ, शिव के तेज से उत्पन्न हुआ था इस कारण परम शक्तियों से संपन्न था. वह देवों से भी ज्यादा शक्तिवान था. वह उस तेज से पैदा हुआ था जो इंद्र को समाप्त करने वाला था इसलिए असुरों ने उसे अपना राज बनाया. अवधूत रूप में यह लीला करने के बाद महादेव अंतर्धान हो गए. इंद्र के गर्व का भंजन भी हुआ भगवान के दर्शन भी हो गए.

तुलसी से जुड़ी एक कथा बहुत प्रचलित है। श्रीमद देवि भागवत पुराण में इनके अवतरण की दिव्य लीला कथा भी बनाई गई है। एक बार शिव ने अपने तेज को समुद्र में फैंक दिया था। उससे एक महातेजस्वी बालक ने जन्म लिया। यह बालक आगे चलकर जालंधर के नाम से पराक्रमी दैत्य राजा बना। इसकी राजधानी का नाम जालंधर नगरी था।

दैत्यराज कालनेमी की कन्या वृंदा का विवाह जालंधर से हुआ। जालंधर महाराक्षस था। अपनी सत्ता के मद में चूर उसने माता लक्ष्मी को पाने की कामना से युद्ध किया, परंतु समुद्र से ही उत्पन्न होने के कारण माता लक्ष्मी ने उसे अपने भाई के रूप में स्वीकार किया। वहां से पराजित होकर वह देवि पार्वती को पाने की लालसा से कैलाश पर्वत पर गया।

भगवान देवाधिदेव शिव का ही रूप धर कर माता पार्वती के समीप गया, परंतु मां ने अपने योगबल से उसे तुरंत पहचान लिया तथा वहां से अंतध्यान हो गईं।

देवि पार्वती ने क्रुद्ध होकर सारा वृतांत भगवान विष्णु को सुनाया। जालंधर की पत्नी वृंदा अत्यन्त पतिव्रता स्त्री थी। उसी के पतिव्रत धर्म की शक्ति से जालंधर न तो मारा जाता था और न ही पराजित होता था। इसीलिए जालंधर का नाश करने के लिए वृंदा के पतिव्रत धर्म को भंग करना बहुत ज़रूरी था।

इसी कारण भगवान विष्णु ऋषि का वेश धारण कर वन में जा पहुंचे, जहां वृंदा अकेली भ्रमण कर रही थीं। भगवान के साथ दो मायावी राक्षस भी थे, जिन्हें देखकर वृंदा भयभीत हो गईं। ऋषि ने वृंदा के सामने पल में दोनों को भस्म कर दिया। उनकी शक्ति देखकर वृंदा ने कैलाश पर्वत पर महादेव के साथ युद्ध कर रहे अपने पति जालंधर के बारे में पूछा।

ऋषि ने अपने माया जाल से दो वानर प्रकट किए। एक वानर के हाथ में जालंधर का सिर था तथा दूसरे के हाथ में धड़। अपने पति की यह दशा देखकर वृंदा मूर्चिछत हो कर गिर पड़ीं। होश में आने पर उन्होंने ऋषि रूपी भगवान से विनती की कि वह उसके पति को जीवित करें।

भगवान ने अपनी माया से पुन: जालंधर का सिर धड़ से जोड़ दिया, परंतु स्वयं भी वह उसी शरीर में प्रवेश कर गए। वृंदा को इस छल का ज़रा आभास न हुआ। जालंधर बने भगवान के साथ वृंदा पतिव्रता का व्यवहार करने लगी, जिससे उसका सतीत्व भंग हो गया। ऐसा होते ही वृंदा का पति जालंधर युद्ध में हार गया।

इस सारी लीला का जब वंदा को पता चला, तो उसने क्रुद्ध होकर भगवान विष्णु को शिला होने का श्राप दे दिया तथा स्वयं सति हो गईं। जहां वृंदा भस्म हुईं, वहां तुलसी का पौधा उगा। भगवान विष्णु ने वृंदा से कहा, ‘हे वृंदा। तुम अपने सतीत्व के कारण मुझे लक्ष्मी से भी अधिक प्रिय हो गई हो। अब तुम तुलसी के रूप में सदा मेरे साथ रहोगी। जो मनुष्य भी मेरे शालिग्राम रूप के साथ तुलसी का विवाह करेगा उसे इस लोक और परलोक में विपुल यश प्राप्त होगा।

जिस घर में तुलसी होती हैं, वहां यम के दूत भी असमय नहीं जा सकते। गंगा व नर्मदा के जल में स्नान तथा तुलसी का पूजन बराबर माना जाता है। चाहे मनुष्य कितना भी पापी क्यों न हो, मृत्यु के समय जिसके प्राण मंजरी रहित तुलसी और गंगा जल मुख में रखकर निकल जाते हैं, वह पापों से मुक्त होकर वैकुंठ धाम को प्राप्त होता है। जो मनुष्य तुलसी व आवलों की छाया में अपने पितरों का श्राद्ध करता है, उसके पितर मोक्ष को प्राप्त हो जाते हैं।

उसी दैत्य जालंधर की यह भूमि जलंधर नाम से विख्यात है। सती वृंदा का मंदिर मोहल्ला कोट किशनचंद में स्थित है। कहते हैं इस स्थान पर एक प्राचीन गुफ़ा थी, जो सीधी हरिद्वार तक जाती थी।”

shiv puran katha
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Shiv puran katha #7 कुबेर का अहंकार

यह एक पौराणिक कथा है। कुबेर तीनों लोकों में सबसे धनी थे। एक दिन उन्होंने सोचा कि हमारे पास इतनी संपत्ति है, लेकिन कम ही लोगों को इसकी जानकारी है। इसलिए उन्होंने अपनी संपत्ति का प्रदर्शन करने के लिए एक भव्य भोज का आयोजन करने की बात सोची। उस में तीनों लोकों के सभी देवताओं को आमंत्रित किया गया।

भगवान शिव उनके इष्ट देवता थे, इसलिए उनका आशीर्वाद लेने वह कैलाश पहुंचे और कहा, प्रभो! आज मैं तीनों लोकों में सबसे धनवान हूं, यह सब आप की कृपा का फल है। अपने निवास पर एक भोज का आयोजन करने जा रहा हूँ, कृपया आप परिवार सहित भोज में पधारने की कृपा करे।

भगवान शिव कुबेर के मन का अहंकार ताड़ गए, बोले, वत्स! मैं कहीं बाहर नहीं जाता। कुबेर गिड़गिड़ाने लगे, भगवन! आपके बगैर तो मेरा सारा आयोजन बेकार चला जाएगा। तब शिव जी ने कहा, एक उपाय है। मैं अपने छोटे बेटे गणपति को तुम्हारे भोज में जाने को कह दूंगा। कुबेर संतुष्ट होकर लौट आए। नियत समय पर कुबेर ने भव्य भोज का आयोजन किया।

तीनों लोकों के देवता पहुंच चुके थे। अंत में गणपति आए और आते ही कहा, मुझको बहुत तेज भूख लगी है। भोजन कहां है। कुबेर उन्हें ले गए भोजन से सजे कमरे में। सोने की थाली में भोजन परोसा गया। क्षण भर में ही परोसा गया सारा भोजन खत्म हो गया। दोबारा खाना परोसा गया, उसे भी खा गए। बार-बार खाना परोसा जाता और क्षण भर में गणेश जी उसे चट कर जाते।

थोड़ी ही देर में हजारों लोगों के लिए बना भोजन खत्म हो गया, लेकिन गणपति का पेट नहीं भरा। वे रसोईघर में पहुंचे और वहां रखा सारा कच्चा सामान भी खा गए, तब भी भूख नहीं मिटी। जब सब कुछ खत्म हो गया तो गणपति ने कुबेर से कहा, जब तुम्हारे पास मुझे खिलाने के लिए कुछ था ही नहीं तो तुमने मुझे न्योता क्यों दिया था? कुबेर का अहंकार चूर-चूर हो गया।”

शिव पुराण कथा #8 तपस्या का फल

भगवान शंकर को पति के रूप में पाने हेतु माता-पार्वती कठोर तपस्या कर रही थी। उनकी तपस्या पूर्णता की ओर थी। एक समय वह भगवान के चिंतन में ध्यान मग्न बैठी थी। उसी समय उन्हें एक बालक के डुबने की चीख सुनाई दी। माता तुरंत उठकर वहां पहुंची। उन्होंने देखा एक मगरमच्छ बालक को पानी के भीतर खींच रहा है।

बालक अपनी जान बचाने के लिए प्रयास कर रहा है, तथा मगरमच्छ उसे आहार बनाने का। करुणामयी मां को बालक पर दया आ गई। उन्होंने मगरमच्छ से निवेदन किया कि बालक को छोड़ दीजिए इसे आहार न बनाएं। मगरमच्छ बोला माता यह मेरा आहार है मुझे हर छठे दिन उदर पूर्ति हेतु जो पहले मिलता है, उसे मेरा आहार ब्रह्मा ने निश्चित किया है। माता ने फिर कहा आप इसे छोड़ दे इसके बदले मैं अपनी तपस्या का फल दुंगी। ग्राह ने कहा ठीक है। माता ने उसी समय संकल्प कर अपनी पूरी तपस्या का पुण्य फल उस ग्राह को दे दिया।

ग्राह तपस्या के फल को प्राप्त कर सूर्य की भांति चमक उठा। उसकी बुद्धि भी शुद्ध हो गई। उसने कहां माता आप अपना पुण्य वापस ले लें। मैं इस बालक को यू हीं छोड़ दुंगा। माता ने मना कर दिया तथा बालक को गोद में लेकर ममतामयी माता दुलारने लगी। बालक को सुरक्षित लौटाकर, माता ने अपने स्थान पर वापस आकर तप शुरु कर दिया। भगवान शिव तुरंत ही वहां प्रकट हो गए, और बोले पार्वती अब तुम्हें तप करने की आवश्यकता नहीं है। हर प्राणी में मेरा ही वास है, तुमने उस ग्राह को तप का फल दिया वह मुझे ही प्राप्त हुआ। अत: तुम्हारा तप फल अनंत गुना हो गया। तुमने करुणावश द्रवित होकर किसी प्राणी की रक्षा की अत: मैं तुम पर प्रसन्न हूं तथा तुम्हें पत्नी रूप में स्वीकार करता हूं।

कथा का सारंश यही है कि जो परहित की कामना करता है। उस पर परमात्मा की असीम कृपा होती है। जो व्यक्ति असहायों की सहायता, दयालु प्रेमी करुणाकारी होता है। ईश्वर उसको स्वीकार करते हैं। यह कथा शिवपुराण में उल्लेखित है।”

Shiv puran katha #9 अर्धनारीश्वर शिव

सृष्टि के प्रारंभ में जब ब्रह्माजी द्वारा रची गई मानसिक सृष्टि विस्तार न पा सकी, तब ब्रह्माजी को बहुत दुःख हुआ। उसी समय आकाशवाणी हुई ब्रह्मन्! अब मैथुनी सृष्टि करो। आकाशवाणी सुनकर ब्रह्माजी ने मैथुनी सृष्टि रचने का निश्चय तो कर लिया, किंतु उस समय तक नारियों की उत्पत्ति न होने के कारण वे अपने निश्चय में सफल नहीं हो सके।

तब ब्रह्माजी ने सोचा कि परमेश्वर शिव की कृपा के बिना मैथुनी सृष्टि नहीं हो सकती। अतः वे उन्हें प्रसन्न करने के लिए कठोर तप करने लगे। बहुत दिनों तक ब्रह्माजी अपने हृदय में प्रेमपूर्वक महेश्वर शिव का ध्यान करते रहे। उनके तीव्र तप से प्रसन्न होकर भगवान उमा-महेश्वर ने उन्हें अर्द्धनारीश्वर रूप में दर्शन दिया।

महेश्वर शिव ने कहा- पुत्र ब्रह्मा, तुमने प्रजाओं की वृद्धि के लिए जो कठिन तप किया है, उससे मैं परम प्रसन्न हूं। मैं तुम्हारी इच्छा अवश्य पूरी करूंगा। ऐसा कहकर शिवजी ने अपने शरीर के आधे भाग से उमा देवी को अलग कर दिया। ब्रह्मा ने कहा.-एक उचित सृष्टि निर्मित करने में अब तक मैं असफल रहा हूं। मैं अब स्त्री-पुरुष के समागम से मैं प्रजाओं को उत्पन्न कर सृष्टि का विस्तार करना चाहता हूं। परमेश्वरी शिवा ने अपनी भौंहों के मध्य भाग से अपने ही समान कांतिमती एक शक्ति प्रकट की। सृष्टि निर्माण के लिए शिव की वह शक्ति ब्रह्माजी की प्रार्थना के अनुसार दक्षकी पुत्री हो गई।

इस प्रकार ब्रह्माजी को उपकृत कर तथा अनुपम शक्ति देकर देवी शिवा महादेव जी के शरीर में प्रविष्ट हो गईं, यही अर्द्धनारीश्वर शिव का रहस्य है और इसी से आगे सृष्टि का संचालन हो पाया, जिसके नियामक शिवशक्ति ही हैं।”

Shiv puran katha #10 समुन्द्र मंथन

एक बार की बात है शिवजी के दर्शनों के लिए दुर्वासा ऋषि अपने शिष्यों के साथ कैलाश जा रहे थे। मार्ग में उन्हें देवराज इन्द्र मिले। इन्द्र ने दुर्वासा ऋषि और उनके शिष्यों को भक्तिपूर्वक प्रणाम किया। तब दुर्वासा ने इन्द्र को आशीर्वाद देकर विष्णु भगवान का पारिजात पुष्प प्रदान किया। इन्द्रासन के गर्व में चूर इन्द्र ने उस पुष्प को अपने ऐरावत हाथी के मस्तक पर रख दिया। उस पुष्प का स्पर्श होते ही ऐरावत सहसा विष्णु भगवान के समान तेजस्वी हो गया। उसने इन्द्र का परित्याग कर दिया और उस दिव्य पुष्प को कुचलते हुए वन की ओर चला गया।

इन्द्र द्वारा भगवान विष्णु के पुष्प का तिरस्कार होते देखकर दुर्वाषा ऋषि के क्रोध की सीमा न रही। उन्होंने देवराज इन्द्र को श्री (लक्ष्मी) से हीन हो जाने का शाप दे दिया। दुर्वासा मुनि के शाप के फलस्वरूप लक्ष्मी उसी क्षण स्वर्गलोक को छोड़कर अदृश्य हो गईं। लक्ष्मी के चले जाने से इन्द्र आदि देवता निर्बल और श्रीहीन हो गए। उनका वैभव लुप्त हो गया। इन्द्र को बलहीन जानकर दैत्यों ने स्वर्ग पर आक्रमण कर दिया और देवगण को पराजित करके स्वर्ग के राज्य पर अपनी परचम फहरा दिया।

तब इन्द्र देवगुरु बृहस्पति और अन्य देवताओं के साथ ब्रह्माजी की सभा में उपस्थित हुए।

तब ब्रह्माजी बोले — देवेन्द्र , भगवान विष्णु के भोगरूपी पुष्प का अपमान करने के कारण रुष्ट होकर भगवती लक्ष्मी तुम्हारे पास से चली गयी हैं। उन्हें पुनः प्रसन्न करने के लिए तुम भगवान नारायण की कृपा-दृष्टि प्राप्त करो। उनके आशीर्वाद से तुम्हें खोया वैभव पुनः मिल जाएगा।

इस प्रकार ब्रह्माजी ने इन्द्र को आस्वस्त किया और उन्हें लेकर भगवान विष्णु की शरण में पहुँचे। वहाँ परब्रह्म भगवान विष्णु भगवती लक्ष्मी के साथ विराजमान थे। देवगण भगवान विष्णु की स्तुति करते हुए बोले— भगवान् , आपके श्रीचरणों में हमारा बारम्बार प्रणाम। भगवान् हम सब जिस उद्देश्य से आपकी शरण में आए हैं, कृपा करके आप उसे पूरा कीजिए। दुर्वाषा ऋषि के शाप के कारण माता लक्ष्मी हमसे रूठ गई हैं और दैत्यों ने हमें पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया है। अब हम आपकी शरण में हैं, हमारी रक्षा कीजिए।

भगवान विष्णु त्रिकालदर्शी हैं। वे पल भर में ही देवताओं के मन की बात जान गए। तब वे देवगण से बोले— देवगण ! मेरी बात ध्यानपूर्वक सुनें, क्योंकि केवल यही तुम्हारे कल्याण का उपाय है। दैत्यों पर इस समय काल की विशेष कृपा है इसलिए जब तक तुम्हारे उत्कर्ष और दैत्यों के पतन का समय नहीं आता, तब तक तुम उनसे संधि कर लो।

क्षीरसागर के गर्भ में अनेक दिव्य पदार्थों के साथ-साथ अमृत भी छिपा है। उसे पीने वाले के सामने मृत्यु भी पराजित हो जाती है। इसके लिए तुम्हें समुद्र मंथन करना होगा। यह कार्य अत्यंत दुष्कर है, अतः इस कार्य में दैत्यों से सहायता लो। कूटनीति भी यही कहती है कि आवश्यकता पड़ने पर शत्रुओं को भी मित्र बना लेना चाहिए। तत्पश्चात अमृत पीकर अमर हो जाओ। तब दुष्ट दैत्य भी तुम्हारा अहित नहीं कर सकेंगे।

देवगण वे जो शर्त रखें, उसे स्वाकीर कर लें। यह बात याद रखें कि शांति से सभी कार्य बन जाते हैं, क्रोध करने से कुछ नहीं होता। भगवान विष्णु के परामर्श के अनुसार इन्द्रादि देवगण दैत्यराज बलि के पास संधि का प्रस्ताव लेकर गए और उन्हें अमृत के बारे में बताकर समुद्र मंथन के लिए तैयार कर लिया।

समुद्र मंथन के लिए समुद्र में मंदराचल को स्थापित कर वासुकि नाग को रस्सी बनाया गया। तत्पश्चात दोनों पक्ष अमृत-प्राप्ति के लिए समुद्र मंथन करने लगे। अमृत पाने की इच्छा से सभी बड़े जोश और वेग से मंथन कर रहे थे। सहसा तभी समुद्र में से कालकूट नामक भयंकर विष निकला। उस विष की अग्नि से दसों दिशाएँ जलने लगीं। समस्त प्राणियों में हाहाकार मच गया।

उस विष की ज्वाला से सभी देवता तथा दैत्य जलने लगे और उनकी कान्ति फीकी पड़ने लगी। इस पर सभी ने मिलकर भगवान शंकर की प्रार्थना की। उनकी प्रार्थना पर महादेव जी उस विष को हथेली पर रख कर उसे पी गये किन्तु उसे कण्ठ से नीचे नहीं उतरने दिया।

उस कालकूट विष के प्रभाव से शिव जी का कण्ठ नीला पड़ गया। इसीलिये महादेव जी को नीलकण्ठ कहते हैं। उनकी हथेली से थोड़ा सा विष पृथ्वी पर टपक गया था जिसे साँप, बिच्छू आदि विषैले जन्तुओं ने ग्रहण कर लिया।

विष को शंकर भगवान के द्वारा पान कर लेने के पश्चात् फिर से समुद्र मंथन प्रारम्भ हुआ। दूसरा रत्न कामधेनु गाय निकली जिसे ऋषियों ने रख लिया।

फिर उच्चैश्रवा घोड़ा निकला जिसे दैत्यराज बलि ने रख लिया। उसके बाद ऐरावत हाथी निकला जिसे देवराज इन्द्र ने ग्रहण किया।

ऐरावत के पश्चात् कौस्तुभमणि समुद्र से निकली उसे विष्णु भगवान ने रख लिया। फिर कल्पद्रुम निकला और रम्भा नामक अप्सरा निकली। इन दोनों को देवलोक में रख लिया गया।

आगे फिर समु्द्र को मथने से लक्ष्मी जी निकलीं। लक्ष्मी जी ने स्वयं ही भगवान विष्णु को वर लिया। उसके बाद कन्या के रूप में वारुणी प्रकट हई जिसे दैत्यों ने ग्रहण किया। फिर एक के पश्चात एक चन्द्रमा, पारिजात वृक्ष तथा शंख निकले और अन्त में धन्वन्तरि वैद्य अमृत का घट लेकर प्रकट हुये।”

शिव पुराण कथा #11 गंगा को जटाओं में बांध लिया शिव ने

रघुवंश में भगवान राम के पूर्वज भागीरथ एक प्रतापी राजा थे। उन्होंने अपने पूर्वजों को जीवन-मरण के दोष से मुक्त करने के लिए गंगा को पृथ्वी पर लाने की ठानी। उन्होंने कठोर तपस्या आरम्भ की। गंगा उनकी तपस्या से प्रसन्न हुईं तथा स्वर्ग से पृथ्वी पर आने के लिए तैयार हो गईं। पर उन्होंने भागीरथ से कहा कि यदि वे सीधे स्वर्ग से पृथ्वी पर गिरेंगीं तो पृथ्वी उनका वेग सहन नहीं कर पाएगी और रसातल में चली जाएगी।

यह सुनकर भागीरथ सोच में पड़ गए। गंगा को यह अभिमान था कि कोई उसका वेग सहन नहीं कर सकता। तब उन्होंने भगवान भोलेनाथ की उपासना शुरू कर दी। शिव ने गंगा का गर्व दूर करने के लिए, संसार के दुखों को हरने वाले शिव शम्भू प्रसन्न हुए और भागीरथ से वर मांगने को कहा। भागीरथ ने अपना सब मनोरथ उनसे कह दिया। गंगा जैसे ही स्वर्ग से पृथ्वी पर उतरने लगीं शिव ने उन्हें जटाओं में कैद कर लिया। वह छटपटाने लगी और शिव से माफी मांगी। तब शिव ने उसे जटा से एक छोटे से पोखर में छोड़ दिया, जहां से गंगा सात धाराओं में प्रवाहित हुईं।”

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ये 20 कहानियाँ आपको जिंदगी में सफल बना सकती है || 20 Best Motivational Story in Hindi

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ये 20 कहानियाँ आपको जिंदगी में सफल बना सकती है || 20 Best Motivational Story Hindi

Motivational Story in Hindi-आज की इस पोस्ट में मैंने आपके साथ कुछ प्रेरक कहानियाँ साझा की है ये सब कहानियाँ हिंदी मोटिवेशनल स्टोरीज पर आधारित है मैंने आपके साथ 20 प्रेरणादायक कहानियाँ साझा की है तथा बीच में मोटिवेशनल वीडियोस वह प्रेरक कौटस भी साझा किये है ताकि आपको बोरियत महसूस न हो।

Motivational Story In Hindi #1 बोले हुए शब्द वापस नहीं आते

Motivational Story In Hindi #1 बोले हुए शब्द वापस नहीं आते
Motivational Story In Hindi #1 बोले हुए शब्द वापस नहीं आते

एक बार एक किसान ने अपने पडोसी को भला बुरा कह दिया , पर जब बाद में उसे अपनी गलती का एहसास हुआ तो वह एक संत के पास गया.उसने संत से अपने शब्द वापस लेने का उपाय पूछा .
संत ने किसान से कहा , ” तुम खूब सारे पंख इकठ्ठा कर लो , और उन्हें शहर के बीचो – बीच जाकर रख दो . ” किसान ने ऐसा ही किया और फिर संत के पास पहुंच गया . तब संत ने कहा , ” अब जाओ और उन पंखों को इकठ्ठा कर के वापस ले आओ ” किसान वापस गया पर तब तक सारे पंख हवा से इधर – उधर उड़ चुके थे . और किसान खाली हाथ संत के पास पहुंचा . तब संत ने उससे कहा कि ठीक ऐसा ही तुम्हारे द्वारा कहे गए शब्दों के साथ होता है , तुम आसानी से इन्हें अपने मुख से निकाल तो सकते हो पर चाह कर भी वापस नहीं ले सकते .

Motivational Story In Hindi #2 मुट्ठी भर मेढक

Motivational Story In Hindi #2 मुट्ठी भर मेढक
Motivational Story In Hindi #2 मुट्ठी भर मेढक

life story in hindi – बहुत समय पहले की बात है किसी गाँव में मोहन नाम का एक किसान रहता था . वह बड़ा मेहनती और ईमानदार था . अपने अच्छे व्यवहार के कारण दूर -दूर तक उसे लोग उसे जानते थे और उसकी प्रशंशा करते थे . पर एक दिन जब देर शाम वह खेतों से काम कर लौट रहा था तभी रास्ते में उसने कुछ लोगों को बाते करते सुना , वे उसी के बारे में बात कर रहे थे . मोहन अपनी प्रशंशा सुनने के लिए उन्हें बिना बताये धीरे -धीरे उनके पीछे चलने लगा , पर उसने उनकी बात सुनी तो पाया कि वे उसकी बुराई कर रहे थे , कोई कह रहा था कि , “ मोहन घमण्डी है . ” , तो कोई कह रहा था कि , सब जानते हैं वो अच्छा होने का दिखावा करता है ” ” मोहन ने इससे पहले सिर्फ अपनी प्रशंशा सुनी थी पर इस घटना का उसके दिमाग पर बहुत बुरा असर पड़ा और अब वह जब भी कुछ लोगों को बाते करते देखता तो उसे लगता वे उसकी बुराई कर रहे हैं . यहाँ तक कि अगर कोई उसकी तारीफ़ करता तो भी उसे लगता कि उसका मजाक उड़ाया जा रहा है . धीरे -धीरे सभी ये महसूस करने लगे कि मोहन बदल गया है , और उसकी पत्नी भी अपने पति के व्यवहार में आये बदलाव से दुखी रहने लगी और एक दिन उसने पूछा , ” आज -कल आप इतने परेशान क्यों रहते हैं कृपया मुझे इसका कारण बताइये . “

मोहन ने उदास होते हुए उस दिन की बात बता दी . पत्नी को भी समझ नहीं आया कि क्या किया जाए पर तभी उसे ध्यान आया कि पास के ही एक गाँव में एक सिद्ध महात्मा आये हुए हैं , और वो बोली , स्वामी , मुझे पता चला है कि पड़ोस के गाँव में एक पहुंचे हुए संत आये हैं ।चलिये हम उनसे कोई समाधान पूछते हैं . ” // अगले दिन वे महात्मा जी के शिविर में पहुंचे . मोहन ने सारी घटना बतायी और बोला , महाराज उस दिन के बाद से सभी मेरी बुराई और झूठी प्रशंशा करते हैं , कृपया मुझे बताइये कि मैं वापस अपनी साख कैसे बना सकता हूँ ! ! ” महात्मा मोहन कि समस्या समझ चुके थे . 11 पुत्र तुम अपनी पत्नी को घर छोड़ आओ और आज रात मेरे शिविर में ठहरो . ” , महात्मा कुछ सोचते हुए बोले . मोहन ने ऐसा ही किया , पर जब रात में सोने का समय हुआ तो अचानक ही मेढ़कों के टर्र -टर्र की आवाज आने लगी . मोहन बोला , ” ये क्या महाराज यहाँ इतना कोलाहल क्यों है ? ” ” पुत्र , पीछे एक तालाब है , रात के वक़्त उसमे मौजूद मेढक अपना राग अलापने लगते हैं !!! ” ” पर ऐसे में तो कोई यहाँ सो नहीं सकता ?? , ” मोहान ने चिंता जताई ।

” हाँ बेटा , पर तुम ही बताओ हम क्या कर सकते हैं , हो सके तो तुम हमारी मदद करो ” , महात्मा जी बोले . // मोहन बोला , ठीक है महाराज , इतना शोर सुनके लगता है इन मेढकों की संख्या हज़ारों में होगी , मैं कल ही गांव से पचास -साठ मजदूरों को लेकर आता हूँ और इन्हे पकड़ कर दूर नदी में छोड़ आता हूँ . ” और अगले दिन मोहन सुबह -सुबह मजदूरों के साथ वहाँ पंहुचा , महात्मा जी भी वहीं खड़े सब कुछ देख रहे थे . तालाब जयादा बड़ा नहीं था , 8-10 मजदूरों ने चारों और से जाल डाला और मेढ़कों को पकड़ने लगे …

थोड़ी देर की ही मेहनत में सारे मेढक पकड़ लिए गए . जब मोहन ने देखा कि कुल मिला कर 50-60 ही मेढक पकडे गए हैं तब उसने माहत्मा जी से पूछा , ” महाराज , कल रात तो इसमें हज़ारों मेढक थे , भला आज वे सब कहाँ चले गए , यहाँ तो बस मुट्ठी भर मेढक ही बचे हैं . ” महात्मा जी गम्भीर होते हुए बोले , “ कोई मेढक कहीं नहीं गया , तुमने कल इन्ही मेढ़कों की आवाज सुनी थी , ये मुट्ठी भर मेढक ही इतना शोर कर रहे थे कि तुम्हे लगा हज़ारों मेढक टर्र -टर्र कर रहे हों . पुत्र , इसी प्रकार जब तुमने कुछ लोगों को अपनी बुराई करते सुना तो भी तुम यही गलती कर बैठे , तुम्हे लगा कि हर कोई तुम्हारी बुराई करता है पर सच्चाई ये है कि बुराई करने वाले लोग मुठ्ठी भर मेढक के सामान ही थे .

इसलिए अगली बार किसी को अपनी बुराई करते सुनना तो इतना याद रखना कि हो सकता है ये कुछ ही लोग हों जो ऐसा कर रहे हों , और इस बात को भी समझना कि भले तुम कितने ही अच्छे क्यों न हो ऐसे कुछ लोग होंगे ही होंगे जो तुम्हारी बुराई करेंगे । ” अब मोहन को अपनी गलती का अहसास हो चुका था , वह पुनः पुराना वाला मोहन बन चुका था . Friends , मोहन की तरह हमें भी कुछ लोगों के व्यवहार को हर किसी का व्यवहार नहीं समझ लेना चाहिए और positive frame of mind से अपनी ज़िन्दगी जीनी चाहिए । हम कुछ भी कर लें पर life में कभी ना कभी ऐसी समस्या आ ही जाती है जो रात के अंधेरे में ऐसी लगती है मानो हज़ारों मेढक कान में टर्र – टर्र कर रहे हों । पर जब दिन के उजाले में हम उसका समाधान करने का प्रयास करते हैं तो वही समस्या छोटी लगने लगती है . इसलिए हमें ऐसी situations में घबराने की बजाये उसका solution खोजने का प्रयास करना चाहिए और कभी मुट्ठी भर मेढकों से घबराना नहीं चाहिए .

 

Motivational Story In Hindi #3 संगती का असर

Motivational Story In Hindi #3 संगती का असर
Motivational Story In Hindi #3 संगती का असर

एक बार एक राजा शिकार के उद्देश्य से अपने काफिले के साथ किसी जंगल से गुजर रहा था | दूर दूर तक शिकार नजर नहीं आ रहा था , वे धीरे धीरे घनघोर जंगल में प्रवेश करते गए | अभी कुछ ही दूर गए थे की उन्हें कुछ डाकुओं के छिपने की जगह दिखाई दी | जैसे ही वे उसके पास पहुचें कि पास के पेड़ पर बैठा तोता बोल पड़ा पकड़ो पकड़ो एक राजा आ रहा है इसके पास बहुत सारा सामान है लूटो लूटो जल्दी आओ जल्दी आओ | ” 1 तोते की आवाज सुनकर सभी डाकू राजा की और दौड़ पड़े | डाकुओ को अपनी और आते देख कर राजा और उसके सैनिक दौड़ कर भाग खड़े हुए | भागते – भागते कोसो दूर निकल गए | सामने एक बड़ा सा पेड़ दिखाई दिया | कुछ देर सुस्ताने के लिए उस पेड़ के पास चले गए , जैसे ही पेड़ के पास पहुचे कि उस पेड़ पर बैठा तोता बोल पड़ा – आओ राजन हमारे साधू महात्मा की कुटी में आपका स्वागत है |

अन्दर आइये पानी पीजिये और विश्राम कर लीजिये | तोते की इस बात को सुनकर राजा हैरत में पड़ गया , और सोचने लगा की एक ही जाति के दो प्राणियों का व्यवहार इतना अलग – अलग कैसे हो सकता है | राजा को कुछ समझ नहीं आ रहा था | वह तोते की बात मानकर अन्दर साधू की कुटिया की ओर चला गया , साधू महात्मा को प्रणाम कर उनके समीप बैठ गया और अपनी सारी कहानी सुनाई | और फिर धीरे से पूछा , ” ऋषिवर इन दोनों तोतों के व्यवहार में आखिर इतना अंतर क्यों है । “

ये कुछ साधू महात्मा धैर्य से सारी बातें सुनी और बोले , ” नहीं राजन बस संगति का असर है | डाकुओं के साथ रहकर तोता भी डाकुओं की तरह व्यवहार करने लगा है और उनकी ही भाषा बोलने लगा है | अर्थात जो जिस वातावरण में रहता है वह वैसा ही बन जाता है कहने का तात्पर्य यह है कि मूर्ख भी विद्वानों के साथ रहकर विद्वान बन जाता है और अगर विद्वान भी मूों के संगत में रहता है तो उसके अन्दर भी मूर्खता आ जाती है | इसिलिय हमें संगती सोच समझ कर करनी चाहिए |

 

Motivation Story In Hindi #4 इंसानी जज़बे की सच्ची कहानी

Motivation Story In Hindi #4 इंसानी जज़बे की सच्ची कहानी
Motivation Story In Hindi #4 इंसानी जज़बे की सच्ची कहानी

time motivational story in hindi– ये एक लड़की की real life कहानी है जो हमें कठिन से कठिन परिस्थितियों के बावजूद जीवन को सकारात्मक तरीके से जीने और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की प्रेरणा देती है . 25 सितम्बर , 2000 की बात है . तब Maricel Apatan ( मैरिकेल ऐप्टैन ) महज 11 साल की थी . उस दिन वो अपने अंकल के साथ पानी लाने के लिए बाहर निकली हुई थी . रास्ते में उन्हें चार -पांच लोगों ने घेर लिया , उनके हाथों में धारदार हथियार थे . उन्होंने अंकल से जमीन पर झुक जाने के लिए कहा और उन्हें बेहरहमी से मारने लगे .

ये देख Marice | सदमें में आ गयीं , वो उन लोगों को जानती थी , वे उसके पडोसी थे . उसे लगा कि अब उसकी जान भी नहीं बचेगी और वो उनसे बच कर भागने लगी . पर वो छोटी थी और हत्यारे आसानी से उसतक पहुँच गए … वो चिल्लाने लगी ” कुया , ‘ वाग पो , ‘ वाग न ‘ यो एकांग टैगईन ! मावा पो कायो सा एकिन ! ” ( मुझे मत मारो … मुझ पर दया करो … ) पर उन दरिंदो ने उसकी एक ना सुनी , और उनमे से एक ने गले पर चाकू से वार कीया । Maricel जमीन पर गिरकर बेहोश हो गयी .जब थोड़ी देर बाद उसे होश आया तो उसने देखा कि वहाँ खून ही खून था और वे लोग अभी भी वहीं खड़े थे , इसलिए उसने बिना किसी हरकत के मरे होने का नाटक किया .

जब वे लोग चले गए तब वो उठी और घर की और दौड़ने लगी …. भागते -भागते ही उसने देखा कि उसकी दोनों हथेलियां हाथ से जुडी लटक रही हैं . यह देख Maricel और भी घबरा गयी , और रोते – रोते भागती रही . जब वो अपने घर के करीब पहुँच गयी तब अपनी माँ को C आवाज़ दी … …. माँ बाहर आयीं और अपनी बेटी की ये हालत देख भयभीत हो गयीं , उन्होंने बेटी को तुरंत एक कम्बल में लपेटा और हॉस्पिटल ले गयीं . हॉस्पिटल दूर था , पहुँचते -पहुँचते काफी वक़्त बीत गया . डॉक्टर्स को कोई उम्मीद नहीं थी कि वे Maricel को बचा पाएंगे पर 5 घंटे के ऑपरेशन के बाद भी वो ज़िंदा थी . पर डॉक्टर्स उसका हाथ नहीं बचा पाये थे .

परेशानियां यहीं नहीं ख़त्म हुईं , जब वे वापस गए तो उनका घर लूट कर जलाया जा चुका था . गरीब होने के कारण उनके पास हॉस्पिटल का बिल भरने के पैसे भी नहीं थे … पर दूर के एक रिश्तेदार आर्चबिशप अंटोनिओ लेडेसमा की मदद से वे बिल भर पाये और अपराधियों को सजा भी दिलवा पाये .. इतना कुछ हो जाने के बाद भी Maricel ने कभी भगवन को नहीं कोसा कि उसके साथ ही ऐसा क्यों हुआ , बल्कि उसका कहना है कि , “ ईश्वर में विश्वाश रखते हुए , मैं और भी दृढ निश्चियी हो गयी कि मुझे एक सामान्य जीवन जीना है . मुझे लगता है कि मैं दुनिया में किसी ज़रूरी मिशन के लिए हूँ इसीलिए मैं इस हमले से बच पायी हूँ . “

Maricel ने हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी की और 2008 में होटल मैनेजमेंट का कोर्स भी पूरा किया . और बचपन से खाना बनाने के शौक के कारण 2011 में शेफ बनने की शिक्षा पूरी की . + Maricel Apatan Hindi 2 इतनी बड़ी डिसेबिलिटी के बावजूद जीवन में आगे जाने के जज़बे को आस -पास के लोग नज़रअंदाज नहीं कर सकते थे , और जल्द ही Maricel को मीडिया हाईलाइट करने लगा . ऐसे ही एक कार्यक्रम को देख कर होटल एडसा शांग्री -ला , Manila , Philippines ने उसे अपने यहाँ किसी प्रोजेक्ट पर काम करने का मौका दिया . Maricel के साथ काम करने वाले शेफ अल्ज़ामिल बोर्जा बताते हैं , ” वो मदद के लिए सिर्फ तभी पुकारती हैं जब उन्हें कोई गरम पात्र हटाना होता है या किसी शीशी का चिकना ढक्कन खोलना होता है .

” Maricel आज भी उसी होटल में बतौर शेफ काम करती हैं और अपने जज़बे के दम पर लाखो -करोड़ों लोगो को प्रेरित करती रहती हैं .Maricel Apatan Hindi 3 Friends , अक्सर हम अपनी life में आने वाली छोटी -मोटी परेशानियों से घबरा जाते हैं और अपना विश्वास कमजोर कर बैठते हैं , पर आज की ये कहानी बताती है कि situation कितनी ही खराब क्यों न हो हम उसे बदल सकते हैं । Maricel की कही एक बात हमें याद रखनी चाहिए- , ” यदि आप सपने देखें , कड़ी मेहनत करें और ईश्वर में आस्था रखें तो कुछ भी सम्भव है ।

 

Motivational Story In Hindi #5 बड़ा सोचो

Motivational Story In Hindi #5 बड़ा सोचो
Motivational Story In Hindi #5 बड़ा सोचो

अत्यंत गरीब परिवार का एक बेरोजगार युवक नौकरी की तलाश में किसी दूसरे शहर जाने के लिए रेलगाड़ी से सफ़र कर रहा था | घर में कभी – कभार ही सब्जी बनती थी , इसलिए उसने रास्ते में खाने के लिए सिर्फ रोटीयां ही रखी थी | आधा रास्ता गुजर जाने के बाद उसे भूख लगने लगी , और वह टिफिन में से रोटीयां निकाल कर खाने लगा | उसके खाने का तरीका कुछ अजीब था , वह रोटी का एक टुकड़ा लेता और उसे टिफिन के अन्दर कुछ ऐसे डालता मानो रोटी के साथ कुछ और भी खा रहा हो , जबकि उसके पास तो सिर्फ रोटीयां थीं !! उसकी इस हरकत को आस पास के और दूसरे यात्री देख कर हैरान हो रहे थे | वह युवक हर बार रोटी का एक टुकड़ा लेता और झूठमूठ का टिफिन में डालता और खाता | सभी सोच रहे थे कि आखिर वह युवक ऐसा क्यों कर रहा था | आखिरकार एक व्यक्ति से रहा नहीं गया और उसने उससे पूछ ही लिया की भैया तुम ऐसा क्यों कर रहे हो , तुम्हारे पास सब्जी तो है ही नहीं फिर रोटी के टुकड़े को हर बार खाली टिफिन में डालकर ऐसे खा रहे हो मानो उसमे सब्जी हो | तब उस युवक ने जवाब दिया , ” भैया , इस खाली ढक्कन में सब्जी नहीं है लेकिन मै अपने मन में यह सोच कर खा रहा हू की इसमें बहुत सारा आचार है , मै आचार के साथ रोटी खा रहा हू | ” फिर व्यक्ति ने पूछा , “ खाली ढक्कन में आचार सोच कर सूखी रोटी को खा रहे हो तो क्या तुम्हे आचार का स्वाद आ रहा है ? “
” हाँ , बिलकुल आ रहा है , मै रोटी के साथ अचार सोचकर खा रहा हूँ और मुझे बहुत अच्छा भी लग रहा है | ” , युवक ने जवाब दिया उसके इस बात को आसपास के यात्रियों ने भी सुना , और उन्ही में से एक व्यक्ति बोला , ” जब सोचना ही था तो तुम आचार की जगह पर मटर – पनीर सोचते , शाही गोभी सोचते …. तुम्हे इनका स्वाद मिल जाता | तुम्हारे कहने के मुताबिक तुमने आचार सोचा तो आचार का स्वाद आया तो और स्वादिष्ट चीजों के बारे में सोचते तो उनका स्वाद आता | सोचना ही था तो भला छोटा क्यों सोचे तुम्हे तो बड़ा सोचना चाहिए था।

 

 

Motivation Story In Hindi #6 लालच बुरी बला है |

Motivation Story In Hindi #6 लालच बुरी बला है |
Motivation Story In Hindi #6 लालच बुरी बला है |

एक शहर में एक आदमी रहता था। वह बहुत ही लालची था। उसने सुन रखा था की अगर संतो और साधुओं की सेवा करे तो बहुत ज्यादा धन प्राप्त होता है। यह सोच कर उसने साधू-संतो की सेवा करनी प्रारम्भ कर दी। एक बार उसके घर बड़े ही चमत्कारी संत आये।

उन्होंने उसकी सेवा से प्रसन्न होकर उसे चार दीये दिए और कहा,”इनमे से एक दीया जला लेना और पूरब दिशा की ओर चले जाना जहाँ यह दीया बुझ जाये, वहा की जमीन को खोद लेना, वहा तुम्हे काफी धन मिल जायेगा। अगर फिर तुम्हे धन की आवश्यकता पड़े तो दूसरा दीया जला लेना और पक्षिम दिशा की ओर चले जाना, जहाँ यह दीया बुझ जाये, वहा की जमीन खोद लेना तुम्हे मन चाही माया मिलेगी। फिर भी संतुष्टि ना हो तो तीसरा दीया जला लेना और दक्षिण दिशा की ओर चले जाना। उसी प्रकार दीया बुझने पर जब तुम वहाँ की जमीन खोदोगे तो तुम्हे बेअन्त धन मिलेगा। तब तुम्हारे पास केवल एक दीया बच जायेगा और एक ही दिशा रह जायेगी। तुमने यह दीया ना ही जलाना है और ना ही इसे उत्तर दिशा की ओर ले जाना है।”

यह कह कर संत चले गए। लालची आदमी उसी वक्त पहला दीया जला कर पूरब दिशा की ओर चला गया। दूर जंगल में जाकर दीया बुझ गया। उस आदमी ने उस जगह को खोदा तो उसे पैसो से भरी एक गागर मिली। वह बहुत खुश हुआ। उसने सोचा की इस गागर को फिलहाल यही रहने देता हूँ, फिर कभी ले जाऊंगा। पहले मुझे जल्दी ही पक्षिम दिशा वाला धन देख लेना चाहिए। यह सोच कर उसने दुसरे दिन दूसरा दीया जलाया और पक्षिम दिशा की ओर चल पड़ा। दूर एक उजाड़ स्थान में जाकर दीया बुझ गया। वहा उस आदमी ने जब जमीन खोदी तो उसे सोने की मोहरों से भरा एक घड़ा मिला। उसने घड़े को भी यही सोचकर वही रहने दिया की पहले दक्षिण दिशा में जाकर देख लेना चाहिए। जल्दी से जल्दी ज्यादा से ज्यादा धन प्राप्त करने के लिए वह बेचैन हो गया।

अगले दिन वह दक्षिण दिशा की ओर चल पड़ा। दीया एक मैदान में जाकर बुझ गया। उसने वहा की जमीन खोदी तो उसे हीरे-मोतियों से भरी दो पेटिया मिली। वह आदमी अब बहुत खुश था।

तब वह सोचने लगा अगर इन तीनो दिशाओ में इतना धन पड़ा है तो चौथी दिशा में इनसे भी ज्यादा धन होगा। फिर उसके मन में ख्याल आया की संत ने उसे चौथी दिशा की ओर जाने के लिए मन किया है। दुसरे ही पल उसके मन ने कहा,” हो सकता है उत्तर दिशा की दौलत संत अपने लिए रखना चाहते हो। मुझे जल्दी से जल्दी उस पर भी कब्ज़ा कर लेना चाहिए।” ज्यादा से ज्यादा धन प्राप्त करने की लालच ने उसे संतो के वचनों को दुबारा सोचने ही नहीं दिया।

अगले दिन उसने चौथा दीया जलाया और जल्दी-जल्दी उत्तर दिशा की ओर चल पड़ा। दूर आगे एक महल के पास जाकर दीया बुझ गया। महल का दरवाज़ा बंद था। उसने दरवाज़े को धकेला तो दरवाज़ा खुल गया। वह बहुत खुश हुआ। उसने मन ही मन में सोचा की यह महल उसके लिए ही है। वह अब तीनो दिशाओ की दौलत को भी यही ले आकर रखेगा और ऐश करेगा।

वह आदमी महल के एक-एक कमरे में गया। कोई कमरा हीरे-मोतियों से भरा हुआ था। किसी कमरे में सोने के किमती से किमती आभूषण भरे पड़े थे। इसी प्रकार अन्य कमरे भी बेअन्त धन से भरे हुए थे। वह आदमी चकाचौंध होता जाता और अपने भाग्य को शाबासी देता। वह जरा और आगे बढ़ा तो उसे एक कमरे में चक्की चलने की आवाज़ सुनाई दी। वह उस कमरे में दाखिल हुआ तो उसने देखा की एक बूढ़ा आदमी चक्की चला रहा है। लालची आदमी ने बूढ़े से कहा की तू यहाँ कैसे पंहुचा। बूढ़े ने कहा,”ऐसा कर यह जरा चक्की चला, मैं सांस लेकर तुझे बताता हूँ।”

लालची आदमी ने चक्की चलानी प्रारम्भ कर दी। बूढ़ा चक्की से हट जाने पर ऊँची-ऊँची हँसने लगा। लालची आदमी उसकी ओर हैरानी से देखने लगा। वह चक्की बंद ही करने लगा था की बूढ़े ने खबरदार करते हुए कहा, “ना ना चक्की चलानी बंद ना कर।” फिर बूढ़े ने कहा,”यह महल अब तेरा है। परन्तु यह उतनी देर तक खड़ा रहेगा जितनी देर तक तू चक्की चलाता रहेगा। अगर चक्की चक्की चलनी बंद हो गयी तो महल गिर जायेगा और तू भी इसके निचे दब कर मर जायेगा।” कुछ समय रुक कर बूढ़ा फिर कहने लगा,”मैंने भी तेरी ही तरह लालच करके संतो की बात नहीं मानी थी और मेरी सारी जवानी इस चक्की को चलाते हुए बीत गयी।”

वह लालची आदमी बूढ़े की बात सुन कर रोने लग पड़ा। फिर कहने लगा,”अब मेरा इस चक्की से छुटकारा कैसे होगा?”

बूढ़े ने कहा,”जब तक मेरे और तेरे जैसा कोई आदमी लालच में अंधा होकर यहाँ नही आयेगा। तब तक तू इस चक्की से छुटकारा नहीं पा सकेगा।” तब उस लालची आदमी ने बूढ़े से आखरी सवाल पूछा,”तू अब बाहर जाकर क्या करेगा?”

बूढ़े ने कहा,”मैं सब लोगो से ऊँची-ऊँची कहूँगा, लालच बुरी बला है।”

 

Motivational Story In Hindi #7 सबसे बड़ी चीज |


motivational story in hindi pdf– एक दिन बीरबल दरबार में उपस्थित नहीं थे। ऐसे में बीरबल से जलने वाले सभी सभासद बीरबल के खिलाफ बादशाह अकबर के कान भर रहे थे। अक्सर ऐसा ही होता था, जब भी बीरबल दरबार में उपस्थित नहीं होते थे, तभी दरबारियों को मौका मिल जाता था। आज भी ऐसा ही मौका था।

बादशाह के साले मुल्ला दो प्याजा की शह पाए कुछ सभासदों ने कहा -‘जहांपनाह! आप वास्तव में बीरबल को आवश्यकता से अधिक मान देते हैं, हम लोगों से ज्यादा उन्हें चाहते हैं। आपने उन्हें बहुत सिर चढ़ा रखा है।जबकि जो काम वे करते हैं, वह हम भी कर सकते हैं। मगर आप हमें मौका ही नहीं देते।’

बादशाह को बीरबल की बुराई अच्छी नहीं लगती थी, अतः उन्होंने उन चारों की परीक्षा ली- ‘देखो, आज बीरबल तो यहां हैं नहीं और मुझे अपने एक सवाल का जवाब चाहिए। यदि तुम लोगों ने मेरे प्रश्न का सही-सही जवाब नहीं दिया तो मैं तुम चारों को फांसी पर चढ़वा दूंगा।’ बादशाह की बात सुनकर वे चारों घबरा गए।

उनमें से एक ने हिम्मत करके कहा- ‘प्रश्न बताइए बादशाह सलामत ?’ ‘संसार में सबसे बड़ी चीज क्या है?
….और अच्छी तरह सोच-समझ कर जवाब देना वरना मैं कह चुका हूं कि तुम लोगों को फांसी पर चढ़वा दिया जाएगा।’

बादशाह अकबर ने कहा- ‘अटपटे जवाब हरगिज नहीं चलेंगे। जवाब एक हो और बिलकुल सही हो।’ ‘बादशाह सलामत? हमें कुछ दिनों की मोहलत दी जाए।’ उन्होंने सलाह करके कहा। ‘ठीक है, तुम लोगों को एक सप्ताह का समय देता हूं।’ बादशाह ने कहा। चारों दरबारी चले गए और दरबार से बाहर आकर सोचने लगे कि सबसे बड़ी चीज क्या हो सकती है?

एक दरबारी बोला- ‘मेरी राय में तो अल्लाह से बड़ा कोई नहीं।’’अल्लाह कोई चीज नहीं है। कोई दूसरा उत्तर सोचो।’ – दूसरा बोला। ‘सबसे बड़ी चीज है भूख जो आदमी से कुछ भी करवा देती है।’ – तीसरे ने कहा। ‘नहीं…नहीं, भूख भी बर्दाश्त की जा सकती है।’

‘फिर क्या है सबसे बड़ी चीज?’ छः दिन बीत गए लेकिन उन्हें कोई उत्तर नहीं सूझा। हार कर वे चारों बीरबल के पास पहुंचे और उसे पूरी घटना कह सुनाई, साथ ही हाथ जोड़कर विनती की कि प्रश्न का उत्तर बता दें।बीरबल ने मुस्कराकर कहा- ‘मैं तुम्हारे प्रश्न का उत्तर दूंगा, लेकिन मेरी एक शर्त है।’

‘हमें आपकी हजार शर्तें मंजूर हैं।’ चारों ने एक स्वर में कहा- ‘बस आप हमें इस प्रश्न का उत्तर बताकर हमारी जान बख्शी करवाएं। ‘बताइए आपकी क्या शर्त है?’ ‘तुममें से दो अपने कंधों पर मेरी चारपाई रखकर दरबार तक ले चलोगे। एक मेरा हुक्का पकड़ेगा, एक मेरे जूते लेकर चलेगा।’ बीरबल ने अपनी शर्त बताते हुए कहा।

यह सुनते ही वे चारों सन्नाटे में आ गए। उन्हें लगा मानो बीरबल ने उनके गाल पर कस कर तमाचा मार दिया हो। मगर वे कुछ बोले नहीं। अगर मौत का खौफ न होता तो वे बीरबल को मुंहतोड़ जवाब देते, मगर इस समय मजबूर थे, अतः तुरंत राजी हो गए।

दो ने अपने कंधों पर बीरबल की चारपाई उठाई, तीसरे ने उनका हुक्का और चौथा जूते लेकर चल दिया। रास्ते में लोग आश्चर्य से उन्हें देख रहे थे। दरबार में बादशाह ने भी यह मंजर देखा और वह मौजूद दरबारियों ने भी। कोई कुछ न समझ सका।

तभी बीरबल बोले- ‘महाराज? दुनिया में सबसे बड़ी चीज है- गरज। अपनी गरज से यह पालकी यहां तक उठाकर लाए हैं।’ बादशाह मुस्कराकर रह गए। वे चारों सिर झुकाकर एक ओर खड़े हो गए।

 

Motivational Story In Hindi #8 इन्सान की सोच ही जीवन का आधार हैं |

 

तीन राहगीर रास्ते पर एक पेड़ के नीचे मिले | तीनो लम्बी यात्रा पर निकले थे | कुछ देर सुस्ताने के लिए पेड़ की घनी छाया में बैठ गए | तीनो के पास दो झोले थे एक झोला आगे की तरफ और दूसरा पीछे की तरफ लटका हुआ था |

तीनो एक साथ बैठे और यहाँ-वहाँ की बाते करने लगे जैसे कौन कहाँ से आया? कहाँ जाना हैं? कितनी दुरी हैं ? घर में कौन कौन हैं ?ऐसे कई सवाल जो अजनबी एक दुसरे के बारे में जानना चाहते हैं |

तीनो यात्री कद काठी में सामान थे पर सबके चेहरे के भाव अलग-अलग थे | एक बहुत थका निराश लग रहा था जैसे सफ़र ने उसे बोझिल बना दिया हो | दूसरा थका हुआ था पर बोझिल नहीं लग रहा था और तीसरा अत्यन्त आनंद में था | एक दूर बैठा महात्मा इन्हें देख मुस्कुरा रहा था |

तभी तीनो की नजर महात्मा पर पड़ी और उनके पास जाकर तीनो ने सवाल किया कि वे मुस्कुरा क्यूँ रहे हैं | इस सवाल के जवाब में महात्मा ने तीनो से सवाल किया कि तुम्हारे पास दो दो झोले हैं इन में से एक में तुम्हे लोगो की अच्छाई को रखना हैं और एक में बुराई को बताओ क्या करोगे ?

एक ने कहा मेरे आगे वाले झोले में, मैं बुराई रखूँगा ताकि जीवन भर उनसे दूर रहू | और पीछे अच्छाई रखूँगा | दुसरे ने कहा- मैं आगे अच्छाई रखूँगा ताकि उन जैसा बनू और पीछे बुराई ताकि उनसे अच्छा बनू | तीसरे ने कहा मैं आगे अच्छाई रखूँगा ताकि उनके साथ संतुष्ट रहूँ और पीछे बुराई रखूँगा और पीछे के थैले में एक छेद कर दूंगा जिससे वो बुराई का बोझ कम होता रहे हैं और अच्छाई ही मेरे साथ रहे अर्थात वो बुराई को भूला देना चाहता था |

यह सुनकर महात्मा ने कहा – पहला जो सफ़र से थक कर निराश दिख रहा हैं जिसने कहा कि वो बुराई सामने रखेगा वो इस यात्रा के भांति जीवन से थक गया हैं क्यूंकि उसकी सोच नकारात्मक हैं उसके लिए जीवन कठिन हैं |

दूसरा जो थका हैं पर निराश नहीं, जिसने कहा अच्छाई सामने रखूँगा पर बुराई से बेहतर बनने की कोशिश में वो थक जाता हैं क्यूंकि वो बेवजह की होड़ में हैं |

तीसरा जिसने कहा वो अच्छाई आगे रखता हैं और बुराई को पीछे रख उसे भुला देना चाहता हैं वो संतुष्ट हैं और जीवन का आनंद ले रहा हैं | इसी तरह वो जीवन यात्रा में खुश हैं |

 

Motivational Story In Hindi #9 स्थिति समझे बिना कोई नकारात्मक प्रतिक्रिया न दें |

 

एक डॉक्टर बड़ी ही तेजी से हॉस्पिटल में घुसा , उसे किसी एक्सीडेंट के मामले में तुरंत बुलाया गया था। अंदर घुसते ही उसने देखा कि जिस लड़के का एक्सीडेंट हुआ है उसके परिजन बड़ी बेसब्री से उसका इंतज़ार कर रहे हैं।

डॉक्टर को देखते ही लड़के का पिता बोला , ” आप लोग अपनी ड्यूटी ठीक से क्यों नहीं करते , आपने आने में इतनी देर क्यों लगा दी ….अगर मेरे बेटे को कुछ हुआ तो इसके जिम्मेदार आप होंगे …”

डॉक्टर ने विनम्रता कहा , ” आई ऍम सॉरी , मैं हॉस्पिटल में नहीं था , और कॉल आने के बाद जितना तेजी से हो सका मैं यहाँ आया हूँ। कृपया अब आप लोग शांत हो जाइये ताकि मैं इलाज कर सकूँ….”

“शांत हो जाइये !!!” , लड़के का पिता गुस्से में बोला , ” क्या इस समय अगर आपका बेटा होता तो आप शांत रहते ? अगर किसी की लापरवाही की वजह से आपका अपना बेटा मर जाए तो आप क्या करेंगे ?” ; पिता बोले ही जा रहा था।

” भगवान चाहेगा तो सब ठीक हो जाएगा , आप लोग दुआ कीजिये मैं इलाज के लिए जा रहा हूँ। ” , और ऐसा कहते हुए डॉक्टर ऑपरेशन थिएटर में प्रवेश कर गया।

बाहर लड़के का पिता अभी भी बुदबुदा रहा था , ” सलाह देना आसान होता है , जिस पर बीतती है वही जानता है…”

करीब डेढ़ घंटे बाद डॉक्टर बाहर निकला और मुस्कुराते हुए बोला , ” भगवान् का शुक्र है आपका बेटा अब खतरे से बाहर है। “

यह सुनते ही लड़के के परिजन खुश हो गए और डॉक्टर से सवाल पर सवाल पूछने लगे , ” वो कब तक पूरी तरह से ठीक हो जायेगा…… उसे डिस्चार्ज कब करेंगे….?…”

पर डॉक्टर जिस तेजी से आया था उसी तेजी से वापस जाने लगा और लोगों से अपने सवाल नर्स से पूछने को कहा।

” ये डॉक्टर इतना घमंडी क्यों है , ऐसी क्या जल्दी है कि वो दो मिनट हमारे सवालों का जवाब नहीं दे सकता ?” लड़के के पिता ने नर्स से कहा।

नर्स लगभग रुंआसी होती हुई बोली , ” आज सुबह डॉक्टर साहब के लड़के की एक भयानक एक्सीडेंट में मौत हो गयी , और जब हमने उन्हें फ़ोन किया था तब वे उसका अंतिम संस्कार करने जा रहे थे।

और बेचारे अब आपके बच्चे की जान बचाने के बाद अपने लाडले का अंतिम संस्कार करने के लिए वापस लौट रहे हैं। “

यह सुन लड़के के परिजन और पिता स्तब्ध रह गए और उन्हें अपनी गलती का ऐहसास हो गया।

फ्रेंड्स, बहुत बार हम किसी सिचुएशन के बारे में अच्छी तरह जाने बिना ही उसपर रियेक्ट कर देते हैं। पर हमें चाहिए कि हम खुद पर नियंत्रण रखें और पूरी स्थिति को समझे बिना कोई नकारात्मक प्रतिक्रिया न दें। वर्ना अनजाने में हम उसे ही ठेस पहुंचा सकते हैं जो हमारा ही भला सोच रहा हो।

 

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Motivation Story In Hindi #10 ईमानदारी का फल |

Motivational Story In Hindi #10 ईमानदारी का फल |
Motivational Story In Hindi #10 ईमानदारी का फल |

knowledge story in hindi – गोपाल एक गरीब लकडहारा था । वह रोज जंगल में जाकर लकडिया काटता था और शाम को उन्हें बाजार में बेच देता था । लकड़ियों को बेचने से जो पैसे मिलते उन्ही से उसके परिवार का गुजर-बसर होता था ।

एक दिन गोपाल जंगल में दूर तक निकल गया । वहाँ उसकी द्रष्टि नदी के किनारे एक बड़े पेड़ पर पड़ी । उसने सोचा की आज उसे बहोत सारी लकड़ियाँ मिल जाएँगी । वह अपनी कुल्हाड़ी लेकर उस पेड़ पर चढ़ गया । अभी उसने एक डाल काटना शरु ही किया था की अचानक उसके हाथ से कुल्हाड़ी छुट गई और नदी में जा गिरी । गोपाल जटपट पेड़ से निचे उतरा और नदी में अपनी कुल्हाड़ी ढूंढने लगा । उसने बहोत कोशिश की, पर कुल्हाड़ी उसके हाथ न लगी । उदास होकर वह पेड़ के नीचे जाकर बैठ गया ।

इतने में एक देवदूत वहां आ पहुंचा । उसने गोपाल से उसकी उदासी का कारण पुछा । गोपाल ने देवदूत को कुल्हाड़ी नदी में गिर जाने की बात बताई । देवदूत ने उसे धीरज बंधाते हुए कहा “घबराओ मत, मै तुम्हारी कुल्हाड़ी निकल दूंगा ।”

यह कहकर देवदूत ने नदी में डूबकी लगाई । वह सोने की कुल्हाड़ी लेकर बहार निकला । उसने गोपाल से पूछा “ क्या यही तुम्हारी कुल्हाड़ी है । ” गोपाल ने कहा, “ नहीं महाराज, यह मेरी कुल्हाड़ी नहीं है । ” फिर दूसरी बार डूबकी लगाकर देवदूत ने चांदी की कुल्हाड़ी निकाली । तब भी लकडहारे ने इनकार करते हुए कहा, “ नहीं, यह भी मेरी कुल्हाड़ी नहीं है । ” देवदूत ने फिर डुबकी लगाई । इस बार उसने नदी से लोहे की कुल्हाड़ी निकाली । उस कुल्हाड़ी को देखते ही गोपाल ख़ुशी से चिल्ला उठा, “ हाँ महाराज, यही मेरी कुल्हाड़ी है । ”

गोपाल की इमानदारी पर देवदूत बहोत खुश हुआ । लोहे की कुल्हाड़ी के साथ-साथ सोने की और चांदी की कुल्हाड़िया भी देवदूत ने गोपाल को इनाम में दे दी । गोपाल ने देवदूत का बड़ा आभार मन ।

सीख : इमानदारी एक अच्छा गुण है । इमानदारी का फल मीठा होता है ।

 

Motivational Story In Hindi #11 परिश्रम ही धन है |

Motivational Story In Hindi #11 परिश्रम ही धन है |
Motivational Story In Hindi #11 परिश्रम ही धन है |

real life inspirational stories in hindi– सुन्दरपुर गावं में एक किशन रहेता था । उसके चार बेटे थे । वे सभी आलसी और निक्कमे थे । जब किशन बुढा हुआ तो उसे बेटो की चिंता सताने लगी ।

एक बार किशान बहोत बीमार पड़ा । मृत्यु निकट देखकर उसने चार बेटो को अपने पास बुलाया । उसने उस चारो को कहा “ मैने बहुत सा धन अपने खेत में गाड रखा है । तुम लोग उसे निकल लेना ।” इतना कहते – कहते किशान के प्राण निकल गए ।

पिता का क्रिया-क्रम करने के बाद चारो भाइयो ने खेत की खुदाई शुरू कर दी । उन्होंने खेत का चप्पा-चप्पा खोद डाला, पर उन्हें कही धन नहीं मिला । उन्होंने पिता को खूब कोसा ।वर्षा रुतु आनेवाली थी । किशान के बेटों ने उस खेत में धान के बिज बो दिए । वर्षा का पानी पाकर पौधे खूब बढे । उन पर बड़ी-बड़ी बालें लगी । उस साल खेत में धान की बहोत अच्छी फसल हुई ।

चारों भाई बहुत खुश हुए । अब पिताकी बात का सही अर्थ उनकी समझ में आ गया । उन्होंने खेत की खुदाई करने में जो परिश्रम किया था, उसी से उन्हें अच्छी फसल के रूप में बहुत धन मिला था ।

इस प्रकार श्रम का महत्व समझने पर चारो भाई मन लगाकर खेती करने लगे ।

सिख : परिश्रम ही सच्चा धन है ।

 

Motivational Story In Hindi #12 घमंडी का सिर नीचा |

नारियल के पेड़ बड़े ही ऊँचे होते हैं और देखने में बहुत सुंदर होते हैं | एक बार एक नदी के किनारे नारियल का पेड़ लगा हुआ था | उस पर लगे नारियल को अपने पेड़ के सुंदर होने पर बहुत गर्व था | सबसे ऊँचाई पर बैठने का भी उसे बहुत मान था | इस कारण घमंड में चूर नारियल हमेशा ही नदी के पत्थर को तुच्छ पड़ा हुआ कहकर उसका अपमान करता रहता |

एक बार, एक शिल्प कार उस पत्थर को लेकर बैठ गया और उसे तराशने के लिए उस पर तरह – तरह से प्रहार करने लगा | यह देख नारियल को और अधिक आनंद आ गया उसने कहा – ऐ पत्थर ! तेरी भी क्या जिन्दगी हैं पहले उस नदी में पड़ा रहकर इधर- उधर टकराया करता था और बाहर आने पर मनुष्य के पैरों तले रौंदा जाता था और आज तो हद ही हो गई | ये शिल्पी तुझे हर तरफ से चोट मार रहा हैं और तू पड़ा देख रहा हैं | अरे ! अपमान की भी सीमा होती हैं | कैसी तुच्छ जिन्दगी जी रहा हैं | मुझे देख कितने शान से इस ऊँचे वृक्ष पर बैठता हूँ | पत्थर ने उसकी बातों पर ध्यान ही नहीं दिया | नारियल रोज इसी तरह पत्थर को अपमानित करता रहता |

कुछ दिनों बाद, उस शिल्पकार ने पत्थर को तराशकर शालिग्राम बनाये और पूर्ण आदर के साथ उनकी स्थापना मंदिर में की गई | पूजा के लिए नारियल को पत्थर के बने उन शालिग्राम के चरणों में चढ़ाया गया | इस पर पत्थर ने नारियल से बोला – नारियल भाई ! कष्ट सहकर मुझे जो जीवन मिला उसे ईश्वर की प्रतिमा का मान मिला | मैं आज तराशने पर ईश्वर के समतुल्य माना गया | जो सदैव अपने कर्म करते हैं वे आदर के पात्र बनते हैं | लेकिन जो अहंकार/ घमंड का भार लिए घूमते हैं वो नीचे आ गिरते हैं | ईश्वर के लिए समर्पण का महत्व हैं घमंड का नहीं | पूरी बात नारियल ने सिर झुकाकर स्वीकार की जिस पर नदी बोली इसे ही कहते हैं घमंडी का सिर नीचा (Ghamandi Ka Sar Neecha) |

Motivational Story In Hindi #13 चतुराई से कठिन काम भी संभव |

एक जंगल में महाचतुरक नामक सियार रहता था। एक दिन जंगल में उसने एक मरा हुआ हाथी देखा। उसकी बांछे खिल गईं। उसने हाथी के मृत शरीर पर दांत गड़ाया पर चमड़ी मोटी होने की वजह से, वह हाथी को चीरने में नाकाम रहा।

वह कुछ उपाय सोच ही रहा था कि उसे सिंह आता हुआ दिखाई दिया। आगे बढ़कर उसने सिंह का स्वागत किया और हाथ जोड़कर कहा, “स्वामी आपके लिए ही मैंने इस हाथी को मारकर रखा है, आप इस हाथी का मांस खाकर मुझ पर उपकार कीजिए।” सिंह ने कहा, “मैं तो किसी के हाथों मारे गए जीव को खाता नहीं हूं, इसे तुम ही खाओ।”

सियार मन ही मन खुश तो हुआ पर उसकी हाथी की चमड़ी को चीरने की समस्या अब भी हल न हुई थी।

थोड़ी देर में उस तरफ एक बाघ आ निकला। बाघ ने मरे हाथी को देखकर अपने होंठ पर जीभ फिराई। सियार ने उसकी मंशा भांपते हुए कहा, “मामा आप इस मृत्यु के मुंह में कैसे आ गए? सिंह ने इसे मारा है और मुझे इसकी रखवाली करने को कह गया है।

एक बार किसी बाघ ने उनके शिकार को जूठा कर दिया था तब से आज तक वे बाघ जाति से नफरत करने लगे हैं। आज तो हाथी को खाने वाले बाघ को वह जरुर मार गिराएंगे।”

यह सुनते ही बाघ वहां से भाग खड़ा हुआ। पर तभी एक चीता आता हुआ दिखाई दिया। सियार ने सोचा चीते के दांत तेज होते हैं। कुछ ऐसा करूं कि यह हाथी की चमड़ी भी फाड़ दे और मांस भी न खाए।

उसने चीते से कहा, “प्रिय भांजे, इधर कैसे निकले? कुछ भूखे भी दिखाई पड़ रहे हो।” सिंह ने इसकी रखवाली मुझे सौंपी है, पर तुम इसमें से कुछ मांस खा सकते हो। मैं जैसे ही सिंह को आता हुआ देखूंगा, तुम्हें सूचना दे दूंगा, तुम सरपट भाग जाना”।

पहले तो चीते ने डर से मांस खाने से मना कर दिया, पर सियार के विश्वास दिलाने पर राजी हो गया।

चीते ने पलभर में हाथी की चमड़ी फाड़ दी। जैसे ही उसने मांस खाना शुरू किया कि दूसरी तरफ देखते हुए सियार ने घबराकर कहा, “भागो सिंह आ रहा है”। इतना सुनना था कि चीता सरपट भाग खड़ा हुआ। सियार बहुत खुश हुआ। उसने कई दिनों तक उस विशाल जानवर का मांस खाया।

सिर्फ अपनी सूझ-बूझ से छोटे से सियार ने अपनी समस्या का हल निकाल लिया। इसीलिए कहते हैं कि बुद्धि के प्रयोग से कठिन से कठिन काम भी संभव हो जाता है।

 

Motivational Story In Hindi #14 बड़ों की बात मानो |

Motivational Story In Hindi #14 बड़ों की बात मानो |
Motivational Story In Hindi #14 बड़ों की बात मानो |

एक बहुत घना जंगल था, उसमें पहाड़ थे और शीतल निर्मल जल के झरने बहते थे। जंगल में बहुत- से पशु रहते थे। पर्वत की गुफा में एक शेर- शेरनी और इन के दो छोटे बच्चे रहते थे। शेर और शेरनी अपने बच्चों को बहुत प्यार करते थे।

जब शेर के बच्चे अपने माँ बाप के साथ जंगल में निकलते तो उन्हें बहुत अच्छा लगता था। लेकिन शेर- शेरनी अपने बच्चों को बहुत कम अपने साथ ले जाते थे। वे बच्चों को गुफा में छोड़कर वन में अपने भोजन की खोज में चले जाया करते थे।

शेर और शेरनी अपने बच्चों को बार- बार समझाते थे कि वे अकेले गुफा से बाहर भूलकर भी न निकलें। लेकिन बड़े बच्चे को यह बात अच्छी नहीं लगती थी। एक दिन शेर- शेरनी जंगल में गये थे, बड़े बच्चे ने छोटे से कहा- चलो झरने से पानी पी आएँ और वन में थोड़ा घूमें। हिरनों को डरा देना मुझे बहुत अच्छा लगता है।

छोटे बच्चे ने कहा- ‘पिता जी ने कहा है कि अकेले गुफा से मत निकलना। झरने के पास जाने को बहुत मना किया है। तुम ठहरो पिताजी या माताजी को आने दो। हम उनके साथ जाकर पानी पीलेंगे।’
बड़े बच्चे ने कहा- ‘मुझे प्यास लगी है। सब पशु तो हम लोगों से डरते ही हैं। फिर डरने की क्या बातहै?’

छोटा बच्चा अकेला जाने को तैयार नहीं हुआ। उसने कहा- ‘मैं तो माँ- बाप की बात मानूँगा। मुझे अकेला जाने में डर लगता है।’ बड़े भाई ने कहा। ‘तुम डरपोक हो, मत जाओ, मैं तो जाता हूँ।’ बड़ा बच्चा गुफा से निकला और झरने के पास गया। उसने पेट भर पानी पिया और तब हिरनों को ढकतेहुए इधर- उधर घूमने लगा।

जंगल में उस दिन कुछ शिकारी आये हुए थे। शिकारियों ने दूर से शेर के बच्चे को अकेले घूमते देखा तो सोचा कि इसे पकड़कर किसी चिड़िया घर में बेच देने से अच्छे रुपये मिलेंगे। शिकारियों ने शेर के बच्चे को चारों ओर से घेर लिया और एक साथ उस पर टूट पड़े। उन लोगों ने कम्बल डालकर उस बच्चे को पकड़ लिया।

बेचारा शेर का बच्चा क्या करता। वह अभी कुत्ते जितना बड़ा भी नहीं हुआ था। उसे कम्बल में खूब लपेटकर उन लोगों ने रस्सियों से बाँध दिया। वह न तो छटपटा सकता था, न गुर्रा सकता था।

शिकारियों ने इस बच्चे को एक चिड़िया घर को बेच दिया। वहाँ वह एक लोहे के कटघरे में बंद कर दिया गया। वह बहुत दुःखी था। उसे अपने माँ- बाप की बहुत याद आती थी। बार- बार वह गुर्राताऔर लोहे की छड़ों को नोचता था, लेकिन उसके नोचने से छड़ तो टूट नहीं सकती थी।

जब भी वह शेर का बच्चा किसी छोटे बालक को देखता तो बहुत गुर्राता और उछलता था। यदि कोई उसकी भाषा समझा सकता तो वह उससे अवश्य कहता- ‘तुम अपने माँ- बाप तथा बड़ों की बात अवश्य मानना। बड़ों की बात न मानने से पीछे पश्चात्ताप करना पड़ता है। मैं बड़ों की बात न मानने से ही यहाँ बंदी हुआ हूँ।’

सच है- जे सठ निज अभिमान बस, सुनहिं न गुरुजन बैन।
जे जग महँ नित लहहिं दुःख, कबहुँ न पावहिं चैन॥

 

Motivational Story In Hindi #15 जिन्दगी के आधार |

हर इंसान के लिए जीवन में शांति सर्वोपरि है. शांति के बिना इन्सान कोई सिद्धि (Achievement) हासिल नहीं कर सकता है. परन्तु आज की भागमभाग में शांति के आधारभूत तत्वों को ही भूलते जा रहे हैं. इस समस्या का मूल हल बताती यह Heart touching कहानी प्रस्तुत है :

एक दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर अपने सामने टेबल पर कुछ वस्तुओं के साथ अपनी कक्षा के आगे खड़े थे. बिना कुछ बोले अपनी कक्षा शुरू की, उन्होंने एक बहुत बड़े जार को उठाया और उसमें 2 इंच व्यास की Rocks से भरना शुरू कर दिया. जार भर गया, तब Students से पुछा क्या जार भरा हुआ है. सभी Students सहमत हुए.

तब प्रोफसर साहब ने कंकड़ (Pebbles) का डिब्बा उठाया और जार में उड़ेल दिया. उन्होनें जार को हिलाकर रख दिया. जाहिर है Pebbles; Rocks के बीच खाली जगह में घुसने ही थे. जब जार भर गया, Students से पुछा क्या जार भरा हुआ है. सभी Students सहमत हुए.

प्रोफसर साहब ने रेत (Sand) का डिब्बा उठाया और जार में उड़ेल दिया. जाहिर है रेत से जार में सब कुछ फुल भर गया.

जार भर गया तब उन्होंने एक बार फिर Students से पुछा क्या जार भरा हुआ है. सभी Students ने सर्वाम्मति सहमति जवाब दिया “हाँ”.

“अब” प्रोफसर साहब ने कहा, “मुझे लगता है कि यह जार आपके जीवन का प्रतिनिधित्व करता है. सबसे महत्वपूर्ण चीजें Rocks हैं – आपका परिवार, आपके पैरेन्टस्, आपका partner, आपका स्वास्थ्य, आपके बच्चे – अगर बाकी सब चीजें खो जाती है और केवल ये बच जाती है, तब भी आपका जीवन फुल रहेगा.

Pebbles कुछ महत्व की दूसरी चीजें हैं – जैसे आपका job, आपका घर, आपकी कार आदि.

बाकी सब कुछ रेत है. छोटी चीजें (small stuff) हैं.“

“यदि आप जार में सबसे पहले रेत डालोगे” उनहोंने जारी रखा “तो उसमें Rocks, pebbles के लिये कोई जगह खाली नहीं रहेगी. बिल्कुल ऐसा ही आपके जीवन में चलता है.

अगर आप अपना सारा समय और ऊर्जा small stuff पर खर्च कर दोगे तो आपके पास महत्पूर्ण चीजों के लिए समय कभी नहीं होगा. अपनी खुशी के लिए अपनी अत्यंत महत्पूर्ण चीजों (Rocks) पर ध्यान दें. जिन्दगी के आधार ये ही हैं.

अपने बच्चों के साथ खेलें, अपने पैरेन्टस् की सेवा करें, अपने partner साथ नाचें-गायें बाहर घूमने जायें, अपने सवास्थ्य पर ध्यान दें. आप हमेशा उसके बाद job पर जाने, घर को साफ रखने, डिनर पार्टी देने तथा अन्य कार्यों का निस्तारण तय करें.

पहले अपनी Rocks का ख्याल रखें – जो वास्तव में महत्वपूर्ण चीजें हैं.

अपनी प्राथमिकताएं निर्धारित करें. बाकी तो बस रेत है.”

 

Motivational Story In Hindi #16 विद्या बड़ी या बुद्धि? |

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किसी ब्राह्मण के चार पुत्र थे। उनमें परस्पर गहरी मित्रता थी। चारों में से तीन शास्त्रों में पारंगत थे, लेकिन उनमें बुद्धि का अभाव था। चौथे ने शास्त्रों का अध्ययन तो नहीं किया था, लेकिन वह था बड़ा बुद्धिमान।

एक बार चारों भाइयों ने परदेश जाकर अपनी-अपनी विद्या के प्रभाव से धन अर्जित करने का विचार किया। चारों पूर्व के देश की ओर चल पड़े।

रास्ते में सबसे बड़े भाई ने कहा-‘हमारा चौथा भाई तो निरा अनपढ़ है। राजा सदा विद्वान व्यक्ति का ही सत्कार करते हैं। केवल बुद्धि से तो कुछ मिलता नहीं। विद्या के बल पर हम जो धन कमाएँगे, उसमें से इसे कुछ नहीं देंगे। अच्छा तो यही है कि यह घर वापस चला जाए।’

दूसरे भाई का विचार भी यही था। किंतु तीसरे भाई ने उनका विरोध किया। वह बोला-‘हम बचपन से एक साथ रहे हैं, इसलिए इसको अकेले छोड़ना उचित नहीं है। हम अपनी कमाई का थोड़ा-थोड़ा हिस्सा इसे भी दे दिया करेंगे।’ अतः चौथा भाई भी उनके साथ लगा रहा।

रास्ते में एक घना जंगल पड़ा। वहाँ एक जगह हड्डियों का पंजर था। उसे देखकर उन्होंने अपनी-अपनी विद्या की परीक्षा लेने का निश्चय किया। उनमें से एक ने हड्डियों को सही ढंग से एक स्थान पर एकत्रित कर दिया। वास्तव में ये हड्डियाँ एक मरे हुए शेर की थीं।

दूसरे ने बड़े कौशल से हड्डियों के पंजर पर मांस एवं खाल का अवरण चढ़ा दिया। उनमें उसमें रक्त का संचार भी कर दिया। तीसरा उसमें प्राण डालकर उसे जीवित करने ही वाला था कि चौथे भाई ने उसको रोकते हुए कहा, ‘तुमने अपनी विद्या से यदि इसे जीवित कर दिया तो यह हम सभी को जान से मार देगा।’

तीसरे भाई ने कहा, ‘तू तो मूर्ख है!’मैं अपनी विद्या का प्रयोग अवश्य करुँगा और उसका फल भी देखूँगा।’ चौथे भाई ने कहा, ‘तो फिर थोड़ी देर रुको। मैं इस पेड़ पर चढ़ जाऊँ, तब तुम अपनी विद्या का चमत्कार दिखाना।’ यह कहकर चौथा भाई पेड़ पर चढ़ गया।

तीसरे भाई ने अपनी विद्या के बल पर जैसे ही शेर में प्राणों का संचार किया, शेर तड़पकर उठा और उन पर टूट पड़ा। उसने पलक झपकते ही तीनों अभिमानी विद्वानों को मार डाला और गरजता हुआ चला गया। उसके दूर चले जाने पर चौथा भाई पेड़ से उतरकर रोता हुआ घर लौट आया। इसीलिए कहा गया है कि विद्या से बुद्धि श्रेष्ठ होती है।

 

Motivational Story In Hindi #17 राजकुमारी और सांपो की कहानी |

राजा देवशक्ति का एक ही पुत्र था। उसके पेट में एक सर्प रहता था। इस कारण राजपुत्र एकदम दुर्बल हो गया था। अनेक वैद्यों ने उसकी चिकित्सा की, फिर भी वह स्वस्थ नहीं हुआ। निराश होकर राजपुत्र एक दिन घर छोड़कर चुपके से निकल पड़ा। वह भटकता हुआ किसी दूसरे राज्य में आ पहुँचा। वह भिक्षा माँगकर पेट भर लेता और एक मंदिर में सो जाता।

उस राज्य के राजा का नाम बलि था। उसकी दो पुत्रियाँ थीं। दोनों युवती थीं। वे प्रतिदिन सुबह-सुबह अपने पिता को प्रणाम करतीं। प्रणाम करने के बाद उनमें से एक कहती, ‘महाराज की जय हो, जिससे हम सब सुखी रहें।’ दूसरी कहती, ‘महाराज, आपको आपके कर्मों का फल अवश्य मिले।’

राजा बलि दूसरी बेटी के कड़वी बातों को सुनकर क्रोध से भर जाता था। एक दिन उसने मंत्रियों को आदेश दिया, ‘कड़वे वचन बोलनेवाली मेरी इस पुत्री का किसी परदेसी से ब्याह कर दो, जिससे यह अपने कर्म का फल भुगते।’

मंत्रियों ने मंदिर में रहने वाले उसी भिखारी राजकुमार के साथ उस राजकुमारी का विवाह कर दिया। राजकुमारी अपने उस पति को प्राप्त करके तनिक भी दुखी नहीं हुई। वह प्रसन्नता के साथ पति की सेवा करने लगी। कुछ दिन बाद वह पति को साथ लेकर दूसरे राज्य में चली गई।

वहाँ उसने एक सरोवर के किनारे पर बसेरा बना लिया। एक दिन राजकुमारी अपने पति को घर की रखवाली के लिए छोड़कर भोजन का सामान लाने के लिए स्वयं नगर में चली गई। राजकुमार जमीन पर सिर टिकाकर सो गया। वह सो रहा था कि उसके पेट में रहने वाला सर्प उसके मुख से बाहर निकलकर हवा खाने लगा।

इसी बीच पास ही की बाँबी में रहनेवाला साँप भी बिल से बाहर निकल आया। उसने पेट में रहने वाले साँप को फटकारते हुए कहा, ‘तू बहुत दुष्ट है, जो इस सुंदर राजकुमार को इतने दिनों से पीड़ित कर रहा है।’

पेट में रहने वाले साँप ने कहा, ‘और तू कौन-सा बहुत भला है! अपनी तो देख, तूने अपनी बाँबी में सोने से भरे दो-दो कलश छिपा रखे हैं।’ बाँबीवाले सर्प ने कहा, ‘क्या कोई इस उपाय को नहीं जानता कि राजकुमारी को पुरानी राई की काँजी पिलाई जाए तो तू तुरंत मर जाएगा?’

पेट में रहनेवाले साँप ने भी उसका भेद खोल दिया, ‘तुम्हारी बाँबी में खौलता तेल या पानी डालकर तुम्हारा वध किया जा सकता है!’ राजकुमारी लौट आई थी। वह वहीं छिपकर दोनों साँपों की बातें सुन रही थी। उसने बताए हुए दोनों उपायों से उन दोनों साँपों का नाश कर दिया। पेटवाले साँप के मरते ही राजकुमार स्वस्थ हो गया। फिर बाँबी में गड़े धन को निकालकर वह अपने राज्य में चली आई और अपने स्वस्थ-सुंदर पति के साथ सुख से रहने लगी। सच ही कहा गया है कि एक-दूसरे की बातों को छिपाकर ही रखना चाहिए, नहीं तो दोनों का नाश हो जाता है।

 

Motivation Story In Hindi #18 ज़िंदगी में सफल होने के लिए बहुत जरूरी है छटपटाहट |

Hindi-Motivational-Quotes
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महान दार्शनिक सुकरात से एक बार एक युवक मिला। उसने सफलता पाने का उपाय पूछा। सुकरात ने उसे अगले दिन आने के लिए कहा। अगले दिन युवक ने फिर से वही सवाल पूछा तो सुकरात ने उसे फिर से अगले दिन आने को कहा।

कई महीने बीत जाने के बाद भी लड़का रोज आता और सुकरात उसे अगले दिन आने को टाल देते। एक दिन लड़के ने कहा कि, ‘मैं रोज इतनी दूर से यहां आने से अच्छा मै आपके आंगन में ही बैठ जाता हूं। सुबह, दोपहर,शाम, रात, दिन में बार-बार मुझे देखकर आपका दिल जरूर पिघलेगा।’

सुकरात ने लड़के के तरफ ध्यान नही दिया परंतु वह मन ही मन खुश जरूर थे। रात में सुकरात ने लड़के से अगले दिन सुबह सफलता का रहस्य बताने का वादा किया। अगली सुबह सुकरात लड़के को लेकर नदी किनारे गए।

सुकरात ने लड़को को नदी किनारे लाकर कहा कि तुम नदी में डुबकी लगाओं फिर मै तुम्हें सफलता पाने का तरीका बताता हूं। लड़के ने जैसे ही डुबकी लगाया सुकरात ने उसका सिर पकडकर पानी में दबा दिया।

लड़का छटपटाने लगा। सुकरात ने उसे फिर से डुबकी लगाने के लिए कहा जैसे ही लड़का अंदर गया सुकरात ने फिर उसका सिर दबा दिया। एक बार सुकरात उसे निकलने नही दे रहा था। लड़का बहुत जोर से छटपटाने लगा।

सुकरात के छोड़ते ही लड़का बाहर निकला । सुकरात ने कहा तुम सफलता के लिए इसी तरह छटपटाओगे जिस तरह हवा के लिए छटपटा रहे थे, मानो उसके बिना मर जाओगे, तो सफलता हर हाल में तुम्हारे कदमों में होगी।

 

Motivation Story In Hindi #19 इंसानियत की कद्र करना इनसे सीखें |

 

एक बार एक नवाब की राजधानी में एक फकीर आया। फकीर की कीर्ति सुनकर पूरे नवाबी ठाठ के साथ भेंट के थाल लिए हुए वह फकीर के पास पहुंचा। तब फकीर कुछ लोगों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने नवाब को बैठने का निर्देश दिया। जब नवाब का नंबर आया तो फकीर ने नवाब की ओर बढ़ा दिया।

भेंट के हीरे-जवाहरातों को भरे थालों को फकीर ने छुआ तक नहीं, हां बदले में एक सूखी रोटी नवाब को दी, कहां इसे खा लो। रोटी सख्त थी, नवाब से चबायी नहीं गई। तब फकीर ने कहा जैसे आपकी दी हुई वस्तु मेरे काम की नहीं उसी तरह मेरी दी हुई वस्तु आपके काम की नहीं।

हमें वही लेना चाहिए जो हमारे काम का हो। अपने काम का श्रेय भी नहीं लेना चाहिए। नवाब फकीर की इन बातों को सुनकर काफी प्रभावित हुआ। नवाब जब जाने के लिए हुआ तो फकीर भी दरवाजे तक उसे छोड़ने आया। नवाब ने पूछा, मैं जब आया था तब आपने देखा तक नहीं था, अब छोड़ने आ रहे हैं?

फकीर बोला, बेटा जब तुम आए थे तब तुम्हारे साथ अहंकार था। अब तो चोला तुमने उतार दिया है तुम इंसान बन गए हो। हम इंसानियत का आदर करते हैं। नवाब नतमस्तक हो गया।

 

Motivational Story In Hindi #20 मंदिर का पुजारी

 

एक बार की बात है कि एक समृद्ध व्यापारी , जो सदैव अपने गुरू से परामर्श करके कुछ न कुछ सुकर्म किया करता था, गुरु से बोला-“गुरुदेव, धनार्जन हेतु मैं अपना गाँव पीछे ज़रूर छोड़ आया हूँ, पर हर समय मुझे लगता रहता है कि वहाँ पर एक ऐसा देवालय बनाया जाये जिसमें देवपूजन के साथ-साथ भोजन की भी व्यवस्था हो,अच्छे संस्कारों से लोगों को सुसंस्कृत किया जाये, अशरण को शरण मिले, वस्त्रहीन का तन ढके ,रोगियों को दवा और चिकित्सा मिले ,बच्चे अपने धर्म के वास्तविक स्वरूप से अवगत हो सकें |” सुनते ही गुरु प्रसन्नतापूर्वक बोले-“केवल गाँव में ही क्यों,तुम ऐसा ही एक मंदिर अपने इस नगर में भी बनवाओ |” व्यापारी को सुझाव पसंद आया और उसने ने दो मंदिर, एक अपने गाँव और दूसरा अपने नगर में,जहाँ वह अपने परिवार के साथ रहता था,बनवा दिए |दोनों देवालय शीघ्र ही लोगों की श्रद्धा के केंद्र बन गये |लेकिन कुछ दिन ही बीते थे कि व्यापारी ने देखा कि नगर के लोग गाँव के मन्दिर में आने लगे हैं ,जबकि वहाँ पहुँचने का रास्ता काफी कठिन है |उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि ऐसा क्यों हो रहा है ?

कुछ भारी मन से वह गुरु जी के पास गया और सारा वृत्तांत कह सुनाया |गुरु जी ने कुछ विचार किया और फिर उसे यह परामर्श दिया कि वह गाँव के मंदिर के पुजारी को नगर के मन्दिर में सेवा के लिए बुला ले | उसने ऐसा ही किया नगर के पुजारी को गाँव और गाँव के पुजारी को नगर में सेवा पर नियुक्त कर दिया |कुछ ही दिन बीते थे कि वह यह देखकर स्तब्ध रह गया कि अब गाँव के लोग नगर के मन्दिर की ओर रुख करने लगे हैं | अब तो उसे हैरानी के साथ-साथ परेशानी भी अनुभव होने लगी |बिना एक क्षण की देरी के वह गुरुजी के पास जा कर हाथ जोड़ कर,कहने लगा –“आपकी आज्ञानुसार मैंने दोनों पुजारियों का स्थानांतरण किया लेकिन समस्या तो पहले से भी गम्भीर हो चली है कि अब तो मेरे गाँव के परिचित और परिजन, कष्ट सहकर और किराया –भाड़ा खर्च करके, नगर के देवालय में आने लगे हैं |मुझसे यह नहीं देखा जाता |”

व्यापारी की बात सुनते ही गुरु जी सारी बात समझ गये और बोले- हैरानी और परेशानी छोड़ो |दरअसल,जो गाँव वाले पुजारी हैं ,उनका अच्छा स्वभाव ही है जो लोग उसी देवालय में जाना चाहते हैं,जहाँ वे होते हैं | उनका लोगों से निःस्वार्थ प्रेम, उनके दुःख से दुखी होना ,उनके सुख में प्रसन्न होना, उनसे मित्रता का व्यवहार करना ही लोगों को उनकी और आकर्षित करता है और लोग स्वतः ही उनकी और खिंचे चले आते हैं |”अब सारी बात व्यापारी की समझ में आ चुकी थी |

मित्रों हमें भी यह बात अच्छे से समझनी चाहिए कि हमारा व्यक्तित्व हमारे बाहरी रंग-रूप से नहीं हमारे व्यवहार से निर्धारित होता है, बिलकुल एक समान ज्ञान और वेश-भूषा वाले दो पुजारियों में लोग कष्ट सह कर भी उसी के पास गए जो अधिक संवेदनशील और व्यवहारी था। इसी तरह हम चाहे जिस कार्य क्षेत्र से जुड़े हों, हमारी सफलता में हमारे व्यवहार का बहुत बड़ा योगदान होता है। हम सभी को इस परम सत्य का बोध होना चाहिए कि इस धरती पर मात्र अपने लिए ही नहीं आये हैं, हमें अपने सुख-दुःख की चिंता के साथ-साथ दूसरों के दुख-सुख को ज़रूर बांटना चाहिए, उनसे मित्रतापूर्ण व्यवहार करना चाहिए ताकि हम जहाँ पर उपस्थित हों, वहाँ पर स्वत: ही एक अच्छा वातावरण बना रहे और सकारात्मकता की तरंगों से हमरा जीवन-सागर लहलहाता रहे|

 

आशा करता हूँ की आपने पोस्ट पढ़ने और वीडियोस देखने का मजा लिया होगा और आपको हमारी आज की पोस्ट Motivational Story in Hindi पसंद आई होगी

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यहाँ पर हमने बहुत सारी रियल लाइफ मोटिवेशनल कहानियाँ भी साझा की है जोकि किसी व्यक्ति के जीवन पर बनाई गई कहानियां है या उस व्यक्ति से प्रेरित होकर बनाई गई कहानियां है।

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अगर आप चाहते हैं कि आपको इन सभी कहानियों की एक पीडीएफ मिल जाये ताकि आप इन्हे जब मन करें तब पढ़ सकें तो कमेंट करिये हम आपको इसकी पीडीएफ भी उपलब्ध करवा देंगे।

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इस प्रेरक लेख में हमने बहुत सारे सफल लोगों की सफल कहानियां साझा की है जिन्हे पढ़कर आप भी प्रेरित हो जाओगे।

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यहाँ हमने बहुत सारी ऐसी प्रेरक कहानियां भी साझा की है जिससे आप अपने डिप्रेशन को आसानी से दूर कर सकते हो इसमें हमने आपको संदीप माहेश्वरी की वीडियो भी दी है।

Hostkarle Review 2021- Cheapest Web Hosting Provider Of India

Today we are going to review of hostkarle if you don’t know what is hostkalrle so we tell you

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hp police constable recruitment 2021 - Syllabus, payscale, age,previous question papers

hp police constable recruitment 2021 – Syllabus, pay-scale, age,previous question papers

हिमाचल सरकार की हाल ही की कैबिनेट मीटिंग ने पुलिस भर्ती करवाने का फैसला लिया है और कैबिनेट ने एक नोटिफिकेशन जारी की है हिमाचल पुलिस की भर्ती से संबंधित जिसमे उन्होंने हिमाचल पुलिस की लगभग 1334 वैकेंसी भरने का फैसला लिया है जिसमे उन्होंने परुष और महिलाओं के साथ ड्राइवर्स के लिए अलग पोस्ट निकाली है। हिमाचल पुलिस की सभी वकेंसी की लिस्ट निचे है

Table of Contents

hp police constable recruitment 2021 – Syllabus, payscale, age,previous question papers

hp police constable recruitment
hp police constable recruitment

hp police constable recruitment detail

Name of the postNo. of vacancies
Police Constable(Male)(GD) 976
Police Constable(Female) 267
Driver91
Leading Firemen 02
Driver cum Pump Operator 11
Total 1334

उपरलिखित पोस्ट से अब आप जान गए होंगे की हिमाचल पुलिस में कितनी पोस्ट है और आपको इनमे से किन पोस्ट की तैयारी करनी है ये आपके ऊपर निर्भर करता है। इसके अलावा निचे हमने हिमाचल पुलिस कांस्टेबल की अन्य जानकारी भी दी है जैसे ऐज लिमिट, क्वालिफिकेशन इत्यादि।

हिमाचल पुलिस की ऐज लिमिट

हिमाचल पुलिस में 18 वर्ष से 21 वर्ष के सभी लड़के लड़किया हिमाचल पुलिस कांस्टेबल का एग्जाम दे सकते है लेकिन कुछ केटोग्रीस जैसे अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति को इसमें ऐज रेलक्सेशन मिलता है जोकि 5 साल का है।

हिमाचल प्रदेश कांस्टेबल के लिए वभिन्न स्तरों के लिए रिजर्वेशन

हिमाचल पुलिस के लिए educational qualifications

अब अगर हम बात करें हिमाचल पुलिस कांस्टेबल की educational qualifications के लिए लिए आपका 12th पास होना जरूरी है अगर आपने 10th कर रखी है तो आप इस भर्ती को नहीं दे सकते हो।

हिमाचल पुलिस के लिए Selection process

हिमाचल पुलिस की Selection process 6 चरणों में होती है जोकि निचे बताए गए है

  1. Physical and Other Standards
  2. Physical Efficiency Test
  3. Written Examination
  4. Personality Test
  5. Medical Examination
  6. Verification of Character & Antecedent

अगर आप ऊपर लिखी गई इन 6 स्टेजस को पार कर लेते हो तो आप हिमाचल पुलिस कांस्टेबल की ट्रेनिंग के लिए जा सकते हो।

Physical Standard Test

PHYSICAL EFFICIENCY TEST OF CANDIDATES

हिमाचल पुलिस के लिए WRITTEN EXAMINATION जानकारी

हिमाचल प्रदेश पुलिस कांस्टेबल की लिखित परीक्षा जिला हेडक्वाटर्स में होती है और ये 80 मार्क्स की होती है जिसमे आपको निम्नलिखित विषयों से प्रश्न पत्र आता है

ऊपर दिया गया सारा सलेब्स 12th स्टैंडर का आता है। और ये सब प्रश्न करने के लिए आपको 1 घण्टे का समय मिलता है मतलब 80 प्रश्नो के लिए 60 मिनट तो अब आप अंदाजा लगा ही सकते हो की एक प्रश्न के लिए एक मिनट भी नहीं मिलता। अब बात करते है की लिखित परीक्षा में पास होने के लिए आपको कितने नंबर चाहिए

हिमाचल पुलिस परीक्षा में पास होने के लिए कितने नंबर चाहिए

अगर आप जर्नल या obc केटोगेरी से हो तो आपको हिमाचल पुलिस कांस्टेबल की परीक्षा में 50% मार्क्स चाहिए होते है जोकि लगभग 40 नंबर होते है। लेकिन अगर आप sc/st सर्टिफिकेट वाले हो तो आपको 40% नंबर की जरूरत होती है जोकि लगभग 32 नंबर होते है।

हिमाचल पुलिस में PERSONALITY TEST या इंटरव्यू की सारी जानकारी

लिखित परीक्षा पास करने के बाद आपका PERSONALITY TEST टेस्ट होता है जिसमे सबसे पहले आपको अपने सभी डॉक्यूमेंट वेरीफाई करवाने होते है एक बात का ध्यान रखे की आप जब PERSONALITY TEST देने जाएं तो अपने रियल डॉक्यूमेंट भी लेकर जाएँ और उनकी फोटोस्टेट भी अगर आप अपना एक रियल डॉक्यूमेंट भी नहीं लाते तो आपका PERSONALITY TEST नहीं होगा और आपको डिसक्वालिफाई कर दिया जाएगा लेकिन अगर आप अपने सारे रियल डॉक्यूमेंट सबमिट करवा देते हो तो उसके बाद आपका PERSONALITY TEST होगा जोकि 15 नंबर का होता है अगर आपके पास NCC का सर्टिफिकेट है तो आपको 3 नंबर मिल जाएंगे।

PERSONALITY TEST कम से कम 10 से 15 मिनट है जिसमे आपसे कुछ बेसिक सवाल पूछे जाते है जैसे कि आप कहाँ से हो कितनी पढ़ाई की है और आपसे आपकी पढ़ाई अनुसार प्रश्न पूछे जाते है। निचे वाली वीडियो में 2019 के एक कैंडिडेट के इंटरव्यू की जानकारी है कि उससे क्या क्या सवाल पूछे गए थे।

हिमाचल प्रदेश पुलिस में MEDICAL EXAMINATION की सारी जानकारी

अगर आप PERSONALITY TEST पास कर लेते हो तो उसके बाद आपकी MEDICAL EXAMINATION होती है जिसमे आपके शरीर को चेक किया जाता है की आप मेडिकली फिट हो या नहीं। निचे 2019 के एक कैंडिडेट जानकारी दी गई है की उसका मेडिकल टेस्ट प्रकार हुआ था।

अब अगर आप ये टेस्ट भी पास कर लेते है तो उसके बाद आपका रिजल्ट आ जाएगा और उसके बाद अगर आप ये सभी टेस्ट पास कर जाते हो उसके बाद आपको ट्रेनिंग के ऑर्डर्स आएंगे।

hp police कॉन्स्टेबल लगने के बाद आपको प्रमोशन कैसे मिलता है

अब हम बात करेंगे की पुलिस कॉन्स्टेबल लगने के बाद आपको प्रमोशन कैसे मिलता है क्या क्या इलिजबिल्टी होती है।

CONSTABLE TO HEAD CONSTABLE
  1. कांस्टेबल से हेड कांस्टेबल बनने के लिए आपको B-1 टेस्ट देना होगा।
  2. B-1 टेस्ट देने के लिए आपको 5 साल कांस्टेबल के तौर पर सर्विस करनी होगी उसके बाद आप ये टेस्ट दे सकते हो।
HEAD CONSTABLE TO ASI
  1. ASI बनने के लिए आपको पहले हेड कांस्टेबल के तौर पर 5 साल सर्विस करनी होगी।
  2. उसके बाद आप asi बन सकते हो।

हिमाचल पुलिस कांस्टेबल बनने पर पे स्केल

 RS. 5910-20200+1900 GRADE PAY. अगर संक्षेप में बताऊं तो करीब 20 से 22 हजार तक आपको शुरुआत में मिल जाती है और 8 साल कॉन्ट्रैक्ट नारी पूरी करने के बाद आप रेगुलर हो जाते हो और फिर आपको 40 से 45 हजार तक पे मिल जाती है ट्रेनिंग टाइम आपको 18 हजार तक पे मिल जाती है। इसके अलावा hrtc की बसों में ट्रैवलिंग फ्री होती है।

hp police constable syllabus – Download HP Constable Syllabus Pdf

निचे हमने हिमाचल प्रदेश कांस्टेबल के एग्जाम का सारा सलेब्स शेयर किया है

हिंदी

  • संधि
  • Comprehension Passage
  • मुहवारे
  • मुहावरे और वाक्यांश
  • समास
  • शब्दावली
  • समानार्थक शब्द
  • विलोम शब्द
  • एक शब्द प्रतिस्थापन

English

  • Substitution
  • Passage Completion
  • Idioms and Phrases
  • Sentence Improvement
  • Synonyms
  • Sentence
  • Completion
  • Error Correction (Underlined Part)
  • Transformation
  • Prepositions
  • Sentence Arrangement
  • Fill in the blanks
  • Antonyms
  • Active and Passive Voice
  • Substitution
  • Joining Sentences
  • Error Correction (Phrase in Bold)
  • Spelling Test
  • Spotting Errors
  • Para Completion

Mathematics

  • Sequences and Series
  • Trigonometry
  • Exponential and Logarithmic Series
  • Sets and Set Theory
  • Probability Function
  • Limits and Continuity
  • Applications of Derivatives
  • Indefinite Integrals Binomial Theorem
  • Matrices
  • Determinants
  • Definite Integrals
  • Cartesian System of Rectangular Coordinates
  • Statistics
  • Differentiation
  • Introduction to Three Dimensional Geometry
  • Straight Lines
  • Relations and Functions
  • Logarithms
  • Complex Numbers
  • Quadratic Equations
  • Circles
  • Conic Sections
  • Permutations and Combinations
  • Vectors

Science

  • Laws of motion
  • Units and measurements
  • Thermal properties of matter
  • Gravitation
  • Kinetic theory
  • Wave Optics
  • Work, energy, and power
  • Physical-world
  • Oscillations
  • Electromagnetic induction
  • Current electricity
  • Magnetism and Matter
  • Dual nature of radiation and matter
  • Alternating current
  • Atoms
  • Electromagnetic waves
  • Semiconductor electronics
  • Waves
  • The s – block elements
  • Communication systems
  • Stoichiometry
  • General principles of metallurgy
  • Organic compounds containing c, h, and o
  • P- block elements group 13 (boron family)
  • P-block elements
  • Chemical bonding and molecular structure
  • Electrochemistry and chemical kinetics
  • Haloalkanes and Haloarenes
  • Polymers
  • Organic compounds containing nitrogen
  • Organic chemistry-some basic principles and techniques and hydrocarbons
  • P-block elements – group 14 (carbon family)
  • Solutions
  • Surface chemistry
  • Thermodynamics
  • Chemical equilibrium and acids-bases
  • Hydrogen and its Compounds
  • Atomic structure
  • D and f block elements & coordination compounds
  • Classification of elements and periodicity in properties
  • Environmental chemistry
  • Biomolecules
  • Solid state
  • States of matter: gasses and liquids
  • Chemistry in everyday life
  • Ray optics and optical instruments
  • Mechanical properties of solids
  • Thermodynamics
  • Motion in a straight line
  • Nuclei
  • Motion in a plane
  • Systems of particles and rotational motion
  • Mechanical properties of fluids
  • Moving charges and magnetism
  • Electric charges and fields
  • Electrostatic potential and capacitance

Aptitude

  • Time and Work Partnership
  • Ratio and Proportion
  • Boats and Streams
  • Simple Interest
  • Percentages
  • Simple Equations
  • Problems on Numbers
  • Averages
  • Indices and Surds
  • Compound Interest
  • Volumes
  • Odd Man Out
  • Quadratic Equations
  • Probability
  • Profit and Loss
  • Simplification and Approximation
  • Time and Distance
  • Problems on Trains
  • Areas
  • Races and Games
  • Numbers and Ages
  • Mixtures and Allegations
  • Mensuration
  • Permutations and Combinations
  • Problems on L.C.M and H.C.F
  • Pipes and Cisterns

Reasoning

  • Symbolic/ Number Classification
  • Analytical Reasoning
  • Letter series
  • Venn diagrams
  • Non-Verbal Test
  • Semantic Analogy
  • Number series
  • Problem Solving
  • Arithmetical Number Series
  • Relationship Concepts
  • Figural Classification
  • Similarities
  • Visual Memory
  • Clocks
  • Discrimination
  • Space Visualization
  • Odd man out
  • Shapes and Mirror
  • Arithmetical Reasoning
  • Coding-Decoding

General Awareness

  • National Dance
  • Music & Literature
  • Indian Culture
  • Books and Authors
  • Important Dates
  • About India and it’s neighboring countries
  • Science and innovations
  • New inventions
  • Economic problems in India
  • Geography of India
  • National and International current affairs
  • Scientific observations
  • Political Science
  • World organizations
  • Countries and Capitals
  • Famous Places in India

best book for hp police constable exam

बुक्स के बारे में बताने से पहले मैं बताना चाहूंगा की पहले आप NCERT की 6th से 12th तक की सभी बुक्स पढ़े मैथ के साथ इसके बाद आपको कुछ एक और बुक्स पढ़नी है जिनकी लिस्ट निचे दी गई है।

रीजनिंग के लिए पुस्तकें

  1. a modern approach to logical reasoning
  2. rk jha reasoning book in hindi (रीजनिंग के लिए ये पुस्तक जरूर खरीदें)

मैथ की पुस्तकें

  1.  rs aggarwal math book in hindi (अगर ncert मैथ की जगह सिर्फ इसी पुस्तक को पढ़े तो यही काफी है)

दुनिया था भारत के सम्पूर्ण समान्य ज्ञान के लिए पुस्तक

  1. One Liner Approach General Knowledge (ये एक पुस्तक भारत और दुनिया के समान्य ज्ञान के लिए काफी है)

हिंदी के लिए पुस्तक

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  1. हिमाचल दर्पण समान्य ज्ञान ( इसके अलावा आप अपने नजदीकी बुक स्टोर से कोई अन्य पुस्तक भी लें)

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think and grow rich pdf in hindi अगर आप भी यही कीवर्ड गूगल पर सर्च करके आए हैं तो इसका आपको भी think and grow rich pdf in hindi की पीडीऍफ़ चाहिए इस किताब की मैंने बहुत साडी जगह पीडीऍफ़ ढूंढी लेकिन मुझे लगभग कहीं नहीं मिली लेकिन फिर एक जगह मुझे इसकी पीडीऍफ़ मिली और वो भी हिंदी में।

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मैं आपको एक बात पहले ही बता देना चाहता हूँ की think and grow rich pdf in hindi की जो पीडीऍफ़ है वो इस पोस्ट में मैंने आपके साथ शेयर की है लेकिन मैं ये नहीं जनता की मुझे इस पीडीऍफ़ को कब तक डिलीट करना पड़ेगा क्यूंकि अगर बुक के ओनर या किसी संबंधित ने इस चीज की रिपोर्ट की की think and grow rich pdf in hindi यहाँ पर है तो मुझे लेने के देने पढ़ सकते है तो जल्दी करिये और इस पीडीऍफ़ को डाउनलोड कर लीजिये।

think and grow rich in hindi में आगे पढ़ने से पहले हम इस किताब के बारे में विस्तार से बात करेंगे की आखिर ये किताब इतनी लोकप्रिय क्यों है और लोग इस किताब को इतना जायदा पढ़ना पसंद क्यों करते है।

जो आप सोच सकते हो वो आप प् सकते हो ये लोगो से सुनी होगी लेकिन किसी ने कभी ये नहीं बताया की ये कैसे हो सकता है लेकिन इस किताब को पढ़ने के बाद आपको इस बात का पता चल जाएगा की कैसे आप सिर्फ अपनी सोच से ही आमिर बन सकते हो लेकिन आपको अपनी सोच के अनुसार काम भी करना पड़ेगा तभी आप अमीर बन सकते हो नहीं तो सिर्फ सोच के और बिना काम किये सफलता मिलना मुमकिन नहीं है

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इस किताब में आपको ये बताया जाता है की कैसे आप अपनी सोच का इस्तेमाल अपने सपनो को पूरा करने के लिउए कर सकते हो और कैसे आप अपनी सोच को सुधर सकते हो।

इस पुस्तक में आपको कई ऐसे तरीके बताये गए है जिनकी मदद से आप अपनी सोच के नौसर खुद को ढाल सकते है और इसमें कई सरे उद्धरण भी है की कैसे आप अपनी सोच को बढ़िया बना सकते हो और बहुत सरे सफल लोगो के इसमें उदहारण भी दिए गए हाउ हैं की कैसे उन लोगो ने भी सिर्फ किसी आईडिया को सोचा था लेकिन आज वो उस आईडिया को हकीकत में बदल कर उसे अरबो कमा रहे है इसमें आपको हर एक लेसन में बहुत सारे उदहारण मिलते है।

मैं यहाँ इस पोस्ट में आपके साथ उन सभी उदहारण को साझा नहीं करना चाहता क्यूंकि अगर मैंने ऐसा किया तो आपका इस पुस्तक think and grow rich pdf in hindi को पढ़ने का मजा खराब हो जायेगा लेकिन मैं आपको ऊपर ऊपर से जरूर बता सकता हु की think and grow rich pdf in hindi कैसे आपकी जिंदगी बदल सकता है।

मान लीजिये मैं हर दिन एक बात सोचता हूँ की मुझे अमीर बनना है तो मैं सिर्फ सोचने से आमिर नहीं बन पाउँगा क्यूंकि ये मैं सिर्फ सोच रहा हूँ लेकिन अगर मैं सोचने के साथ साथ उस सोच को या सपने को पूरा करने के लिए हर दिन काम भी करता हु तो को बहुत जल्द सैवह कर सकता हु इसमें आपको दिमाग से समन्धित हर जानकारी मिलेगी इसलिए ही इस पुस्तक का नाम है सोचिये और अमित बनिए। think and grow rich pdf in hindi

lessons इन think and grow rich pdf in hindi

  • Chapter 1 with Preface
  • Chapter 2-Desire
  • Chapter 3- Faith
  • Chapter 4-Auto Suggestion
  • Chapter 5 – Specialized Knowledge
  • Chapter 6-Imagination
  • Chapter 7-Organize-Planning
  • Chapter 8-Decision
  • Chapter 9-Persistence
  • Chapter 10-Power Of the Mastermind
  • Chapter 11-Transmutation of Sex
  • Chapter 12-Subconscious Mind
  • Chapter 13-The Brain
  • Chapter 14-The Sixth Sense
  • Chapter 15-Outwitting the 6 Ghosts of Fear

ऊपर दिए गए इन lessons की आप हैडिंग पढ़ कर इस बात का अंदाजा लगा सकते हो की ये किताब आपको किन किन चीजों की जानकारी देगी और ये आ आपकी जिंदगी कैसे बदल सकती है लेकिन सोचने से कुछ नहीं होगा आपको आमिर भी बनना पड़ेगा और ये तभी सम्भब है जब आप किसी दृढ़ निश्चय करेंगे और उस काम में सफल होने के लिए जी जान से काम करेंगे।

इस किताब के लेखक नेपोलियन हिल ने ये किताब अपने अनुभबों के आधार पर लिखी है उन्होंने इस किताब को लिखने से पहले 500 सफल लोगो का इंटरव्यू लिया है इसके बाद उन्होंने इस किताब को लिखा है और आज ये किताब दू िया की सबसे अधिक बिकने वाली किताबों में से एक है पिछली पोस्ट में हमने रिच डैड पूइर डैड की बात की थी अगर आपको रिच डैड पुअर डैड का भी हिंदी में पीडीऍफ़ चाहिए तो आप यहाँ पर क्लिक कर सकते है।

अगर आप पैसे कमाना चाहते हो तो उसके लिए भी इस पुस्तक think and grow rich pdf in hindi में आपको कुछ स्टेप्स फॉलो करने को कहा गया है और फिर उन स्टेप्स को फॉलो करके उन्हें रोज पढ़ने को कहा गया है जिससे ये स्टेप्स आपको पूरी तरह से याद हो जाये उन स्टेप्स को पढ़ने के लिए आपको ये पूरी किताब पढ़नी पड़ेगी तभी आपको वो सब स्टेप्स पता चलेंगे लेकिन चलिए कोई नहीं निचे मैंने उन सभी 6 स्टेप्स को आपके साथ साझा कर दिया है।

इसमें सबसे पहला step तो ये कि आप कितना पैसा कमाना चाहते हो, ये आप खुद सोच लीजिये। सिर्फ ये बोलना काफी नहीं होगा की मुझे बहुत सारा पैसा कमाना है। आपको एक fix amount तो सोचना ही पड़ेगा ताकि आप अपना सपना सच में पूरा कर सके। वो रकम लाखो में भी हो सकती है और करोड़ो में भी लेकिन रकम तय करने से पहले निचे गए सभी पॉइंट्स पढ़ लें।

इसमें आपको दूसरा step है कि आपको ये तय करना होगा कि इतना पैसा कमाने के लिए आप क्या कर सकते है।अगर आपके पास कोई स्किल है तो आप उससे कमाएंगे या आप कोई स्किल अभी सिख रहे हो या बाद में सीखोगे जिससे आप पैसा। क्यूंकि बिना स्किल के आप पैसे नहीं कमा सकते क्युकी आपको फ्री में तो कोई पैसा नहीं देगा।

तीसरा step है कि वो तारीख डिसाइड करना जिस दिन आप अपनी सोची हुई रकम पा सकेंगे। जैसे की मुझे 1 मई 2021 तक 10 लाख कमाना है तो कुछ इस तरह से एक डेट तय कर लें ताकि आपको काम करने में आलस महसूस न हो।

चौथा step होगा प्लानिंग करना आपको एक ऐसा खास plan सोचना होगा जिससे आप ये सारा पैसा कमा सके,लेकिन याद रहे प्लान आपकी स्किल से संबंधित हो और एक plan तैयार करने के बाद आपको बिना झिझके उस रास्ते पर आगे बढ़ना है। एक प्लान में फ़ैल होने के बाद आप तुरंत दूसरे प्लान पर काम कर सकते हो या उसी प्लान पर ठीके रह सकते ही ये आपके अंदर के जनून पर निर्भर करता है।

अब आपका पांचवा step होगा कि आप अपना foolproof plan कहीं लिख ले। कितनी रकम आप चाहते है, कब तक चाहते है और आपका प्लान क्या होगा, ये हर चीज़ आप एक पेपर पर लिख ले। क्यूंकि ऐसा करने से आपको उस प्लान को याद करने में आसानी होगी।

और आखिर में छठा step है कि अपने इस statement को दिन में दो बार पढ़े और याद करे। ऐसा करने से ये प्लान आपके सब कॉन्शियस माइंड में बैठ जायेगा और आपको काम करने में आसानी होगी।

निचे think and grow rich in hindi किताब के बारे में कुछ लोगो के reviews दिखाए गए हैं जोकि उन्होंने ऐमज़ॉन पर साझा किये है –

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मैं कुछ समीक्षाओं के माध्यम से देख रहा था और देखता हूं कि कुछ लोगों ने इसे पांच सितारे दिए और कुछ ने इसे केवल एक ही दिया। मुझे लगता है कि जिन लोगों ने इसे एक स्टार दिया है, वे इस पुस्तक में दिए गए सिद्धांतों का अभ्यास करेंगे ताकि वे अपनी रेटिंग को जल्दी से अपग्रेड कर सकें।

यह पुस्तक 1937 में ग्रेट डिप्रेशन के दौरान प्रकाशित हुई थी, और अगर उस दौरान पीड़ित लोगों ने इस पुस्तक को पढ़ा होता तो शायद उनका जीवन बेहतर होता।

यह वास्तव में अपने आप को अमीर बनने के लिए समझाने के बारे में है। यह उन कदमों की रूपरेखा तैयार करता है जिन्हें आपको लेने की आवश्यकता है और जिन चरणों से आपको बचने की आवश्यकता है।

इस किताब में कई दिलचस्प विचार भी हैं। उदाहरण के लिए, सेक्स ट्रांसमिटेशन वह जगह है जहाँ आप अपनी कामेच्छा की ऊर्जा को अन्य उद्देश्यों में स्थानांतरित करते हैं। महान लोगों ने ऐसा किया है। साथ ही, 99% जनता का जीवन में कोई लक्ष्य नहीं है, इसीलिए वे उन नौकरियों में फंस गए हैं जो वे नहीं चाहते हैं।

ज्यादातर लोग तब तक सफल नहीं होते जब तक वे बड़े नहीं होते। वास्तव में, अधिकांश सफलता तब तक नहीं आती है जब तक आप 40 साल के नहीं हो जाते। एडिसन और कार्नेगी 40 साल की उम्र में थे जब उन्होंने अपना भाग्य बनाया था। वह इस बात का उल्लेख करना भूल गया कि जब वह पृथ्वी पर सबसे बड़ी सेना ले गया था, तब जॉर्ज वाशिंगटन 43 वर्ष के थे।

उनका गोलमटोल विचार बहुत पेचीदा है।

मैं यह नहीं देखता कि कोई इस पुस्तक को क्यों नहीं पढ़ना चाहेगा।

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जी हाँ, यह पुस्तक आपके जीवन को हमेशा के लिए बदल देगी। यह निश्चित रूप से मेरा बदल गया। व्यक्तिगत विकास ग्रंथों की किन चिंताओं में, मैं कहूंगा कि यह बाजार में विषय के बारे में सबसे पूर्ण पुस्तक है। नेपोलियन हिल, वास्तव में, मानव मन की शक्ति के बारे में बहुत सारे पहलुओं को शामिल करता है जो हम जीवन में इच्छा करते हैं। और, मेरा विश्वास करो, जब मैं कहता हूं, मैंने व्यक्तिगत विकास के बारे में बहुत सारी किताबें पढ़ी हैं। लेकिन अभी तक, यह पुस्तक सबसे अच्छी है।

हालांकि, इसे और अधिक स्पष्ट करने के लिए, यह पुस्तक अभिव्यक्ति की प्रक्रिया के प्रत्येक और हर पहलू पर विस्तृत जानकारी प्रदान करने के मामले में सर्वश्रेष्ठ नहीं है। फिर भी, यह इसके सभी पहलुओं को एक उचित तरीके से कवर करता है। जाहिर है, यदि आपका इरादा अभिव्यक्ति की प्रक्रिया के एक बहुत विशिष्ट पहलू में अपने ज्ञान का विस्तार करना है, उदाहरण के लिए, दृढ़ता, या कानून का आकर्षण, तो मैं आपको सलाह दूंगा कि आप उस विशिष्ट पहलू पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक पुस्तक प्राप्त करें।

इसके अलावा, यदि आप इस प्रकार के ज्ञान के लिए नए हैं, तो यह शुरुआत करने वाली पहली पुस्तक होगी। यह आपको इस पावर का एक सामान्य अवलोकन प्रदान करेगा और इसके बारे में आपके ज्ञान का विस्तार करने के लिए आपकी प्रेरणा को बढ़ावा देगा। इस पुस्तक को पढ़ने के बाद, मैं बॉब प्रॉक्टर की पुस्तक “विचार के बारे में सोचा ‘की जोरदार सिफारिश करूंगा। फिर, एक और अद्भुत पुस्तक!

लब्बोलुआब यह है कि एक बार जब आप इस प्रकार के विषय को पढ़ना शुरू करते हैं, तो आपको इसके बारे में अधिक से अधिक पढ़ना जारी रखना चाहिए। इसका कारण यह है कि इस शक्ति का सही और सहजता से उपयोग करने के लिए आपको अपने अवचेतन मन में इस अवधारणा को छापना होगा। और, जितना अधिक ज्ञान आप जमा करेंगे, उतना ही आपका अवचेतन मन इसे स्वीकार करेगा और इसे अपने पक्ष में उपयोग करेगा। आपकी व्यक्तिगत विकास यात्रा में आप सभी को शुभकामनाएँ। और याद रखो, हमेशा धन्य रहो! हमेशा एक आशीर्वाद हो!

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  • Book: Think and Grow Rich Hindi PDF
  • Author: Napoleon Hill
  • Pages: 235
  • Size: up to 24MB
  • Format: PDF
  • Language: Hindi & English
  • Quality: GOOD

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NOTE – हमने रिच डैड पुअर डैड पुस्तक जोकि Robert Kiyosaki ने लिखी है उसका लिंक इंटरनेट पर उपलब्ध समाग्री से साझा किया है इसकी पीडीऍफ़ हमने खुद नहीं बनाई है इसलिए अगर किसी व्यक्ति को जोकि इस पुस्तक से निजी संबंध रखता है कोई आपत्ति हो तो हमें nikjaliaryan@gmail.com पर मेसेज भेज सकता है हम पीडीऍफ़ हटा देंगे।

We have shared the link to the book Rich Dad Poor Dad, written by Robert Kiyosaki, we have not made a PDF of it, we have taken this pdf from the material available on the internet, so if anyone has a personal relationship with this book, it should be If you have any objections, send us a message at nikjayaaryan @ gmail .com. We will extract the pdf.

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rich dad poor dad Hindi pdf – रिच डैड पुअर डैड 1997 में रॉबर्ट कियोसाकी और शेरोन लेचर द्वारा लिखी गई पुस्तक है। यह वित्तीय साक्षरता (वित्तीय शिक्षा), वित्तीय स्वतंत्रता, और संपत्ति में निवेश के माध्यम से धन का निर्माण, अचल संपत्ति निवेश, व्यवसाय शुरू करने और खुद के स्वामित्व के साथ-साथ किसी की वित्तीय बुद्धिमत्ता (वित्तीय आईक्यू) को बढ़ाने की वकालत करता है।

रिच डैड पुअर डैड कोएओसाकी के जीवन पर आधारित, दृष्टांतों के एक सेट की शैली में लिखा गया है। टिट्युलर “रिच डैड” अपने दोस्त के पिता हैं, जो उद्यमिता और प्रेमी निवेश के कारण धन संचय करते हैं, जबकि “गरीब डैड” का दावा किया जाता है कि कियोसाकी के अपने पिता हैं,

जो कहते हैं कि उन्होंने जीवन भर कड़ी मेहनत की, लेकिन कभी वित्तीय सुरक्षा नहीं की। हालांकि, किसी ने भी यह साबित नहीं किया है कि रिच डैड, जिस व्यक्ति ने कथित तौर पर कियोसाकी को धनवान जीवन यापन के लिए अपनी सारी सलाह दी थी, वह कभी भी अस्तित्व में था।

1997 में रिच डैड पुअर डैड के प्रकाशन से पहले कियोसाकी द्वारा अर्जित धन के किसी भी विशाल भंडार का न तो कभी किसी ने दस्तावेज किया है

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आप गरीब पैदा हुए हो या आमिर ये आपके पिता की सम्पति पर निर्भर नहीं करता ये इस बात पर निर्भर करता है की आपको बचपन में किस तरह की शिक्षा मिलती है अगर आपको सिर्फ नौकरी करने वाली शिक्षा मिलती है और घर से भी सिर्फ नौकरी करने के लिए संस्कार मिलते है तो आप नौकर ही बनोगे लेकिन अगर आपको आपके स्कूल से नौकरी की शिक्षा मिलती है लेकिन आपके घर से आपको अमीर बनने की शिक्षा मिलती है तो आप अमीर बनोगे। अगर एक वाक्य में बोलै जाये तो आपका अमीर बनना और गरीब बनना आपके माता पिता और संस्कारो पर निर्भर करता है।

कुछ इसी तरह की सोच Rich Dad Poor Dad लेखक रॉबर्ट टी. कियोसाकी की है। रॉबर्ट टी. कियोसाकी ने इस पुस्तक को लिखा है उनका मानना है जिस बच्चे को घर से अमीर बनने की शिक्षा मिलती है वो बचा अमीर बनता है और जिस बच्चे को घर से नौकरी करने की शिक्षा मिलती है वह नौकर ही बनता है।

रॉबर्ट टी. कियोसाकी ने बताया है कि अमीर इतने अमीर क्यों हो रहे है और गरीब इतने गरीब क्यों हो रहे है और मध्य वर्ग के परिवार कर्जे में क्यों डूब रहे है। रॉबर्ट टी. कियोसाकी ने बताया है की उनके दो पिता थे उनका एक पिता अमीर था और एक पिता गरीब था उनका अमीर पिता उन्हें जिंदगी में कुछ अलग करने और बड़ा करने की सलाह देता था और वहीं उनका गरीब पिता उन्हें जिंदगी में पढ़ाई करने और एक नौकरी करके जिंदगी बनाने की सलाह देता था।

रॉबर्ट टी. कियोसाकी ने अपनी पुस्तक रिच डैड पुअर डैड को इसी कांसेप्ट पर लिखा है की उनका अमीर पिता उनके क्या कहता है और उनका गरीब पिता उन्हें क्या कहता है और अंत में उन्हें किसकी बात माननी चाहिए।

स्कूली पढ़ाई हमें बहुत कुछ सिखाती है लेकिन जिंदगी की पढ़ाई हमें जिंदगी जीना सिखाती है इसलिए हमें जिंदगी की पढ़ाई जायदा अच्छे से पढ़नी चाहिए क्यूंकि इसी के आधार पर हम और हमारे बचे अमीर और गरीब बनते है। स्कूली पढ़ाई के भरोसे बैठकर कभी किसी को कुछ हासिल नहीं हुआ है और न ही आगे आने वाले समय में होगा क्यूंकि स्कूली पढ़ाई हमारे मन और दिमाग को स्ट्रांग करने के लिए होती है नाकि नौकरी करने के लिए हम स्कूल की पढ़ाई को किस तरह पढ़ते है ये हम पर निर्भर करता है अगर आप नहीं स्कूल की पढ़ाई को नौकरी करने की द्रिष्टि से पढ़ते है तो आप भी नौकर बनोगे।

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Rich Dad Poor Dad Book Summary in Hindi – rich dad poor dad in Hindi pdf

गरीव मध्यवर्गीय लोग पैसे के लिए काम करते है। अमीर लोग पैसे से अपने लिए काम करते है।

अध्याय 1 : अमीर लोग पैसे के लिए काम नहीं करते अध्ययन सत्र
अध्याय 2 : आर्थिक साक्षरता क्यों सिखाएँ अध्ययन सत्र
अध्याय 3 : अपने ख़ुद के काम पर ध्यान केंद्रित करें अध्ययन सत्र
अध्याय 4 : टैक्स का इतिहास और कॉर्पोरेशन्स की शक्ति अध्ययन सत्र
अध्याय 5 : अमीर लोग पैसे का आविष्कार करते हैं अध्ययन सत्र
अध्याय 6 : सीखने के लिए काम करें – पैसे के लिए काम न करें अध्ययन सत्र
अध्याय 7 : बाधाओं को पार करना अध्ययन सत्र
अध्याय 8 : शुरुआत करना अध्ययन सत्र
अध्याय 9 : और ज़्यादा चाहिए, तो यह करें

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रिच डैड पुअर डैड किताब के लेखक अंत में कहते है की – यह पुस्तक उन्हीं छह सबक़ों के बारे में है, जिन्हें उतनी ही सरलता से बताया गया है, जितनी सरलता से अमीर डैडी ने मुझे इन्हें सिखाया था। ध्यान रहे, सबक़ का मतलब जवाब नहीं है। इसका अर्थ तो मार्गदर्शक है – ऐसा मार्गदर्शक, जो अधिक दौलतमंद बनने में आपकी और आपके बच्चों की मदद करेगा, चाहे इस लगातार परिवर्तनशील और अनिश्चित संसार में कुछ भी होता रहे।

रिच डैड पुअर डैड इन हिंदी

लेखक ने असल जिन दो डैड की बात की है उनमे जो गरीब डैड है वो उनके खुद के पिता है और जो अमर डैड है वो उसके दोस्त माइक के पिता है जोकि उसे हमेशा अलग करने और अमीर बनने की सलाह देते है क्यूंकि वो खुद भी अमीर है जबकि उनके खुद के पिता उन्हें पढ़ाई लिखे करके किसी अच्छी कम्पनी में नौकरी करने की सलाह देते है और जिंदगी में सैटेल होने की सलाह देते है।

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rich dad poor dad Hindi pdf – रॉबर्ट टोरू कियोसाकी (जन्म 8 अप्रैल, 1947) एक अमेरिकी व्यापारी और लेखक हैं। कियोसाकी, रिच ग्लोबल एलएलसी और रिच डैड कंपनी की संस्थापक है, जो एक निजी वित्तीय शिक्षा कंपनी है जो पुस्तकों और वीडियो के माध्यम से लोगों को व्यक्तिगत वित्त और व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करती है। कंपनी के मुख्य राजस्व रिच डैड सेमिनार के फ्रैंचाइज़ी से आते हैं, जिसका इस्तेमाल कियोसकी ब्रांड के शुल्क के लिए स्वतंत्र व्यक्तियों द्वारा किया जाता है। वह वयस्कों और बच्चों को व्यवसाय और वयस्कों के बारे में शिक्षित करने के लिए कैशफ्लो बोर्ड और सॉफ्टवेयर गेम के निर्माता भी हैं।

Rich Dad Poor Dad बुक को क्यों पढ़ना चाहिए – rich dad poor dad (hindi) book price – rich dad poor dad pdf drive -rich dad poor dad movie in hindi

जब हम अपनी जवानी में होते है तो हमारे पास हमारा भविष्य चुनने के कई सारे विकल्प होते है और हमारे माता पिता हमें मुख्यता नौकरी करने को बोलते है लेकिन कुछ लोगो का मन जिंदगी में कुछ अलग करने और अमीर बनने का होता है जैसे की मैं –

तो इस पुस्तक में लेखक ने यही बताया है की आपको किसकी सुननी चाहिए आपको खुदकी बात सुननी चाहिए की मुझे सबसे अलग बनना है और अमीर बनना है या किसी और की बात सुननी चाहिए और पूरी उम्र नौकर बनना चाहिए। इस पुस्तक को पढ़कर आपको वित्तीय चीजों की भी जानकारी मिलेगी जैसे की कैसे आप पैसे बचा सकते हो और अपना खर्चा कैसे कम कर सकते हो। rich dad poor dad Hindi pdf

एक अमीर इंसान कैसे सोचता है और बच्चो को क्या क्या सिखाता है ये सब इस किताब में पढ़ने को मिलेगा। इसके साथ अमीर लोगो की सोच उनकी बातें आने कहे शब्द ये सब आपको इस किताब में जानने को मिलेंगे इसके साथ आपको किसी गरीब इंसान के विचार और उसके द्वारा बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा के बारे में भी बताया जायेगा

रोबर्ट कियोसाकि (Robert Kiyosaki) ने Rich Dad Poor Dad बुक में क्या बताया है –

पुस्तक के लेखक रोबर्ट कियोसाकि के दो पिता थे एक वो जो पढ़े लिखे ते और नौकरी करते थे दूसरे वो जो कम पढ़े लिखे थे लेकिन काफी आमिर थे। अब कई लोगो को समझ नहीं आता की आखिर एक इंसान दो पिता आमिर गरीब कैसे हो सकते है तो इसके बारे में रोबर्ट कियोसाकि ने ये लिखा है की –

क्या सचमुच कोई अमीर डैडी थे? करोड़ों लोगों ने पूछा है, “क्या सचमुच कोई अमीर डैडी थे?” इस प्रश्न का जवाब देने के लिए आप अमीर डैडी के बेटे माइक की बातें सुन सकते हैं… जब वे रिच डैड रेडियो शो पर अतिथि के रूप में आए थे। आप Richdadradio.com पर जाकर वह प्रोग्राम सुन सकते हैं।

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पुस्तक का नाम : रिच डैड पुअर डैड rich dad poor dad Hindi pdf
पुस्तक के लेखक : रॉबर्ट टी. कियोसाकी
पुस्तक की भाषा : हिंदी
पुस्तक का साइज : 3.4MB
पुस्तक में पेज की संख्या : 225
नीचे दिए डाउनलोड बटन पर क्लिक करके आप Rich Dad Poor Dad पीडीऍफ़ को डाउनलोड कर सकते हैं।

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NOTE – हमने रिच डैड पुअर डैड पुस्तक जोकि Robert Kiyosaki ने लिखी है उसका लिंक इंटरनेट पर उपलब्ध समाग्री से साझा किया है इसकी पीडीऍफ़ हमने खुद नहीं बनाई है इसलिए अगर किसी व्यक्ति को जोकि इस पुस्तक से निजी संबंध रखता है कोई आपत्ति हो तो हमें nikjaliaryan@gmail.com पर मेसेज भेज सकता है हम पीडीऍफ़ हटा देंगे।

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This time I have given the exam of Delhi Police, I am preparing for the exam of chsl. Apart from this, I have given some more exams of SSC whether it is hpssc or someone else.

In this way, I know a little about where the questions asked by SSC are asked and which books are necessary for that.

Earlier, I used to come to the market for any book and start reading it, but in the exam, there were few questions from that book and I thought that there was a lack in my preparation but later I came to know that I do good preparation but the study material I have chosen is not right.

after that, I consulted some experts and then I bought books online and when I went to give the Delhi Police exam of 2020, 60 to 70 percent of question paper came from there Was. But that thing was different that I did not studying (:

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ssc syllabus – SSC Syllabus 2021 – ssc syllabus 2020 – ssc syllabus mts – ssc syllabus gd

Now we will talk about the syllabus of ssc, almost all the syllabus of ssc is same but if any extra is added to an exam then the syllabus can be changed as if computer was added in Delhi Police.
The main syllabus of SSC is the following, hardly anything comes out of SSC paper.

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below we are discussed about ssc all exam Syllabus

  1. SSC CGL Syllabus
  2. SSC CHSL Syllabus
  3. SSC CPO Syllabus
  4. SSC GD Syllabus
  5. SSC MTS Syllabus
  6. SSC JE Syllabus
  7. SSC Stenographer Syllabus

We have talked about which exams are done in SSC, but now we will talk about the full syllabus of these exams and about the tire in which they are done.

In all these exams, the whole syllabus is almost the same, but we will talk about the syllabus changes in some of the exams too, but before that I have told the whole syllabus which comes in almost every exam of SSC.

General Intelligence & Reasoning
General Knowledge
English Language
General Awareness
Quantitative Ability
Computer

This is the syllabus whose books you should know about because this syllabus comes in almost every exam whether it is cgl, chsl, Delhi Police, or any other exam, everyone’s syllabus is almost the same.

so I have given you every Some books related to a topic have been suggested, which I found beneficial to you too because these books make almost all the syllabus of SSC.

SSC syllabus full pdf download for free

If you want to take the PDF of all the syllabus of SSC, then the link below is given, here you will get a to z details of all the examinations of SSC. It has the syllabus of every SSC exam.

DOWNLOAD SSC SYLLABUS PDF

SSC Books List

below we give a list of all ssc books these all books suggested by experts so you can buy easily

SSC books for reasoning

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An editorial team of highly skilled professionals at Arihant works hand in glove to ensure that the students receive the best and accurate content through our books. From inception till the book comes out from print, the whole team comprising of authors, editors, proofreaders, and various others involved in shaping the book put in their best efforts, knowledge,

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Making Judgments
Input-Output
Analyzing Arguments
Logical Problems
Logical Games
Statement and Assumptions
Statement and Course of Action
Statement and Conclusions

Verbal Reasoning

Logical Order of Words
Syllogism
Analogy
Blood Relation Test
Series Completion
Data Sufficiency
Arithmetic Reasoning
Verification of Truth
Classification
Character Puzzles
Seating Arrangement
Cube and Cuboid
Logical Venn Diagrams
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Direction Sense Test
Coding-Decoding

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  4. BOOK Mai Har Chapter Ko Sahi Tarike Se Samjha Rakha Hai.
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About the Author
An editorial team of highly skilled professionals at Arihant works hand in glove to ensure that the students receive the best and accurate content through our books. From inception till the book comes out from print, the whole team comprising of authors, editors, proof-readers, and various others involved in shaping the book put in their best efforts, knowledge, and experience to produce the rigorous content the students receive. Keeping in mind the specific requirements of the students and various examinations, the carefully designed exam oriented and exam ready content comes out only after intensive research and analysis. The experts have adopted a whole new style of presenting the content which is easily understandable, leaving behind the old traditional methods which once used to be the most effective. They have been developing the latest content and updates as per the needs and requirements of the students making our books a hallmark for quality and reliability for the past 15 years.

Logical Order of Words
Syllogism
Analogy
Blood Relation Test
Series Completion
Data Sufficiency
Arithmetic Reasoning
Verification of Truth
Classification
Character Puzzles
Seating Arrangement
Cube and Cuboid
Logical Venn Diagrams
Dice
Direction Sense Test
Coding-Decoding
Number Series
Letter and Symbol Series
Essential Part
Analogies
Artificial Language
Matching Definitions
Making Judgments
Input-Output
Analyzing Arguments
Logical Problems
Logical Games
Statement and Assumptions
Statement and Course of Action
Statement and Conclusions

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SSC BOOK FOR MATH

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About the Author
Dr. R.S. Aggarwal was born on January 2, 1946, in a village in Delhi. He graduated from Kirori Mal College, University of Delhi. After completing his M.Sc. in Mathematics in 1969, he joined N.A.S. College, Meerut as a lecturer. In 1976, he was awarded a fellowship for 3 years and joined the University of Delhi for his Ph. D. Thereafter he was promoted as a reader in N.A.S. College, Meerut. In 1999, he joined M.M.H. College, Ghaziabad, as a reader and took voluntary retirement in 2003. He has written more than 75 books ranging from Nursery to M. Sc. and in the competitions segment from clerical grade to I.A.S. level.

For the past few years, continuous ‘new arithmetic’ has been one of the best books for achieving proper success in competitive examinations. But in the last few years, there have been many changes in the syllabus of the examinations, such as some chapters in Mathematics (Advanced Math) have appeared in the examinations. Revised Edition This book is based on the latest curriculum methodology. The new book in the presented book – Miscellaneous topics – to which four new lessons have been added respectively, rectangles, rectangles, coordinate geometry, prisms and pyramids and in addition to different examinations based on the recently conducted new method, the questions and answers have been compiled.

This book has been made keeping these examinations in mind.
• SSC. , Graduation and Matriculation level
• CDS
• U.D.C., L.D.C.
• NDA.
• Railway Recruitment Board Income Tax Inspector Police Sub-Inspector
• LIC Bank P.O., Specialist Officer
• Administrative Officer Grade
• P.C.S.
• MBA Mats etc. This version is very useful for the examinees.

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CONTENTS: R.S. Aggarwal Quantitative Aptitude

Number
HCF and LCM Of numbers
Decimal fraction
Simplification
Square root and cube root
Average
Problems of numbers
Problems on ages
Surds and indices
Percentage
Profit and loss
Ratio and proportion
Partnership
Chain rule
Time and work
Pipe and cisterns
Time and distance
Problems on trains
Boat and stream
Allegation and metrics
Simple interest
Compound interest
Areas
Volume of solids
Races
Calendar
Clock
Stocks and shares
True Discount
Banker’s Discount
Algebra
Linear Equations in Two Variables
Quadratic Equations
Trignometry
Lines and Angles
Triangles
Quadrilaterals
Circles
Polygons
Tabulation
Bar graphs
Line graphs
Pie charts
Number Series

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One Liner Approach General Knowledge

One Liner Approach General Knowledge: A Dictionary of Facts is based on the latest syllabus of NCERT. The book is useful for any student or professional who intends on improving their general knowledge.

Book – One Liner Approach General Knowledge Kiran’s
Author – Ratnesh Kumar Singh, Sanket Sah
Publishing Date – 2017
Publisher – Kiran Prakashan
Number of Pages – 1016
Language – Hindi

Data and information are the best The book is very small in size and words are also in small size. Many pages are blur so make some difficulties in reading. Lots of content are given that can not be found in other GK books. But some topics like science and technology and culture and art have less information than expected. This is the latest edition – information of 2019.

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Top 15 best backpack under 1000 – best backpack in india

last month I go out of my state for work and hotfoot I forgot to take my backpack because I have the last bus for going to bus stand and I take the decision to travel without any backpack.

if you are a traveler and you know the importance of the backpack then you can imagine how’s my journey gone. and that was the very worst experience for me because that is the first time I’m traveling without a backpack.

in this post, I do not share my story or experience with you but I am a traveler and know the importance of a backpack and I have 9 different backpacks. I have some knowledge about the amazing backpacks for traveling.

and today that I am sharing with you and I give you an example of the best backpacks for traveling and also I share my favorite 20 backpacks under 1000 with you with the help of these backpacks you can enjoy your traveling journey.

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POLESTAR Trekking Backpack & Rain Cover

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Hiking in bad rain and hiking in good weather can make it enjoyable because you are going to get a free rain cover that is great for protecting from long-lasting rain

It has a soft and airy back panel, which is perfect to fit all your needs. It is best to meet different needs of both men and women and the shoulder cloth is very soft which will save your shoulder and you will not have trouble breathing.

  • Complementary Rain Cover
  • Easy Access Outer Shoe Pocket
  • Equipped with a Cap closure on the top with zip pocket
  • Ergonomic S-curved straps help spread the weight around
  • Straps at the back to place a Yoga Mat

my personal experience – 1st one we saw that the inner pouch is attached 90° rotated. Got it replaced but the next one also has the same issue (its basic design issue).
The quality looks ok. Hopefully, it will be able to take on some load when we go out soon.
Finishing can be better (like threads from one side to other on the out, few seams not sweet properly, etc)
It has the rain cover (for those who can’t find it, it’s attached inside the lower inner pocket) so that it’s not lost.
Size-wise is ok.

BUY NOW – PRICE 830

BackPack for Hiking & Trekking with Shoe Compartment

I have told you about a very good companion to make your every trip perfect! Hiking, trekking, day trips, bike trips and regular trips, it is important to have a backpack with you for vacation travel, the bag in which you can carry all the stuff, and make your trip great. This bag has RipStop nylon material which is water resistant and provides a fair amount of protection from rain to all your belongings.

  • SHOE COMPARTMENT
  • ADJUSTABLE STRAP & MESH POCKET
  • SPACIOUS CAPACITY
  • DIMENSIONS
  • ZIPPER POCKETS
  • RAIN COVER
  • ALPINE CUT SHOULDER STRAPS
  • CLOSING HOOD CAP
  • EASY TO CARRY AND USE

This backpack is a perfect choice for camping, bikers, hiking, backpacking, carry-on bags for air travel. It is a durable pack, with the ability to carry your clothes, shoes, sleeping mats, first-aid and sleeping bags comfortably enough for week-long trips and trips for men and women. And i also have.

my personal review – The bag is awesome firstly i thought there is no rain cover for that i complaint on the number they provide on warranty card then too it was Sunday they responded n promised me to send the another rain cover. After checking my bag further i got the rain cover inside shoe compartment. Bag is really good at this cost and the prompt service they provide is excellent worth buying this trek bag will suggest my friends for sure thanks amazon.

BUY NOW – Price – 845

TRAWOC Travel Backpack for Outdoor Sport Camping Hiking Trekking Bag Rucksack

If you are looking for a stylish bag that will keep your travel as well as your style, then it is perfect for that because you get very good designs that make you a little more stylish and if you are looking for college or school trips But if you are going, then this is the best for him, so I would say that it is the best for you.

  • Shoe Compartment
  • Water Bottle Pocket
  • Padded Shoulder Strap
  • stylish
  • extra pockets

my personal review – My first impression was that no way it can accommodate my 2-week travel luggage. but it did. and it did very nicely. I even kept my laptop in it. It’s lightweight, durable and easy on your shoulders. I am impressed. Item is of excellent quality. But when filled, it’s very unsteady and you cannot keep it flat on the floor; it will collapse to either side.

There is no sturdy compartmentalization between the pockets. Though this is a simple issue, it’s very irritating and impractical when used for traveling. Although it has a laptop compartment, be very careful when packing your laptop in this bag, there is every chance of it getting damaged or bend since there is no cushioning between the compartments. Other than this, it’s a good bag and can carry a ton of stuff.

BUY NOW – Price 935

TRAWOC – best backpack brands in india

Choosing a backpack can be as difficult as choosing the right hiking boots when there are thousands of options.

Your pack is almost as important for your comfort as your shoes or the stuff inside your bag. Several questions need to be answered before proceeding to one of the many backpacks – some features such as load-carrying and volume capacity of a backpack are considered.

Then, you can consider pockets, compartments, weight, material, ease of use, and closed system. And what’s most important – your hiking backpack needs to be comfortable. Below is a photo of this backpack, showing you how it will look when you pick it up when you pack it.

  • Roomy compartment
  • Comfortable Design
  • Breathable Mesh Shoulder Straps
  • Laptop Sleeve
  • Water Resistant Material

If you still do not like a bag, then you will definitely like it because it is the best and my brother uses it and he has had this backpack for at least a year.

BUY NOW – Price 926

POLESTAR – branded backpacks at lowest price

These rucksacks are lightweight, have a soft back panel, and are perfect to meet all your needs, they will also be found cheaply and will get the best so if your budget is low then this is your best option.

Finest and breathable padded shoulder strap to meet various needs for both men and women; Made from water-resistant polyester fabric, providing strong and long-lasting performance; There is also a rain cover, enough room for your travel needs.

  • Hiking Rucksack
  • Compartments
  • Material
  • RAIN COVER & PREMIUM FABRIC
  • SPACIOUS & ORGANIZED
  • SHOE COMPARTMENT
  • BREATHABLE MESH SPONGE PADDING
  • YOGA MAT HOLDERS

my personal review – Will share details after few days of use. At this point what I can access is..
1. Rucksack is large enough for 10sets of clothes
2. Material seems good at its price range.
3. That free rain cover shall save the bag from medium rain.
4. Don’t expect the rucksack to maintain shape if it not tightly packed.
5. Looks smart
6. Comfortable to carry.
I will add more details in time.
Basically, this bag is worth its price. A must buy.

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Mount Track – best backpack for men in india

The company started Mount Track in 2010 with a vision to create a world class rucksack and backpack collection to fit every budget. His name is synonymous with quality throughout India. These do their best to ensure a permanent variety of durable and stylish backpacks with unique limited edition and seasonal items that fit your budget. And in this bagpack, you get a lot of good features along with style.

  • SHOE COMPARTMENT
  • ADJUSTABLE STRAP & MESH POCKET
  • SPACIOUS CAPACITY
  • DIMENSIONS
  • ZIPPER POCKETS
  • RAIN COVER
  • ALPINE CUT SHOULDER STRAPS
  • CLOSING HOOD CAP

Your perfect travel companion is ready for any kind of adventure life at all times! Dare to accompany you for walking tours, trekking camps, even day trips, bike trips and regular trips / vacation trips. The bag has RipStop nylon material that is water resistant and gives your gear a fair amount of protection from rain.

my personal review – Really awesome colour combination with clear details…rain cover available…nd overall it is so useful bag
1- colour combination is good but sticker of logos are not printed properly.
2- Three zips are in this travel bag
3- there are many steps for comfortable traveling
4- overall bag is too pretty…and looking is so smart

BUY NOW – Price 845

TRAWOC – Travel Backpack for Outdoor Sport Camping

This backpack is the best to meet all your needs as it is a large hiking bag that is 50 liters, which means that it is many times more than the normal requirement of a backpack and you can pack a lot of things in it easily. So that you will not need any other handbags. The larger backpack comes with a loop slave inside the main. Chanting makes your backpack even better, apart from that you get a separate place to protect the laptop.

  • SMART, SPACIOUS & MULTI UTILITY
  • compartments
  • ENDURING & LONG LASTING
  • CHIC, SMART & TRENDY LOOKS
  • WATER RESISTANT
  • 1 YEAR WARRANTY: This bag comes with a 1-year manufacturer warranty, which makes it a great investment.

my personal review – Item is of excellent quality. But when filled, it’s very unsteady and you cannot keep it flat on the floor; it will collapse to either side. There is no sturdy compartmentalization between the pockets. Though this is a simple issue, it’s very irritating and impractical when used for travelling. Although it has a laptop compartment, be very careful when packing your laptop in this bag, there is every chance of it getting damaged or bend since there is no cushioning between the compartments. Other than this, it’s a good bag and can carry a ton of stuff.

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Impulse – backpack for boys – stylish backpacks for men

If you are looking for a stylish backpack for you, then there can never be a better choice because this backpack is made for boys, although girls can use it easily. If you are going on a college trip or school trip or your office trip, then there is no better option for this backpack.

  • Capacity: 65 liter
  • compartments
  • Water-Resistant
  • Laptop Compatibility
  • 1-year manufacturer warranty is non-transferable and valid for 1 year from the original date of purchase.
  • Inside and Outside zip pocket
  • Rain cover

my personal review – ,it was quite much better than the expected, quality is great easily carried the only drawback is with the quantity it wasn’t the quantitative as they’ve shown.. Anyway value of money product.

BUY NOW – Price 989

POLESTAR – branded backpacks at lowest price

branded backpacks at lowest price

This backpack is very comfortable and easy to carry, this rucksack from Pole Star is ultra-light and durable, this backpack is best for any kind of travel and together it can cater to different needs of both men and women.

With a large capacity, if you are a man or a woman then it is great for a backpack and it is very stylish and gives you plenty of storage capacity. The wide, adjustable straps distribute weight evenly over your shoulders allowing for a comfortable trekking experience.

  • ERGONOMIC DESIGN
  • UTILITY
  • DETAILS: Roomy Enough for Your Hammock, Clothes, Towel, Books Etc.

my personal review – Reasonable price, good built quality, once you touch the bag u get to know the material quality, this bag is very spacius.

I have a trip on Jul 6th to kasol and I will bring this bag with me so still i have to check the comfort level but believe me this bag is very good, just to check the space i had put 5 T-shirts, 4 jeans, 2 shirts, my socks and even after that i had lots of space to put 3 jackets easily, each side you get 2 pocket to put you waster bottle and again there is no issue with the size, 3 small chain pockets you get to put your small things. If you guyz are looking for a good hiking bag you can go for it.

BUY NOW – Price 971

POLESTAR  – army backpack India – backpack under 600 – backpack travel bag

army backpack india

This backpack is for the Indian Army Lovers. You get a lot of compartments in this shop where you can keep all your things. This backpack will give you a lot of rest and your shoulders won’t hurt much. This backpack can be done in 2 ways as it has an extra front handle which you are unable to carry on your back.

  • Water Resistant: Yes; Compartments: 4, 1 Large Main Compartment And 1 Zipper Front Pocket, 1 Top Load Zipper Pocket; 1 Rain Cover Pocket At Bottom + And 2 Side Mesh Pockets
  • Capacity: 44 Liters; Weight: 0.58 Kgm; Dimensions: 56Cmx28Cmx28Cm

my personal review – I was a bit skeptical on the bag as I was checking on other websites and going to shops and the prices were so high, and when I saw this bag, read all the reviews which said that so good and the price was so low.

I was still not sure about the quality I would get but when it was delivered at my address I was shocked and amazed by everything I was looking, the camo print and the quality of the bag was really nice, I am happy for getting such a lovely rucksack and really grateful for Amazon to keep such quality products.


Will keep shopping and if you guys whoever are a bit tensed for opting for this bag, believe me it’s a deal you won’t regret.

BUY NOW – Price 679

Impulse Waterproof Travelling Trekking Hiking Camping Bag Backpack – backpack travel bag

This backpack caters to all the needs of the travelers, which are a must when starting a long and adventurous journey. You get storage capacity in it and it is also very stylish.

These rucksacks are made for people like you and it keeps all your travel supplies safe and provides all the comforts you need while traveling together.

Its sporty design and strong quality make them an ideal travel partner that keeps you ready to walk. If you are going on a long journey and find a nice little backpack that can impress someone, then you can get it better.

  • the enduring outdoor travel gear
  • built for the outdoors.
  • organize smart
  • practical shoulder straps.
  • ventilated back panel.
  • auxiliary parts.

my personal review – If you are going on a long journey and find a nice little backpack that impresses someone, then you can get it better. Apart from this, you get a good place to keep your luggage, if you are going on a short trip then you should take this bag only because it is designed for short trips.

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NOVEX Rucksack Hiking Backpack | Trekking Bag | Rucksack Bag

The backpack has been designed in such a way that it can make more accessories and it does not look strange. Its adjustable strap helps carry the bag comfortably. Apart from that it is quite attractive in appearance, also has fashion bottle holders on the sides. This is great for your college trips and is also very good in appearance.

This bag is the perfect pick to carry all your belongings together during a long trip or a short trip. It can also be used to carry other things.

my review about this bag – There is nothing dislikable in this bag. Wonderful making, very convenient for travel for all ages as it is very light in weight.

This bag can be used both by men and women. Above all the holder of this bag appears young despite its age. I am thrilled with this bag and I recommend it. And it is also very attractive in appearance.

BUY NOW – Price 999

RAWOC Travel Backpack for Outdoor Sport Camping Hiking Trekking Bag Rucksack

Choosing a travel backpack bag is more complicated than just looking at its design. Therefore, it is quite important to spend some time for your needs and research about the bag to make it completely safe.

When you are looking in a rucksack bag, you should be careful about many things, such as comfort, size, utility, and fit. Here we offer TRAWOC 50 Liter Adventure Military Style Rucksack Backpack Bag which caters to all your requirement and also makes your adventure comfortable, convenient, and stylish.

No matter whether you want to go on a day tour or camp for a few days, this trekking bag is your perfect travel mate that throws any kind of adventure life for you all the time!

my personal experience of using this bag –  It’s a nice bag. Size is adequate. I could stuff a week’s dress in it easily and still, space is left. A separate compartment for bags also was useful. They shouldn’t have mentioned that 50l sticker at the bottom which is poor branding in my opinion. Buckles are easily adjustable and there is a zipper provided to close the main compartment (very thoughtful). The bag lies comfortably on our shoulders. Overall quality is good and worth the price

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POLESTAR Hike BLK Rucksack with RAIN Cover/Hiking Backpack

POLESTAR ” HIKE” rucksack/travel backpack/camping backpack made with durable and ultra light weight polyester fabric, that will allow you to cover more miles using less energy, and will ultimately make backpacking way more fun. Ideal for camping, bikers, hiking, backpacking, carry-on bag for air travel. This is a durable pack that has the ability to carry sufficient loads comfortably, to hold your clothing, shoes, sleeping mat, first-aid and sleeping bag for week long trips and travel for men and women.

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Leather Gifts Polyester Water-Resistant Light-Weight Convertible Adventure Rucksack Trekking & Duffel Cabin Bag with Shoe Compartment

This Hiking Travel Backpack is made of high quality material, provides extra strength and long-lasting performance with the lightest Weight possible. Bottom pocket can hold a pair of shoes, Adjustable Whistle Buckle for storage capacity and Side 2 pocket for you no need to dig or dump stuff Out to reach what is needed. Inside protective pocket, large and safe enough for your laptop Style: Sport Strap Length: 75cm /29 inches Weight= 500 Gram / Light Weight

  • Main pocket for most of travel and sports necessities
  • On the sides, there are 2 very deep Zip pockets for holding your water bottles and umbrellas.
  • Bottom pocket can hold a pair of shoes
  • Material: waterproof nylon polyster
  • Strap Length: 70cm /27.5inches

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so these are 15 backpacks who’s make your journey great.